हालांकि इसे लेकर UPI यूजर्स के बीच सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि हर बड़े पेमेंट पर ग्राहक से पैसा काटा जाएगा। ऐसा नहीं है। MDR मर्चेंट से जुड़ा शुल्क है और सरकार के मुताबिक इसे सीधे ग्राहक से वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
आम UPI इस्तेमाल पर फिलहाल राहत
हर ट्रांजैक्शन इस बदलाव की जद में नहीं आएगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान पर MDR नहीं लगेगा। इसके अलावा किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति द्वारा भेजे गए पैसे भी इस शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे। सरकार के अनुमान के मुताबिक करीब 96 फीसदी मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन नए शुल्क की सीमा से प्रभावित नहीं होंगे। यानी रोजमर्रा के छोटे भुगतान करने वाले अधिकांश लोगों के लिए सामान्य UPI इस्तेमाल पहले की तरह जारी रहेगा।
बड़े बिल पर सामने आ सकता है विकल्प
असल बदलाव महंगी खरीदारी के वक्त महसूस हो सकता है। उदाहरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स, होटल, अस्पताल या किसी महंगे सामान का भुगतान करते समय अगर व्यापारी अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहक तक पहुंचाने की कोशिश करता है, तो कार्ड या नकद भुगतान का विकल्प आकर्षक लग सकता है।
एक सर्वे में 31 हजार से अधिक UPI यूजर्स की राय ली गई। काल्पनिक स्थिति में अगर ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त रकम मांगे, तो 27 फीसदी लोगों ने कैश और 26 फीसदी ने क्रेडिट कार्ड चुनने की बात कही। 13 फीसदी ने डेबिट कार्ड और 11 फीसदी ने बैंक ट्रांसफर का विकल्प बताया। केवल 14 फीसदी यूजर्स ने कहा कि वे अतिरिक्त रकम देकर भी UPI का इस्तेमाल करेंगे।

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