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बिहार में दूसरी बार गलती पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द!

शिवहर: सड़क सुरक्षा और हेलमेट पहनने की आदत को बढ़ावा देने के लिए बिहार सरकार ने एक नया आदेश जारी किया है, जिसमें एक बहुत ही सख्त कदम उठाया गया है। शिवहर जिले में अब यदि कोई व्यक्ति पहली बार बिना हेलमेट के पकड़ा जाता है, तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। लेकिन, अगर वह व्यक्ति दूसरी बार बिना हेलमेट के पकड़ा जाता है, तो उसका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

हेलमेट की अनिवार्यता

हेलमेट पहनने की आदत को लेकर सरकार ने कई बार जागरूकता अभियान चलाए हैं, क्योंकि हेलमेट न पहनने से दुर्घटना में गंभीर चोटें आने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हेलमेट न पहनने की वजह से हर साल कई लोग गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, जिनमें से कई की मौत भी हो जाती है। शिवहर जिले में इस नए आदेश के तहत प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सभी बाइक सवार हेलमेट पहनकर ही सड़कों पर निकलें।

जुर्माना और ड्राइविंग लाइसेंस रद्द

पहली बार हेलमेट न पहनने पर जुर्माना लगाया जाएगा, लेकिन दूसरी बार पकड़े जाने पर ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया गया है। यह कदम उन लोगों के लिए सख्त संदेश है जो हेलमेट की अनदेखी करते हैं और सड़क सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतते हैं। जिलाधिकारी विवेक रंजन मैत्रेय ने इस आदेश को लेकर कहा कि यह केवल जुर्माना या लाइसेंस रद्द करने की सजा नहीं है, बल्कि यह एक प्रयास है ताकि लोग सड़क सुरक्षा के प्रति सचेत हो और हर कोई हेलमेट पहनकर अपनी यात्रा पूरी करें।

सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन का कड़ा कदम

बिहार में सड़क सुरक्षा को लेकर प्रशासन का यह कड़ा कदम अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। राज्य सरकार और प्रशासन का यह प्रयास है कि सड़क हादसों में कमी लाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएं। हेलमेट पहनने के अलावा, प्रशासन अन्य सुरक्षा उपायों पर भी विचार कर रहा है, जैसे कि सड़कों की मरम्मत, ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन, और जागरूकता अभियान।

यूपी के स्कूलों में शिक्षकों के 1.20 लाख पद खाली

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगभग 1.20 लाख से अधिक शिक्षक पद खाली हैं। इन रिक्त पदों के बावजूद, भर्ती प्रक्रिया के शुरू होने की कोई ठोस संभावना दिखाई नहीं दे रही है। 

रिक्त पदों का आंकड़ा

विधानसभा के वर्तमान सत्र में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने इस मुद्दे पर जानकारी दी है कि प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कुल मिलाकर 1.20 लाख से अधिक पद खाली हैं। इन पदों में से अधिकतर पद सीधी भर्ती के लिए हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के कुल स्वीकृत 417,886 पदों में से 79,296 पद रिक्त हैं। इनमें 57,405 पद सीधी भर्ती के हैं, जबकि 21,891 पद पदोन्नति के हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 162,198 स्वीकृत पदों में से 41,338 पद रिक्त हैं, और ये सभी पद पदोन्नति के हैं।

शिक्षक-छात्र अनुपात

शिक्षा मंत्री का कहना है कि शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित है। उनका कहना है कि आरटीई (Right to Education) मानक के अनुसार, शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है यदि हम शिक्षामित्रों को जोड़ते हैं। प्राथमिक विद्यालयों में कुल 338,590 शिक्षक कार्यरत हैं और छात्र नामांकन 1,04,93,389 है। इस आधार पर, छात्र-शिक्षक अनुपात 301 है। वहीं, अगर 143,450 शिक्षामित्रों को भी इसमें जोड़ लिया जाए, तो यह अनुपात 221 हो जाता है, जो आरटीई मानक के अनुसार संतुलित माना जाता है।

शिक्षकों की भर्ती क्यों नहीं हो रही?

