2019 से लागू है योजना
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना को 14 सितंबर 2019 से लागू किया गया था। इसका उद्देश्य कृषि कार्य से जुड़े पात्र परिवारों को दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहारा देना है। योजना के दायरे में खतौनी में दर्ज खातेदार और सहखातेदार के अलावा कुछ ऐसे कमाऊ पारिवारिक सदस्य भी शामिल हैं, जिनकी आजीविका संबंधित कृषि भूमि से होने वाली आय पर निर्भर है। इसके अलावा निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले भूमिहीन किसान, जो पट्टे या बटाई पर जमीन लेकर खेती करते हैं, वे भी योजना का लाभ उठा सकते हैं।
पिछले साल 21 हजार से ज्यादा को लाभ
वित्तीय वर्ष 2025-26 में सरकार ने इस योजना के लिए करीब 1,050 करोड़ रुपये का बजट रखा था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिलों की मांग के अनुसार राशि आवंटित की गई और करीब 21,659 आश्रित परिवारों को योजना का लाभ मिला। इससे पता चलता है कि दुर्घटना के बाद आर्थिक संकट झेल रहे किसान परिवारों के लिए यह योजना कितनी महत्वपूर्ण साबित हो रही है।
इस साल बजट में 100 करोड़ की बढ़ोतरी
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने योजना का बजट बढ़ाकर 1,150 करोड़ रुपये कर दिया है। यानी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में बजट में 100 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस बजट के तहत पहली और दूसरी किस्त के रूप में 862.50 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं जिलों की जरूरत के आधार पर 813.81 करोड़ रुपये आवंटित किए जाने की जानकारी दी गई है।
17 हजार से अधिक आश्रितों को मिल चुका लाभ
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 17,152 आश्रित परिवारों को योजना का लाभ मिल चुका है। वित्तीय वर्ष अभी जारी है, इसलिए आने वाले समय में लाभार्थियों की संख्या और बढ़ सकती है। मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना दुर्घटना की स्थिति में किसान परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच का काम कर रही है।

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