9334 मौजों का कैडस्ट्रल खतियान नहीं मिला
राज्य में जमीन के पुराने रिकॉर्ड को डिजिटल करने की प्रक्रिया के दौरान यह सामने आया कि बिहार के 9334 मौजों का कैडस्ट्रल सर्वे खतियान सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। इसी को देखते हुए विभाग ने आम लोगों से सहयोग मांगा है। अगर किसी रैयत, जमीन मालिक या परिवार के पास पुराना खतियान मौजूद है तो उसे अंचल कार्यालय या जिला अभिलेखागार में जमा कराया जा सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है कैडस्ट्रल सर्वे का खतियान?
कैडस्ट्रल सर्वे का खतियान जमीन के इतिहास से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में माना जाता है। बिहार में ब्रिटिश शासन के समय जमीन का पहला बड़ा सर्वे कराया गया था। इसी सर्वे के आधार पर जमीन के मालिक, रकबा और अधिकार से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए गए थे। बाद में रीविजनल सर्वे हुआ, जिसमें पुराने रिकॉर्ड के आधार पर नए खतियान बनाए गए। आज भी कई जमीन विवादों में पुराने कैडस्ट्रल खतियान और नए खतियान का मिलान किया जाता है।
100 साल से ज्यादा पुराने हैं कई जमीन रिकॉर्ड
बिहार में कैडस्ट्रल सर्वे का काम करीब 1900 से 1910 के बीच बड़े स्तर पर हुआ था। कुछ क्षेत्रों में यह प्रक्रिया 1892 से 1920 तक भी चली। ये रिकॉर्ड बंगाल काश्तकारी अधिनियम, 1885 के तहत तैयार किए गए थे। इतने पुराने होने के बावजूद आज भी इनकी अहमियत बनी हुई है।
सरकार ने डिजिटल किया जमीन रिकॉर्ड
राज्य सरकार की ओर से जमीन के दस्तावेजों को डिजिटल करने का काम किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को जमीन से जुड़े रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध कराना और विवादों को कम करना है। लेकिन जिन क्षेत्रों के पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं, वहां परेशानी आ सकती है। इसी वजह से विभाग लोगों से पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराने की अपील कर रहा है।

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