बेसिक शिक्षा मंत्री के अनुसार, फिलहाल शिक्षक-छात्र अनुपात मानक के अनुसार संतुलित है, लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल शिक्षक-छात्र अनुपात को ही ध्यान में रखा जा सकता है? शिक्षा के गुणवत्ता, कार्यभार और शिक्षक की उपलब्धता जैसे पहलुओं को भी गंभीरता से देखा जाना चाहिए। विशेष रूप से सीधी भर्ती के लिए रिक्त पदों की संख्या बड़ी है, जो विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति को प्रभावित कर सकती है।

यूपी में अनुदान पर सोलर पंप के लिए आवेदन शुरू

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने किसानों के लिए एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत किसानों को सोलर पंप स्थापित करने के लिए अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस पहल को "पीएम किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान" के तहत चलाया जा रहा है, जिसमें किसानों को सिंचाई के लिए सोलर पंप लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अनुदान देने वाली है।

योजना की विशेषताएँ

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार, इस योजना के तहत पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर 54,000 सोलर पंप वितरित किए जाएंगे। योजना का उद्देश्य उन किसानों को लाभ पहुंचाना है, जो सिंचाई के लिए डीजल या अन्य महंगे ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करते हैं। इस कदम से किसानों को न केवल आर्थिक रूप से मदद मिलेगी, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा।

आवेदन प्रक्रिया और नियम

किसान इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (www.agriculture.up.gov.in) पर जा सकते हैं। आवेदन के दौरान किसानों को 5,000 रुपये की टोकन राशि जमा करनी होगी। आवेदन के बाद, उन्हें 14 दिनों के भीतर बाकी की राशि जमा करनी होगी, अन्यथा उनका आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा और टोकन राशि जब्त कर ली जाएगी।

सोलर पंप के लिए बोरिंग की आवश्यकता

सोलर पंप लगाने के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि किसानों के पास उचित बोरिंग हो। योजना में निर्धारित किया गया है कि 2 एचपी पंप के लिए 4 इंच, 3 और 5 एचपी पंप के लिए 6 इंच, और 7.5 एचपी और 10 एचपी पंप के लिए 8 इंच की बोरिंग होनी चाहिए। यदि किसान के पास पहले से बोरिंग नहीं है, तो उन्हें इसे खुद करवाना होगा। सत्यापन के दौरान बोरिंग का अभाव होने पर टोकन राशि जब्त कर दी जाएगी और आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा।

कितना मिलेगा अनुदान और वित्तीय सहायता

इस योजना के तहत किसानों को सोलर पंप की स्थापना के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। उदाहरण के लिए, यदि 2 एचपी का सोलर पंप लगाया जाता है, तो इसकी कुल लागत 2.49 लाख रुपये होगी, जिसमें से किसान को 1.70 लाख रुपये का अनुदान मिलेगा। इस अनुदान में सोलर पंप के लिए 1.03 लाख रुपये और टाली के लिए 67,500 रुपये शामिल हैं। किसान को अपने हिस्से के 79,186 रुपये का बैंक ड्राफ्ट विभाग में जमा करना होगा। इसको लेकर निर्देश दिए गए हैं।

बिहार में जमीन मालिक 31 मार्च तक कर लें ये काम

पटना: बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के सभी रैयतों (भूस्वामियों) के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। यह सूचना उन लोगों के लिए है जिन्होंने अभी तक अपना भू-राजस्व, जिसे भूमि कर या लगान भी कहा जाता है, जमा नहीं किया है। विभाग ने सभी रैयतों को सूचित किया है कि 31 मार्च तक अपनी भूमि का लगान जमा कर दें। अगर निर्धारित तिथि तक भू-राजस्व का भुगतान नहीं किया जाता है, तो उनकी जमीन को नीलाम करने की कार्रवाई हो सकती है।

नीलामी की कार्रवाई का खतरा

राजस्व विभाग की ओर से जारी सूचना में कहा गया है कि यदि तय समय तक भूमि कर का भुगतान नहीं किया जाता है, तो लोक मांग वसूली अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति समय पर भूमि कर का भुगतान नहीं करता है, तो उसके खिलाफ नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। विभाग के अनुसार, बकाया लगान के लिए संबंधित भूमि मालिकों के खिलाफ नीलामी पत्र वाद दायर किया जा सकता है और बाद में उनकी जमीन की नीलामी भी हो सकती है।

