सरकार का मानना है कि इस फंड से केवल कंपनियों को पूंजी नहीं मिलेगी, बल्कि उत्पादन बढ़ाने, नई तकनीक अपनाने और रोजगार के अवसर तैयार करने में भी मदद मिलेगी। खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े छोटे और मध्यम उद्यमों पर फंड का बड़ा हिस्सा खर्च किए जाने की योजना है।
बड़े होने की क्षमता रखने वाली कंपनियों को सहारा
SME सेक्टर में कई ऐसे कारोबार हैं जिनके पास विस्तार की क्षमता है, लेकिन लंबे समय के लिए जरूरी इक्विटी पूंजी जुटाना उनके लिए चुनौती बना रहता है। नया फंड इसी कमी को दूर करने की कोशिश करेगा। इसके जरिए पात्र उद्यमों को विकास के अलग-अलग चरणों में पूंजी सहायता मिलने की उम्मीद है।
छोटे शहरों के उद्योगों पर भी नजर
इस योजना का लाभ केवल बड़े कारोबारी केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय टियर-2 और टियर-3 शहरों के औद्योगिक क्लस्टरों में मौजूद SMEs तक पहुंचाने पर भी जोर रहेगा। इससे छोटे शहरों में उद्योगों के विस्तार और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूती मिल सकती है। सरकार को उम्मीद है कि निवेश बढ़ने से नए रोजगार पैदा होंगे और अलग-अलग क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी।
विकसित भारत 2047 से जोड़ा गया फैसला
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, यह पहल SME सेक्टर को इक्विटी, पूंजी और विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। सरकार का लक्ष्य ऐसे भारतीय उद्यम तैयार करना है जो आगे चलकर अपने-अपने क्षेत्रों में बड़े और प्रतिस्पर्धी उद्योग बन सकें।
10,000 करोड़ रुपये का यह फंड सरकार के विकसित भारत@2047 के लक्ष्य से भी जुड़ा है। इसके जरिए नवाचार, उत्पादन, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की कोशिश की जाएगी, जिससे देश के छोटे-मध्यम उद्योगों को नई विकास गति मिल सके।

0 comments:
Post a Comment