आपको बता दें की बिहार सरकार का लक्ष्य है कि योजना का लाभ जरूरतमंद ग्रामीण श्रमिकों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचे और इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। इसके लिए सामाजिक अंकेक्षण और प्रशिक्षण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
मजदूरों को मिलेंगे 125 दिन रोजगार
नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण श्रमिकों को पहले की तुलना में ज्यादा रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। अब 100 दिनों के स्थान पर 125 दिनों तक काम देने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा खेती के समय को ध्यान में रखते हुए श्रमिकों के कृषि कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए रबी और खरीफ सीजन के दौरान योजना के कामों को रोकने की व्यवस्था की गई है।
खेती को प्राथमिकता, किसानों को राहत
ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि योजना लागू करते समय किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सरकार नहीं चाहती कि मजदूरों की उपलब्धता कम होने से कृषि कार्य प्रभावित हों। इसी कारण खेती के महत्वपूर्ण समय में योजना के कामों को नियंत्रित किया जाएगा, ताकि किसान समय पर अपनी फसल की देखभाल कर सकें।
बिहार को मिला 6715 करोड़ का अंतरिम बजट
योजना के बेहतर संचालन के लिए केंद्र सरकार ने बिहार के लिए करीब 6715 करोड़ रुपये के अंतरिम बजट को मंजूरी दी है। इससे आने वाले महीनों में योजना के कार्यों को गति मिलेगी। सरकार का दावा है कि योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों को आर्थिक मजबूती मिलेगी।
इस योजना की पारदर्शिता के लिए हो रही खास तैयारी
योजना को सही तरीके से लागू करने के लिए सामाजिक अंकेक्षण से जुड़े कर्मचारियों और स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में योजना की निगरानी, कामों की जांच, रिकॉर्ड की जांच और जनता की भागीदारी से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये लोग जमीनी स्तर पर जाकर योजना के कामों का मूल्यांकन करेंगे।
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