ऑनलाइन भुगतान की सुविधा

राज्य सरकार ने रैयतों के लिए भू-राजस्व जमा करने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए इसे पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। अब भूमि मालिक घर बैठे अपने भू-राजस्व का भुगतान कर सकते हैं। रैयत अपना भू-लगान ऑनलाइन माध्यमों से वेबसाइट पर जाकर जमा कर सकते हैं। यह वेबसाइट https://bhulagan.bihar.gov.in या https://biharbhumi.bihar.gov.in पर उपलब्ध हैं। इसके अलावा, वसुधा केंद्र के माध्यम से भी भूमि कर का भुगतान किया जा सकता है।

समय पर भुगतान की अपील

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह भी कहा है कि भूमि लगान का भुगतान समय पर करना सभी किसानों और भूस्वामियों की जिम्मेदारी है। विभाग ने अपील की है कि सभी रैयत समय पर अपना भू-लगान जमा करें, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके और उनकी भूमि नीलाम होने से बची रहे।

यूपी PCS भर्ती में वैकेंसी बढ़कर 947, उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) द्वारा यूपी पीसीएस 2024 भर्ती में वैकेंसी की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। जहां पहले 220 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 947 हो गई है। इस बदलाव का मुख्य कारण यूपी पीसीएस 2024 की प्रारंभिक परीक्षा में हुई देरी है, जिसके कारण पदों की संख्या चार गुना से भी अधिक बढ़ी है।

परीक्षा में देरी और वैकेंसी में वृद्धि

आयोग ने 1 जनवरी 2024 को पीसीएस 2024 के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे थे, जब परीक्षा का आयोजन पहले ही स्थगित किया जा चुका था। पहले यह माना जा रहा था कि भर्ती में 220 पदों पर भर्ती की जाएगी, लेकिन शुक्रवार को घोषित परिणाम में यह संख्या बढ़कर 947 हो गई। इसके साथ ही, 15066 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा में शामिल होंगे।

यह बदलाव एक लंबी प्रक्रिया का हिस्सा रहा है, जिसमें छात्रों के कई आंदोलनों और परीक्षाओं में देरी का अहम योगदान है। 22 दिसंबर 2023 को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में कुल 576154 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 241359 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। परीक्षा में देरी और बदलाव के बाद भी, यह भर्ती प्रक्रिया कई मोड़ पर पहुंच चुकी है।

बढ़ी हुई वैकेंसी और उम्मीदवारों के लिए अवसर

अब जबकि यूपी पीसीएस 2024 में पदों की संख्या बढ़ाकर 947 कर दी गई है, यह उम्मीदवारों के लिए एक सुनहरा अवसर है। इससे न केवल परीक्षा में अधिक अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा, बल्कि चयन प्रक्रिया में भी पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। यह भर्ती, जो पहले 220 पदों के लिए आयोजित की जा रही थी, अब इस विशाल संख्या के साथ युवाओं के लिए सरकारी नौकरी पाने का एक बेहतरीन अवसर बन गई है।

यूपी के गांव-गांव में होगा ये काम, सरकार ने शुरू की योजना!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सरकार ने प्रदेश के गांवों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 28 हजार गांवों को अब बस सेवा से जोड़ा जाएगा, जिसके लिए 1540 नए रूट निर्धारित किए गए हैं। इस कदम से ग्रामीण इलाकों में परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ लोगों की आवाजाही में भी आसानी होगी।

योजना का उद्देश्य और लाभ:

यह पहल खासतौर पर उन गांवों के लिए फायदेमंद होगी, जो अब तक सार्वजनिक परिवहन से अछूते थे। गांवों को जोड़ने के लिए 1540 नए रूटों की शुरुआत की गई है, जिससे ग्रामीणों को शहरों तक पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा। योजना के तहत प्रयागराज महाकुंभ के लिए खरीदी गई 3,000 नई बसें इन नए रूटों पर संचालित की जाएंगी, जो महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत साबित होंगी। इससे न केवल महाकुंभ में आने-जाने वाली सुविधाएं बेहतर होंगी, बल्कि आम नागरिकों को भी एक अच्छा विकल्प मिलेगा।

मुख्यमंत्री ग्राम जोड़ो योजना:

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने विधानसभा में यह स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत जितने भी गांव इस समय बस सेवा से नहीं जुड़े हैं, उन्हें जल्द ही जोड़ दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ग्राम जोड़ो योजना के तहत, सरकार का लक्ष्य हर गांव तक बस सेवा पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों को शहरों तक आसानी से और किफायती तरीके से पहुंचने का अवसर मिले। इससे ग्रामीण इलाकों में विकास की नई दिशा मिलेगी और लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा।

