बिहार में जमीन खरीद-बिक्री को लेकर बड़ी खबर, रैयतों के लिए खुशखबरी!

पटना। बिहार में जमीन बेचने वाले रैयतों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत यदि कोई भू-स्वामी अपनी जमीन बिहार राज्य आवास बोर्ड को बेचता है, तो उसे स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा।

कैसे होगी जमीन खरीद की प्रक्रिया?

नई व्यवस्था के अनुसार यदि कोई भूमि मालिक अपनी जमीन बेचने का इच्छुक है, तो उसे आवश्यक दस्तावेजों और प्रारूप विक्रय विलेख के साथ अपना प्रस्ताव बिहार राज्य आवास बोर्ड को देना होगा। प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद आवास बोर्ड निर्धारित समय के भीतर उसकी प्रारंभिक जांच करेगा और भूमि के अनुमानित मूल्य के आधार पर मामले को आगे की स्वीकृति के लिए संबंधित अधिकारियों के पास भेजेगा।

भूमि मूल्य का होगा निर्धारण

जमीन की कीमत तय करने के लिए जिलास्तरीय या प्रमंडलीय स्तर पर गठित समिति प्रस्ताव की जांच करेगी। समिति भूमि की स्थिति, मूल्य और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों का आकलन कर अंतिम दर निर्धारित करेगी। इसके बाद भू-स्वामी की लिखित सहमति प्राप्त की जाएगी और प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास भेजा जाएगा।

मंजूरी के बाद होगा भुगतान

संबंधित प्राधिकारी से स्वीकृति मिलने के बाद बिहार राज्य आवास बोर्ड निर्धारित अवधि के भीतर भूमि मालिक को भुगतान करेगा। भुगतान के साथ ही अधिकृत अधिकारी के माध्यम से विक्रय विलेख का निबंधन कराया जाएगा और जमीन का नामांतरण भी पूरा किया जाएगा।

स्टांप और पंजीयन शुल्क में छूट

इस पूरी प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आवास बोर्ड द्वारा खरीदी जाने वाली भूमि पर स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क लागू नहीं होगा। इससे जमीन बेचने वाले रैयतों का अतिरिक्त खर्च बचेगा और उन्हें बेहतर आर्थिक लाभ मिल सकेगा।

विकास परियोजनाओं को मिलेगी गति

सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था से ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप जैसी आवासीय परियोजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराना आसान होगा। साथ ही जमीन मालिकों और सरकारी एजेंसियों के बीच खरीद-बिक्री की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल बन सकेगी।

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