इन डेयरियों में महिलाओं की भागीदारी को भी खास महत्व दिया गया है। योजना के तहत 50 प्रतिशत डेयरियों का संचालन महिलाओं द्वारा किया जाना अनिवार्य रखा गया है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए यह योजना स्वरोजगार का एक बेहतर माध्यम बन सकती है।
डेयरी स्थापित करने पर मिलेगा 50 फीसदी अनुदान
योजना की सबसे बड़ी खासियत सरकारी आर्थिक सहायता है। मिनी नंदिनी डेयरी स्थापित करने के लिए निर्धारित परियोजना लागत पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। परियोजना की लागत करीब 23.60 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
इन नस्लों की गायों को पाल सकेंगे लाभार्थी
मिनी नंदिनी डेयरियों में गायों की नस्ल को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। इसके तहत साहीवाल और गिर नस्ल की गायों को प्राथमिकता दी जा रही है। लाभार्थी इन नस्लों के पशुओं की खरीद के लिए दूसरे राज्यों में भी संपर्क कर रहे हैं। विभाग की ओर से गायों की खरीद और डेयरी संचालन से जुड़ी आवश्यक सहायता और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि लाभार्थियों को डेयरी चलाने में व्यावहारिक परेशानी न हो।
महिलाओं के लिए रोजगार का बढ़ेगा दायरा
योजना में महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी का प्रावधान ग्रामीण महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे महिलाएं पशुपालन के जरिए अपने परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे सकेंगी। साथ ही गांवों में रहकर स्वरोजगार का अवसर मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
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