बसों की संख्या में वृद्धि:

अब तक सरकार ने 6,638 नई बसें खरीदी हैं, जिनमें से 3,000 बसों को विशेष रूप से महाकुंभ के लिए खरीदा गया है। इन बसों के आने से न केवल ग्रामीण इलाकों में यातायात की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि सड़कों की स्थिति भी बेहतर होगी। बस सेवा से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय लोगों को फायदा होगा।

यूपी के स्कूलों में 24 मार्च से होगी वार्षिक परीक्षाएं

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के स्कूलों में 24 मार्च से शुरू होने वाली वार्षिक परीक्षाओं का हर किसी को इंतजार है, क्योंकि इस बार परीक्षाओं से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए न केवल सुविधाजनक होंगे बल्कि पारदर्शिता को भी बढ़ावा देंगे। प्रदेश के 1.33 लाख परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे लगभग 1.48 करोड़ विद्यार्थी इन परीक्षाओं में शामिल होंगे, और परीक्षा परिणाम 29 मार्च को ऑनलाइन घोषित किया जाएगा।

परीक्षाओं का आयोजन और व्यवस्था

इस साल, परिषदीय स्कूलों में दो पालियों में परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। पहली पाली सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक होगी, जबकि दूसरी पाली दोपहर 12:30 बजे से 2:30 बजे तक होगी। खास बात यह है कि कक्षा 1 के विद्यार्थियों की परीक्षा मौखिक होगी, जबकि कक्षा 2 से लेकर कक्षा 5 तक के विद्यार्थियों की दोनों (मौखिक और लिखित) परीक्षाएं ली जाएंगी। वहीं, कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों की परीक्षाएं केवल लिखित ही होंगी। इस व्यवस्था से विद्यार्थियों को एक सुनिश्चित और व्यवस्थित तरीके से परीक्षा देने का अवसर मिलेगा।

उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन का नया तरीका

परीक्षाओं के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी बदलाव किए गए हैं। कक्षा 5 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन न्याय पंचायत स्तर पर किया जाएगा, जबकि कक्षा 8 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन विकास खंड स्तर पर होगा। अन्य कक्षाओं की कॉपियों का मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर ही किया जाएगा। इस तरह से मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी एक व्यवस्थित और स्पष्ट रूप दिया गया है, जिससे कोई भी गड़बड़ी या त्रुटि होने की संभावना कम होगी।

प्रेरणा पोर्टल पर रिजल्ट अपलोड करना

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद, प्रत्येक विद्यालय कक्षावार छात्रों के वार्षिक परीक्षा के अंक प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड करेगा। इसके बाद, उस डेटा का प्रिंट आउट निकाला जाएगा और 29 मार्च को अभिभावकों को विद्यालय में परिणाम प्रदान किए जाएंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी विद्यार्थियों को उनका रिजल्ट बिना किसी समस्या के समय पर मिल जाएगा और इसे पूरी पारदर्शिता से जारी किया जाएगा।

हाई BP और ब्लड ग्रुप: कौन सा ग्रुप है सबसे ज्यादा प्रभावित?

हेल्थ डेस्क: हाई ब्लड प्रेशर (हाई BP), जिसे सामान्यतः हाइपरटेंशन कहा जाता है, एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जो आजकल बहुत आम हो गई है। यह रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे दिल और अन्य अंगों को नुकसान हो सकता है। हाई BP के खतरे से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू ब्लड ग्रुप से जुड़ा है। हाल के अध्ययनों ने यह संकेत दिया है कि आपके ब्लड ग्रुप का भी हाई BP के जोखिम से गहरा संबंध हो सकता है।

ब्लड ग्रुप और हाई BP का संबंध

कुछ शोधों में यह पाया गया है कि B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में हाई BP का खतरा अधिक हो सकता है। हालांकि, यह अभी भी एक विश्लेषणात्मक विषय है, और सभी अध्ययनों में इसे एक जैसे परिणाम नहीं मिले हैं। फिर भी, कुछ प्रमाण यह बताते हैं कि B ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों में रक्तचाप की समस्या का सामना करने की संभावना ज्यादा हो सकती है।

