जिला पंचायत वार्डों में कमी
पंचायती राज विभाग के अनुसार, राज्य में अब जिला पंचायत सदस्य के 3050 की जगह 3020 वार्डों में ही चुनाव होंगे। यानी कुल 30 वार्ड कम हो गए हैं। नए परिसीमन में 16 जिलों के वार्ड प्रभावित हुए हैं। देवरिया में सबसे अधिक 5 वार्ड समाप्त हुए हैं।
मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में 3-3 वार्ड घटाए गए हैं। वहीं कुशीनगर, आजमगढ़, प्रतापगढ़, मऊ, गोंडा, बलरामपुर, मथुरा, संतकबीरनगर, गोरखपुर, बहराइच, अयोध्या, अलीगढ़ और फर्रूखाबाद जैसे जिलों में 1-2 वार्ड कम हुए हैं।
क्षेत्र पंचायत वार्डों में भी कमी
राज्य में पहले 75,844 क्षेत्र पंचायत सदस्य वार्ड थे, जिनमें से परिसीमन के बाद 830 वार्ड घटकर अब 75,014 वार्ड रह गए हैं। यह कमी मुख्यतः उन क्षेत्रों में हुई है, जहाँ शहरी सीमा विस्तार या नए नगर निकायों का गठन किया गया है।
ग्राम पंचायतों में भी गिरावट
ग्राम पंचायतों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2021 में जहां 58,189 ग्राम पंचायतें थीं, अब यह संख्या घटकर 57,694 रह गई है। यानी 495 ग्राम पंचायतें समाप्त हो गई हैं। इसके साथ ही, ग्राम पंचायत सदस्य के लगभग 4600 वार्ड कम होने का अनुमान लगाया जा रहा है। वर्ष 2021 में ग्राम पंचायत सदस्य के कुल 7,32,643 वार्ड थे।
परिसीमन का कारण और प्रभाव
नए परिसीमन के पीछे मुख्य कारण राज्य के कई हिस्सों में नए शहरी निकायों का गठन और मौजूदा नगर क्षेत्रों की सीमा का विस्तार है। जब कोई गाँव किसी नगर पालिका या नगर निगम क्षेत्र में शामिल होता है, तो वह ग्राम पंचायत के दायरे से बाहर हो जाता है। परिणामस्वरूप, संबंधित पंचायत और उसके वार्ड स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
यह बदलाव न केवल स्थानीय प्रशासनिक ढांचे को प्रभावित करेगा, बल्कि आगामी पंचायत चुनावों की रणनीतियों और राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर डालेगा। कम हुई पंचायतों का मतलब है कि कई क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ जाएगा, जिससे स्थानीय नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र हो सकती है।
क्या है सरकार का अगला कदम?
पंचायती राज विभाग ने परिसीमन प्रक्रिया पूरी कर ली है और अब यह विस्तृत रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों की अधिसूचना जारी होगी और सीटों का आरक्षण तय किया जाएगा।

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