इस बार करीब 897 मामलों को सुनवाई के लिए शामिल किया गया है। इनमें पेंशन में विसंगति, ग्रेच्युटी और पारिवारिक पेंशन से जुड़े मामले शामिल हैं। अलग-अलग केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सेवानिवृत्त पेंशनर्स और उनके परिवारों को इस पहल से राहत मिलने की उम्मीद है।
ऑनलाइन भी जुड़ सकेंगे पेंशनर्स
राष्ट्रीय पेंशन अदालत का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के टीएन चतुर्वेदी मेमोरियल हॉल में होगा। खास बात यह है कि पेंशनर्स को सुनवाई में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचना जरूरी नहीं होगा। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रख सकेंगे।
अब तक हजारों मामलों का निपटारा
पेंशन अदालत की शुरुआत 2017 में हुई थी। विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले 16 आयोजनों में हजारों शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। लंबित मामलों पर सुनवाई के बाद संबंधित मंत्रालयों के साथ समीक्षा बैठक के जरिए आगे की कार्रवाई भी की जाती है।
इस पहल का उद्देश्य पेंशन से जुड़े मामलों को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकना और बुजुर्ग पेंशनर्स को आसान तरीके से न्याय दिलाना है।

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