दूसरी ओर, AB ब्लड ग्रुप वाले व्यक्तियों को हाई BP का खतरा कम होने के संकेत मिले हैं। यह शोध अभी शुरुआती चरण में है और इस पर अधिक अध्ययन की आवश्यकता है। हालांकि, कुछ आंकड़े बताते हैं कि AB ग्रुप वाले लोग सामान्यत: रक्तचाप से संबंधित समस्याओं का सामना कम करते हैं।

ब्लड ग्रुप और हार्ट डिज़ीज़ के बीच संबंध

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, A और B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में थ्रोम्बोलिक (रक्त के थक्के बनने की स्थिति) और कार्डियोवस्कुलर (हृदय और रक्त वाहिकाओं से संबंधित) बीमारियों का खतरा अधिक होता है।

इस अध्ययन के अनुसार, A ब्लड ग्रुप वालों में हाइपरलिपिडिमिया (रक्त में वसा की अधिकता), एथेरोस्क्लेरोसिस (रक्त वाहिकाओं में सख्ती) और हार्ट फेलियर का खतरा अधिक होता है। वहीं, B ब्लड ग्रुप वालों को मायोकार्डियल इंफार्क्शन (दिल का दौरा) जैसी गंभीर स्थितियों का खतरा अधिक हो सकता है।

वहीं, O ब्लड ग्रुप वाले लोग अक्सर इन जोखिमों से कुछ हद तक मुक्त होते हैं। O ग्रुप के लोगों में दिल की बीमारियों और हाई BP का खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया है। यह तथ्यों से पता चलता है कि O ब्लड ग्रुप वाले लोग अन्य ब्लड ग्रुप के मुकाबले अधिक स्वस्थ रहते हैं, खासकर जब बात दिल और रक्तचाप की हो।

मीडिया के सामने ट्रम्प-जेलेंस्की में तीखी बहस, पढ़ें

न्यूज डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच शुक्रवार देर रात व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई, जिसमें एक तीखी बहस का माहौल बन गया। इस मुलाकात के दौरान ट्रम्प, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जेलेंस्की के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई, खासकर यूक्रेन के युद्ध, शांति की संभावनाओं और अमेरिकी सहायता को लेकर।

शांति की डील पर मतभेद

जेलेंस्की ने कहा कि शांति की डील में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि वह युद्धविराम को तोड़ चुके हैं और 2022 में बड़ा हमला किया था। इसके जवाब में, ट्रम्प ने कहा कि जंग को जल्द खत्म करना चाहिए, लेकिन उनका मुख्य ध्यान अमेरिका के हितों पर था, न कि रूस या यूक्रेन के साथ किसी तरह के समझौते पर।

रूस और यूक्रेन के बीच का संघर्ष

जेलेंस्की ने 2014 में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में बातचीत का उल्लेख किया, जिसमें कई बार युद्धविराम की कोशिशें हुई थीं, लेकिन पुतिन ने उनका उल्लंघन किया और 2022 में यूक्रेन पर फिर से हमला किया। जेलेंस्की ने यह बताया कि यूक्रेन अकेला है और युद्ध के दौरान उसे बाहरी समर्थन की बहुत जरूरत थी।

उप राष्ट्रपति जेडी वेंस का हस्तक्षेप

वेंस ने ट्रम्प और जेलेंस्की की बातचीत के बीच में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि केवल डिप्लोमेसी से ही इस संघर्ष का समाधान हो सकता है। उन्होंने जेलेंस्की को यह आरोप लगाया कि वह अमेरिका के समर्थन के लिए आभार व्यक्त नहीं कर रहे हैं, जबकि ट्रम्प ने यूक्रेन को सैन्य सहायता दी है। जेलेंस्की ने इसका जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने कई बार धन्यवाद कहा है और उन्होंने ट्रम्प के देश की मदद का सम्मान किया।

ट्रम्प की आलोचना और जेलेंस्की का जवाब

ट्रम्प ने जेलेंस्की को यह कहते हुए आलोचना की कि वह "थर्ड वर्ल्ड वॉर की संभावना से जुआ खेल रहे हैं" और "लाखों लोगों की जिंदगी से खेल रहे हैं"। इसके जवाब में, जेलेंस्की ने कहा कि वह गंभीर हैं और अपनी सेना के बल पर जंग लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यूक्रेन की स्थिति को समझना चाहिए, क्योंकि युद्ध का असर भविष्य में अमेरिका पर भी पड़ेगा।

