आपको बता दें की वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के जरिए प्रदेश के 27 लाख से ज्यादा छात्रों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। सरकार का उद्देश्य है कि पैसों की कमी के कारण किसी भी छात्र की पढ़ाई न रुके।
प्रयागराज बना सबसे आगे
छात्रवृत्ति वितरण के मामले में प्रयागराज ने प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। जिले में करीब 1.69 लाख छात्रों को योजना का लाभ मिला है। इसके बाद गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर और वाराणसी जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी गई है। इससे साफ है कि योजना का लाभ प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच रहा है।
बेटियों को भी मिल रहा बढ़ावा
यह योजना केवल छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्राओं को भी शिक्षा जारी रखने में मदद कर रही है। इंटरमीडिएट से लेकर उच्च शिक्षा तक बड़ी संख्या में बेटियों को इसका लाभ मिला है। इसके अलावा समाज के अन्य कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को भी योजना से जोड़ा गया है। बीए, बीएससी, बीकॉम, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, बीटेक, एमबीबीएस और एमबीए जैसे कई कोर्स इसमें शामिल हैं।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ ऐसे छात्र ले सकते हैं जिनके परिवार की वार्षिक आय निर्धारित सीमा के अंदर है। पात्र छात्रों को पढ़ाई से जुड़े खर्चों में सहायता दी जाती है, जिससे वे अपनी शिक्षा आगे जारी रख सकें। सरकार ने आवेदन और भुगतान प्रक्रिया को ऑनलाइन किया है। छात्र छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं और स्वीकृति के बाद राशि सीधे बैंक खाते में भेजी जाती है।
सरकार का लक्ष्य- शिक्षा से कोई दूर न हो
पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अनुसार, योजना का मुख्य उद्देश्य आर्थिक परेशानी झेल रहे छात्रों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है। सरकार का मानना है कि शिक्षा ही आगे बढ़ने का सबसे मजबूत माध्यम है। इसी सोच के साथ छात्रवृत्ति योजना के जरिए कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को आर्थिक सहारा दिया जा रहा है, ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें।

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