रबी सीजन से लागू करने की तैयारी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बिहार में करीब सात साल पहले बंद कर दिया गया था। अब इसे दोबारा शुरू करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अधिकारियों के प्रशिक्षण के साथ योजना के तहत तय नियमों और समय-सीमा को लागू करने पर चर्चा की जा रही है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में रबी 2026-27 के लिए तैयार मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल के जरिए किसानों तक योजना का लाभ पहुंचाने पर जोर दिया गया।
फसल बर्बाद होने पर मिलेगा आर्थिक सहारा
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक आपदा या अन्य निर्धारित कारणों से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। इसके तहत किसानों को फसल के प्रकार के अनुसार सीमित प्रीमियम देना होता है।
सामान्य प्रावधानों के अनुसार खरीफ फसलों के लिए किसान का प्रीमियम 2 प्रतिशत, रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत और वाणिज्यिक एवं बागवानी फसलों के लिए 5 प्रतिशत तक निर्धारित है। शेष प्रीमियम में केंद्र और राज्य सरकार की हिस्सेदारी होती है।
कई विभाग मिलकर करेंगे काम
योजना को जमीन पर लागू करने में सिर्फ सहकारिता विभाग की भूमिका नहीं होगी। कृषि, आपदा प्रबंधन, वित्त, अर्थ एवं सांख्यिकी निदेशालय, नाबार्ड, बीआईआरएसएसी, एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी और एनआईसी समेत कई विभागों और संस्थानों की भागीदारी रहेगी।

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