यात्रियों की संख्या के आधार पर तय होगा रूट
प्रस्तावित कॉरिडोर का रूट तय करने से पहले पटना, हाजीपुर और मुजफ्फरपुर के बीच रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों का आकलन किया जाएगा। इसके आधार पर उन इलाकों की पहचान होगी, जहां यात्रियों की संख्या ज्यादा है। जमीन की उपलब्धता, निर्माण लागत और मौजूदा ट्रैफिक दबाव जैसे पहलुओं को भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
मेट्रो और रेलवे से होगी कनेक्टिविटी
आरआरटीएस को मौजूदा परिवहन व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। इसके लिए स्टेशनों को पटना मेट्रो, रेलवे स्टेशन, बस टर्मिनल और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों से कनेक्ट करने की संभावनाएं देखी जाएंगी। इससे यात्रियों को एक माध्यम से दूसरे माध्यम तक पहुंचने में आसानी होगी।
चार आरआरटीएस कॉरिडोर की योजना
बिहार सरकार राज्य में चार आरआरटीएस कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। पटना-मुजफ्फरपुर कॉरिडोर भी इसी योजना का हिस्सा है। सरकार ने एएआर और डीपीआर तैयार कराने को मंजूरी दी है, जिस पर करीब 31.59 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
आरआरटीएस की रफ्तार मेट्रो की तुलना में लंबी दूरी के सफर के लिए अधिक रखी जाती है। परियोजना के पूरा होने पर पटना से मुजफ्फरपुर के बीच यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है। इससे दोनों शहरों के साथ हाजीपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।

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