ट्रम्प की अपत्ति और सैन्य समर्थन की बात

ट्रम्प ने यह आरोप लगाया कि अगर अमेरिका ने यूक्रेन को 350 बिलियन डॉलर और सैन्य सहायता नहीं दी होती, तो यह युद्ध पहले ही खत्म हो चुका होता। जेलेंस्की ने इस पर कहा कि पुतिन ने तीन दिन में युद्ध खत्म करने की बात कही थी, लेकिन अब यह बहुत लंबा खिंच गया है। ट्रम्प ने कहा कि अगर अमेरिका चाहता तो युद्धविराम की स्थिति जल्दी बन सकती थी।

दोनों तरफ से विरोधाभासी बयान

जेलेंस्की ने ट्रम्प की आलोचना की कि वह यूक्रेन में हो रही तबाही के बारे में केवल मीडिया में बातें कर रहे हैं, जबकि वेंस ने कहा कि जेलेंस्की को अमेरिका के प्रति अधिक आभार व्यक्त करना चाहिए। जेलेंस्की ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वह युद्धविराम चाहते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस गारंटी की आवश्यकता है। ट्रम्प ने इस पर सहमति जताई, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर युद्धविराम हो सकता है, तो यह अमेरिका के हित में होगा।

ट्रम्प का बयान - "आप शांति के लिए तैयार नहीं हैं"

ट्रम्प ने यह टिप्पणी की कि जेलेंस्की शांति के लिए तैयार नहीं हैं और अगर उन्हें शांति चाहिए, तो उन्हें अमेरिका से बातचीत करनी होगी। ट्रम्प ने यह कहा कि जेलेंस्की को शांति के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए, क्योंकि वे अमेरिका की मदद से ही यूक्रेन की स्थिति को बेहतर बना सकते हैं।

जेलेंस्की की प्रतिक्रिया और आभार

इस तीखी बहस के बावजूद, जेलेंस्की ने अमेरिका का आभार व्यक्त किया और कहा कि यूक्रेन को स्थायी और न्यायसंगत शांति की आवश्यकता है, और इसके लिए वे काम कर रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति, कांग्रेस, और जनता को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद कहा और चले गए। ऐसा इतिहास में पहली बार हुआ की कोई दूसरे देश के राष्ट्रपति अमेरिकी राष्ट्रपति से इसतरह की तीखी बातें की हो।

यूपी में 5 लाख कर्मियों का 1 अप्रैल से बढ़ेगा मानदेय

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के करीब 5 लाख आउटसोर्स कर्मियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2025 से इन कर्मियों का न्यूनतम मानदेय 18,000 रुपये होगा। इस फैसले से प्रदेश भर के आउटसोर्स कर्मियों में खुशी की लहर दौड़ गई है, और उनके चेहरे पर एक नई उम्मीद की चमक दिख रही है।

एक साल का संघर्ष और उसकी सफलता

आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद पिछले एक वर्ष से लगातार प्रयास कर रही थी। परिषद के प्रयासों और मुख्यमंत्री से हुई मुलाकातों का ही परिणाम है कि अब इन कर्मियों का मानदेय बढ़कर 18,000 रुपये किया गया है। परिषद के अध्यक्ष जेएन तिवारी ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से दो बार मुलाकात की गई थी और उनके द्वारा किया गया यह निर्णय, इस लंबे संघर्ष का परिणाम है।

मुख्यमंत्री का निर्णय, कर्मियों के चेहरे पर मुस्कान

इस घोषणा के बाद, आउटसोर्स कर्मियों को मिलने वाली राशि में एक महत्वपूर्ण वृद्धि होगी, जिससे उनके जीवनस्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इससे न केवल कर्मियों की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी, बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कदम इस बात का प्रतीक है कि राज्य सरकार श्रमिकों और कर्मियों के हितों के प्रति गंभीर है और उनकी समस्याओं को समझते हुए निर्णय ले रही है।

सरकार के इस फैसले से 5 लाख कर्मियों का भविष्य उज्जवल

प्रदेश के लगभग 5 लाख आउटसोर्स कर्मियों के लिए इस फैसले से नए अवसर खुलेंगे। इन कर्मियों में से अधिकांश वे हैं, जिन्होंने अपनी सेवाएं सरकारी विभागों में प्रदान की हैं, लेकिन वे अनुबंध पर काम करते हुए लंबे समय से मानदेय और सुविधाओं में असंतोष महसूस कर रहे थे। अब इस वृद्धि के साथ, न केवल उनके वित्तीय स्थिति में सुधार होगा, बल्कि यह उन्हें बेहतर काम करने के लिए प्रेरित भी करेगा।

