विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस मामले को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद ने गलत तरीके से अधिभार की गणना किए जाने का आरोप लगाते हुए विशेष ऑडिट और दोबारा हिसाब कराने की मांग की है।
गलत गणना का लगाया गया आरोप
परिषद का कहना है कि पावर कारपोरेशन ने फ्यूल एंड पावर परचेज कास्ट एडजस्टमेंट (FPPCA) की गणना सही तरीके से नहीं की। इसी आधार पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त ईंधन अधिभार वसूला गया। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक अप्रैल 2025 से जून 2026 तक करीब 2801 करोड़ रुपये ईंधन अधिभार के रूप में वसूले गए, जबकि उपभोक्ताओं को सिर्फ 684 करोड़ रुपये का ही लाभ दिया गया।
आयोग से की गई ये मांग
विद्युत उपभोक्ता परिषद ने आयोग से मांग की है कि पिछले 14 महीनों की पूरी प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही सही तरीके से पुनर्गणना कर उपभोक्ताओं को अतिरिक्त वसूली गई राशि का फायदा दिया जाए। परिषद ने यह भी मांग रखी है कि जिन अधिकारियों या जिम्मेदार लोगों की वजह से गलत गणना हुई, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
बिल में समायोजन से राहत
अगर जांच में अतिरिक्त वसूली की पुष्टि होती है तो यह राशि सीधे उपभोक्ताओं के बिजली बिल में समायोजित की जा सकती है। इसके अलावा भविष्य में ऐसी गड़बड़ी रोकने के लिए गणना प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने की मांग भी की गई है। अब सभी की नजर विद्युत नियामक आयोग के अगले कदम पर है। फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि बिजली उपभोक्ताओं को कितनी राहत मिलती है।

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