भारत-रूस फिर आये साथ: अमेरिका-चीन हैरान!

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच पुराने रणनीतिक रिश्ते अब नए आयाम पर पहुंच रहे हैं। वैश्विक राजनीति में जब अमेरिका और चीन जैसे महाशक्तियों की नज़रें भारत की विदेश नीति पर टिकी हैं, तब रूस का तातारस्तान क्षेत्र भारत के साथ आर्थिक रिश्ते गहराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हाल ही में कजान में आयोजित तातारस्तान-इंडिया म्यूचुअल एफिशिएंसी फोरम ने दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने का काम किया है।

तातारस्तान: रूस में भारत का प्रवेशद्वार

तातारस्तान के प्रमुख रुस्तम मिनिखानोव ने स्पष्ट किया कि उनका क्षेत्र भारत के लिए एक “गेटवे” की भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे भारत के साथ ऑटोमोबाइल, हेलीकॉप्टर, जहाज निर्माण और पेट्रोकेमिकल जैसे क्षेत्रों में व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाना चाहते हैं। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बड़े निवेश प्रोजेक्ट नहीं हैं, लेकिन बातचीत की दिशा में तैयारियां तेज हो गई हैं।

कजान में भारतीय वाणिज्य दूतावास: 

भारत ने रूस में अपनी राजनयिक उपस्थिति को मजबूत करने के तहत कजान में नया वाणिज्य दूतावास खोलने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य न केवल वीजा और कॉन्सुलर सेवाओं को बेहतर बनाना है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी गति देना है। भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि तातारस्तान जैसे क्षेत्रों के साथ संबंध मजबूत करने से दोनों देशों को समृद्धि की नई राहें मिलेंगी।

फोरम में मजबूत भागीदारी

8-9 अक्टूबर को आयोजित इस द्विपक्षीय फोरम में 50 से अधिक सरकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा के केंद्र में आईटी, फाइनेंस, चिकित्सा, श्रम बाजार, निवेश और डिजिटल समाधान जैसे क्षेत्र रहे। रूसी कंपनियों  जैसे कि टेनेफ्ट, कमाज और अन्य हाई-टेक उद्योगों ने भारतीय बाजार की संभावनाओं में रुचि दिखाई।

नई संभावनाओं की ओर

भारत और रूस के बीच Migration and Mobility Partnership Agreement पर बातचीत भी जारी है, जो दोनों देशों के बीच मानव संसाधन, शिक्षा और तकनीकी आदान-प्रदान को आसान बनाएगा। इस समझौते के तहत छात्रों, पेशेवरों और कुशल श्रमिकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।

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