मौजूदा सार्वजनिक जानकारी के अनुसार अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन और भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हैं, जिन्होंने SLBM क्षमता विकसित और संचालित की है।
अमेरिका के पास ट्राइडेंट मिसाइल
अमेरिका SLBM तकनीक के क्षेत्र में सबसे आगे रहने वाले देशों में शामिल है। उसकी Trident मिसाइलें परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों से लॉन्च की जाती हैं। अमेरिकी नौसेना की ओहायो और नई कोलंबिया श्रेणी की पनडुब्बियां इसकी रणनीतिक परमाणु क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
रूस की बुलावा-सिनेवा मिसाइलें
रूस के पास भी समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता है। उसकी Bulava और Sineva जैसी मिसाइलें अलग-अलग बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के साथ जुड़ी हैं। रूस की समुद्री परमाणु ताकत उसके रणनीतिक परमाणु त्रिकोण का अहम हिस्सा है।
चीन तेजी से बढ़ा रहा क्षमता
चीन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी समुद्री परमाणु क्षमता को तेजी से विकसित किया है। उसकी JuLang (JL) श्रृंखला की मिसाइलें बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों से लॉन्च की जाती हैं। चीन की नई पीढ़ी की SLBM क्षमता उसकी लंबी दूरी की रणनीतिक पहुंच को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फ्रांस की M51 मिसाइल
फ्रांस के पास M51 श्रृंखला की SLBM है। इन्हें फ्रांसीसी नौसेना की परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों पर तैनात किया जाता है। फ्रांस अपनी समुद्री परमाणु शक्ति को स्वतंत्र रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण आधार मानता है।
ब्रिटेन करता है Trident का इस्तेमाल
ब्रिटेन भी SLBM क्षमता रखने वाले देशों में शामिल है। उसकी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां अमेरिकी Trident मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल करती हैं। हालांकि मिसाइल तकनीक अमेरिकी मूल की है, लेकिन इसे ब्रिटेन की स्वतंत्र परमाणु प्रतिरोधक व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है।
भारत भी इस खास क्लब में है शामिल
अब बात भारत की। भारत ने भी SLBM तकनीक विकसित कर इस चुनिंदा समूह में अपनी जगह बनाई है। भारत की K-15 और K-4 जैसी मिसाइलों को परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों से लॉन्च करने के लिए विकसित किया गया है। भारतीय नौसेना की अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बियां देश की समुद्री परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

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