22 हजार गांवों में बन चुकी है डेयरी सोसाइटी
राज्य के करीब 22 हजार गांवों में डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी का गठन किया जा चुका है। इन सोसाइटियों के माध्यम से दूध संग्रह का काम जल्द शुरू करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य है कि गांवों में दूध उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएं।
युवाओं और महिलाओं को मिलेगा प्रोत्साहन
डेयरी व्यवसाय से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए महिलाओं, युवाओं और किसानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए दुधारू पशुओं की यूनिट लगाने, पशुपालन शुरू करने और डेयरी को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है।
5 लाख रुपये तक मिल सकती है ऋण सुविधा
सहकारिता विभाग की योजना के अनुसार डेयरी यूनिट लगाने के लिए सहकारी बैंकों के माध्यम से 5 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा सकता है। इस ऋण के लिए बैंक गारंटी की व्यवस्था सरकार की ओर से किए जाने का प्रस्ताव है। अच्छा प्रदर्शन करने वाली डेयरी यूनिट को आगे चलकर अधिक सहायता देने की भी योजना बनाई जा सकती है।
पहले से मिल रहा है अनुदान का लाभ
वर्तमान में राज्य सरकार दुधारू पशुओं की छोटी डेयरी यूनिट लगाने के लिए युवाओं और किसानों को अनुदान भी दे रही है। इस योजना के तहत दो दुधारू पशुओं की यूनिट के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब ऋण सुविधा मिलने से लोग बड़े स्तर पर डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकेंगे।
दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य
सरकार का उद्देश्य हर गांव में डेयरी गतिविधियों को मजबूत करना है, ताकि किसानों की आय बढ़े और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर विकसित हों। डेयरी को-ऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से दूध संग्रह, पशुपालन और कारोबार को एक साथ बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है।

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