यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो यह न केवल भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा, बल्कि पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान के लिए भी एक स्पष्ट संदेश होगा कि भारत अपनी हवाई ताकत को किसी भी परिस्थिति में कम नहीं होने देगा।
IAI तैयार करेगा उन्नत रिफ्यूलिंग टैंकर
इस प्रस्तावित सौदे के तहत IAI कंपनी पुराने बोइंग 767 कमर्शियल एयरक्राफ्ट्स को अत्याधुनिक एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर विमानों में परिवर्तित करेगी। इसके बाद इन्हें भारतीय वायुसेना को सौंपा जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस सौदे में लगभग 30% ‘मेड इन इंडिया’ कंपोनेंट्स शामिल होंगे। यानी विमानों में कुछ पुर्जे और तकनीकी सहयोग भारत में ही तैयार किया जाएगा।
क्यों ज़रूरी हैं रिफ्यूलिंग टैंकर विमान
भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल रूस निर्मित Il-78 टैंकर विमान हैं, जिनकी संख्या केवल छह है। ये विमान आगरा एयरबेस में तैनात हैं और विभिन्न लड़ाकू विमानों को हवा में ईंधन भरने की सुविधा प्रदान करते हैं। लेकिन इनकी संख्या सीमित होने के कारण लंबे ऑपरेशन या कई फ्रंट पर एक साथ काम करने की स्थिति में वायुसेना को कठिनाइयाँ झेलनी पड़ती हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, “मिड-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर वायुसेना की ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ क्षमता को कई गुना बढ़ा देते हैं। इनके ज़रिए लड़ाकू विमान बिना रुके लंबी दूरी तक उड़ान भर सकते हैं, जिससे ऑपरेशनल पहुंच और रणनीतिक गहराई बढ़ती है।”
IAI क्यों बना भारत की पहली पसंद
इस डील के लिए पहले रूस और यूरोपीय कंपनियाँ भी रेस में थीं, लेकिन तकनीकी मानकों, लागत और स्थानीय उत्पादन की शर्तों के चलते भारत ने इजराइल की कंपनी को प्राथमिकता दी। IAI पहले से ही भारत के साथ कई रक्षा प्रोजेक्ट्स जैसे बराक मिसाइल सिस्टम, हेरॉन ड्रोन और नेवल रडार सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे दोनों देशों के बीच विश्वास और तकनीकी सहयोग मजबूत हुआ है।

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