सरकार का जोर अब केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा। गांवों में ऐसी परिसंपत्तियां तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा, जिनका लंबे समय तक ग्रामीणों को फायदा मिल सके। इसके साथ ही पानी की कमी, बाढ़ और दूसरी प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने की तैयारी भी इस ढांचे का हिस्सा होगी।
पानी और सिंचाई पर सबसे ज्यादा जोर
नई सूची में 128 काम जल सुरक्षा से संबंधित हैं। इनमें पुराने तालाबों और जलाशयों का पुनरुद्धार, जल संचयन, भूजल रिचार्ज और सिंचाई सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए आइस स्तूप जैसी व्यवस्थाओं को भी जगह दी गई है। मिट्टी के कटाव को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अलग-अलग प्रकार के पौधरोपण तथा कृषि-वानिकी से जुड़े कार्य भी कराए जा सकेंगे।
गांवों में बनेंगे जरूरी ढांचे
ग्रामीण बुनियादी ढांचे के तहत 111 प्रकार के काम निर्धारित किए गए हैं। इनमें सड़क, पुलिया और पैदल मार्ग के अलावा पंचायत भवन, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और ग्रामीण पुस्तकालय जैसी सुविधाएं शामिल हैं। स्कूलों में अतिरिक्त कमरे, प्रयोगशालाएं, शौचालय और खेल मैदान जैसी सुविधाओं को भी इस दायरे में रखा गया है। कचरा प्रबंधन, सौर ऊर्जा और बायोगैस से जुड़े कामों के जरिए गांवों को स्वच्छ और टिकाऊ बनाने पर भी जोर रहेगा।
गांव में ही बढ़ेंगे कमाई के साधन
आजीविका से जुड़े 98 कार्यों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश की जाएगी। किसानों और स्थानीय उत्पादकों के लिए भंडारण केंद्र, कोल्ड स्टोरेज, ग्रामीण हाट और बाजार से जुड़े ढांचे विकसित किए जा सकेंगे। पशुपालन, मछली पालन और दूसरे कृषि आधारित व्यवसायों के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने के साथ स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट को भी बढ़ावा दिया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों के लिए भी आधारभूत ढांचे का प्रावधान किया गया है।
आपदा से बचाव के लिए भी व्यवस्था
नई सूची में 38 कार्य आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन से जुड़े हैं। बाढ़ और चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा दीवार, तटबंध और राहत आश्रय बनाए जा सकेंगे। जंगलों को आग से बचाने तथा प्राकृतिक आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक संपत्तियों को फिर से तैयार करने के काम भी इसमें शामिल हैं।
गांव की जरूरत के हिसाब से तय होंगे काम
इस व्यवस्था की एक खास बात यह है कि विकास कार्यों का चयन स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जाएगा। ग्राम सभा और ग्रामीण समुदाय अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं के अनुसार कामों की पहचान करने में भूमिका निभाएंगे।
इस तरह नई व्यवस्था का लक्ष्य रोजगार के साथ पानी, सड़क, खेती, आजीविका और आपदा से सुरक्षा जैसी ग्रामीण जरूरतों को एक साथ मजबूत करना है। इससे गांवों में स्थायी विकास को गति देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की उम्मीद है।

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