क्या है नई व्यवस्था?
यदि कोई निजी स्कूल तीन वर्ष की औपबंधिक मान्यता प्राप्त करता है और इस अवधि के दौरान वह सभी निर्धारित नियमों और शर्तों का पूरी तरह से पालन करता है, तो उसे तीन साल पूरे होने पर स्वतः स्थायी मान्यता प्राप्त हो जाएगी। इसका मतलब है कि स्कूलों को बार-बार दस्तावेज़ जमा करने, निरीक्षण झेलने और शुल्क भरने जैसी औपचारिकताओं से मुक्ति मिलेगी।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
2013 में जारी मान्यता नियमों के तहत और 2019 के शासनादेश द्वारा यह व्यवस्था पहले से ही लागू थी, पर ज़मीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो पा रहा था। नतीजतन, कई स्कूलों को अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं से बार-बार गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। अब शिक्षा विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जिन स्कूलों ने सभी शर्तों का पालन किया है, उन्हें समय से स्थायी मान्यता मिलनी चाहिए।
क्या करना होगा स्कूलों को?
बेसिक शिक्षा अधिकारी और मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे सभी योग्य स्कूलों की फाइलों की समय पर समीक्षा करें और बिना देरी के उन्हें स्थायी मान्यता प्रदान करें। इससे पारदर्शिता भी बनी रहेगी और योग्य स्कूलों को उनका अधिकार समय पर मिल सकेगा।
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