इस अभियान को स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग मिलकर संचालित करेंगे। इसका उद्देश्य बच्चों को यह बताना है कि किसी पशु के काटने या खरोंचने की स्थिति में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए, ताकि गंभीर खतरे से बचा जा सके।
बच्चों को सिखाए जाएंगे बचाव के तरीके
प्रशिक्षण के दौरान छात्रों और शिक्षकों को बताया जाएगा कि अगर कुत्ता, बंदर, सियार, लोमड़ी या कोई अन्य पशु काट ले तो घबराने के बजाय तुरंत प्राथमिक उपचार करना जरूरी है। उन्हें समझाया जाएगा कि घाव को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए और इसके बाद जल्द से जल्द स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी रेबीज टीका लगवाना चाहिए।
स्कूलों में होगा व्यवहारिक अभ्यास
सरकार की योजना है कि प्रशिक्षण केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों को व्यवहारिक रूप से भी प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसके लिए डमी पीड़ित के जरिए यह दिखाया जाएगा कि पशु काटने के बाद किस तरह प्राथमिक उपचार किया जाना चाहिए। स्कूलों में साबुन और जरूरी किट उपलब्ध कराने की तैयारी भी की जा रही है।
विशेषज्ञ देंगे बच्चों को जानकारी
इस अभियान में पशु चिकित्सक, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और एंटी रेबीज कार्यक्रम से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे। पशु चिकित्सक बच्चों को यह भी बताएंगे कि आवारा पशुओं से कैसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किन परिस्थितियों में सावधानी बरतनी चाहिए।
रेबीज को लेकर जागरूकता जरूरी
दरअसल, रेबीज एक गंभीर बीमारी है और समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा बढ़ सकता है। अधिकारियों के अनुसार सही समय पर प्राथमिक उपचार और टीकाकरण से इससे बचाव संभव है। स्कूलों में यह अभियान चलाने का मकसद बच्चों को शुरुआत से ही जागरूक बनाना है, ताकि वे किसी आपात स्थिति में सही फैसला ले सकें और अपने साथ-साथ दूसरों की भी मदद कर सकें।

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