पटना:बिहार में होने वाले अगले पंचायत चुनाव से पहले गांवों की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। चुनाव से पहले पंचायतों की सीमाओं और आरक्षित सीटों की स्थिति में बदलाव की संभावना है। लंबे अंतराल के बाद आरक्षण का नया चक्र लागू होने से कई मौजूदा दावेदारों की उम्मीदों पर असर पड़ सकता है, वहीं नए चेहरों के लिए भी चुनावी रास्ता खुल सकता है।
जातीय आंकड़ों से तय हो सकती है नई तस्वीर
पंचायतों की नई संरचना तैयार करने में राज्य के जाति आधारित सर्वे के आंकड़ों को आधार बनाए जाने की संभावना है। आबादी में बदलाव के अनुसार कुछ पंचायतों की सीमाएं दोबारा निर्धारित की जा सकती हैं। इसका असर मतदाता सूची और वार्डों की संख्या पर भी देखने को मिल सकता है।
बदल जाएगी कई सीटों की कैटेगरी
नए आरक्षण चक्र का सबसे बड़ा प्रभाव मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों की सीटों पर पड़ सकता है। अभी सामान्य वर्ग में आने वाली कुछ सीटें आरक्षित श्रेणी में जा सकती हैं। इसी तरह लंबे समय से आरक्षित सीटों में बदलाव होने पर वहां दूसरी श्रेणी के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर मिल सकता है। महिला आरक्षण के कारण भी कई सीटों का समीकरण बदलने की संभावना है।
मुखिया की सीटों में हो सकता है इजाफा
पंचायतों की संख्या बढ़ने पर मुखिया के पद भी बढ़ सकते हैं। मौजूदा समय में करीब 8 हजार मुखिया सीटें हैं, जिनकी संख्या नए परिसीमन के बाद बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि कितनी नई सीटें बनेंगी, यह आधिकारिक परिसीमन पूरा होने के बाद ही साफ होगा।
नए चेहरों को मिल सकता है मौका
अगर पंचायतों की सीमाएं और आरक्षण की स्थिति बदलती है तो कई पुराने समीकरण खत्म हो सकते हैं। जिन उम्मीदवारों को पिछली बार आरक्षण की वजह से मौका नहीं मिला था, वे इस बार मैदान में उतर सकते हैं। दूसरी ओर, मौजूदा प्रतिनिधियों के लिए अपनी सीट की नई श्रेणी सबसे बड़ी चिंता होगी।
फिलहाल चुनाव से पहले परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पर नजर बनी हुई है। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस पंचायत की सीट किस वर्ग के लिए आरक्षित होगी और मुखिया समेत अन्य पदों की संख्या में कितना बदलाव होगा।

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