अमेरिका ने सबसे पहले दिखाई क्षमता
अमेरिका ने वर्ष 1958 में एंटी-सैटेलाइट हथियारों से जुड़े शुरुआती परीक्षण किए थे। इसके बाद उसने अलग-अलग दौर में अपनी अंतरिक्ष सुरक्षा क्षमताओं को विकसित किया। अमेरिका के लिए सैटेलाइट उसकी सैन्य और रणनीतिक व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
रूस का भी है लंबा अनुभव
रूस के पास भी ASAT तकनीक विकसित करने का पुराना अनुभव है। सोवियत संघ के दौर से ही अंतरिक्ष में मौजूद लक्ष्यों को निशाना बनाने वाली तकनीकों पर काम होता रहा है। बाद के वर्षों में रूस ने इस क्षेत्र में कई परीक्षण किए।
चीन ने 2007 में किया परीक्षण
चीन ने 2007 में अपने एक पुराने मौसम उपग्रह को जमीन से लॉन्च किए गए इंटरसेप्टर से नष्ट करके ASAT क्षमता का प्रदर्शन किया था। इस परीक्षण के बाद अंतरिक्ष में पैदा हुए मलबे को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई थी।
भारत ने 2019 में हासिल की उपलब्धि
भारत ने 27 मार्च 2019 को ‘मिशन शक्ति’ के तहत ASAT क्षमता का सफल परीक्षण किया। DRDO के इंटरसेप्टर ने पृथ्वी की निचली कक्षा यानी LEO में मौजूद भारतीय सैटेलाइट को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इसके साथ ही भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद ASAT क्षमता का प्रदर्शन करने वाला चौथा देश बन गया।

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