96 हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन को मिलेगा पानी
विभाग के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में पूरी हुई योजनाओं से 39,250 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता बढ़ी। वहीं मध्य गंगा द्वितीय चरण की परियोजना में चंदौसी शाखा से जुड़े अधूरे हिस्सों को पूरा किए जाने के बाद 57 हजार हेक्टेयर क्षमता और जुड़ी। इस तरह कुल वृद्धि 96,250 हेक्टेयर तक पहुंच गई। इसका उद्देश्य किसानों को फसल की जरूरत के मुताबिक समय पर नहरों और सिंचाई प्रणालियों से पानी उपलब्ध कराना है।
2026-27 के लिए 2380 करोड़ से ज्यादा मंजूर
सिंचाई विभाग की नई और पहले से चल रही परियोजनाओं के लिए चालू वित्तीय वर्ष में 2,380.69 करोड़ रुपये की पहली किस्त स्वीकृत की गई है। कुल 1,070 कार्यों के लिए जारी इस राशि में से 576.41 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सरकार ने अधिकारियों को परियोजनाओं में तेजी के साथ गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
बाढ़ से बचाव की परियोजनाओं पर भी जोर
सिर्फ सिंचाई ही नहीं, बल्कि बाढ़ से सुरक्षा के लिए भी इस साल 1,009.99 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई है। विभाग की ओर से 244 बाढ़ परियोजनाएं पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है। सरकार का जोर तय मानकों के अनुसार निर्माण कराने पर है।
इन इलाकों में पूरी हुईं प्रमुख योजनाएं
विभाग के मुताबिक महराजगंज में रोहिन बैराज, कन्नौज के तालग्राम और जलालाबाद क्षेत्र की नई नहर परियोजना, उन्नाव क्षेत्र में चौधरी चरण सिंह डलमऊ 'बी' पंप नहर प्रणाली की क्षमता बहाली और ललितपुर में कचनौंदा बांध से जुड़े शेष कार्य पूरे किए गए हैं।
इन परियोजनाओं के चालू होने से संबंधित इलाकों में सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने और किसानों को खेती के समय पानी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य अब बाकी परियोजनाओं को भी तय समय में पूरा कर किसानों तक इसका लाभ पहुंचाना है।

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