बिहार में लाइब्रेरियन, ऑफिसर के 23 पदों पर भर्ती

न्यूज डेस्क: बिहार में लाइब्रेरियन, ऑफिसर के 23 पदों पर भर्ती निकली हैं। इसके लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना (AIIMS Patna) द्वारा नोटिश जारी किया गया हैं। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार प्रकाशित नोटिफिकेशन को अच्छी तरह से पढ़ें और आवेदन करें।

पद का नाम : Chief Librarian, Chief Medical Social Service Officer, Chief Medical Record Officer.

पदों की संख्या : कुल 23 पद। 

योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता पदों के अनुसार डिप्लोमा, डिग्री, पीजी, आदि निर्धारित किया गया हैं। 

आयु सीमा : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित किया गया हैं। अधिक जानकारी के लिए नोटिश देखें। 

चयन प्रक्रिया : भर्ती नोटिफिकेशन के अनुसार इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन इंटरव्यू के द्वारा होगा। अधिक जानकारी के लिए नोटिश देखें। 

आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान पटना (AIIMS Patna) की वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। 

आधिकारिक वेबसाइट : https://api.aiimspatna.edu.in/

चयनित उम्मीदवारों का वेतन : 29200-215900/- Per Month

आवेदन की अंतिम तिथि : 30 मार्च 2025

टेंगरा मछली के 7 सुपर हेल्दी फायदे, जो बदल सकते हैं आपकी सेहत!

हेल्थ डेस्क: टेंगरा मछली एक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक आहार है, जो न केवल आपके भोजन का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि शरीर के लिए कई महत्वपूर्ण लाभ भी प्रदान करती है। इस मछली को भारतीय उपमहाद्वीप में काफी पसंद किया जाता है और यह न केवल अपने स्वाद के लिए, बल्कि इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जानी जाती है।

1. प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत

टेंगरा मछली एक उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है, जो मांसपेशियों के निर्माण, मरम्मत और शरीर के समग्र विकास में सहायक होता है। प्रोटीन शरीर के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक होता है, जैसे कि एंजाइम्स का निर्माण और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना। एक मछली के सेवन से आपके शरीर को पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिलता है, जो आपके फिटनेस गोल्स को हासिल करने में मदद करता है।

2. ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर

टेंगरा मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का एक समृद्ध स्रोत है, जो दिल और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं, रक्त के थक्के को घटाते हैं, और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मददगार होते हैं। इसके अलावा, यह मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार करता है, जैसे कि अवसाद और चिंता की समस्या में कमी लाना।

3. वजन घटाने में भी मददगार

टेंगरा मछली कम कैलोरी और उच्च प्रोटीन सामग्री के कारण वजन घटाने के लिए एक आदर्श आहार विकल्प है। इसका सेवन करने से आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे अत्यधिक खाने की प्रवृत्ति कम होती है। साथ ही, इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स और अन्य पोषक तत्व मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देते हैं, जिससे कैलोरी जलने में मदद मिलती है।

4. त्वचा के लिए फायदेमंद

टेंगरा मछली में मौजूद ओमेगा-3 और एंटीऑक्सिडेंट्स त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह त्वचा को नमी प्रदान करता है और उसे हेल्दी और ग्लोइंग बनाता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स त्वचा की सूजन को कम करते हैं और झुर्रियों की शुरुआत को धीमा करते हैं। इसके अलावा, यह मुंहासों और अन्य त्वचा संबंधी समस्याओं को भी कम करने में मदद करता है।

5. हड्डियों को मजबूत बनाना

टेंगरा मछली में कैल्शियम, फास्फोरस और विटामिन D जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें स्वस्थ रखते हैं। यह विशेष रूप से बढ़ती उम्र में हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है, क्योंकि यह हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में मदद करती है और ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों की कमजोरी) के खतरे को कम करती है।

6. इम्यूनिटी को बढ़ावा देना

टेंगरा मछली में पर्याप्त मात्रा में विटामिन A और D होता है, जो शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं। इन विटामिन्स के कारण शरीर रोगों से लड़ने की बेहतर क्षमता प्राप्त करता है। साथ ही, इसमें मौजूद जिंक और सेलेनियम जैसे मिनरल्स भी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधारने में सहायक होते हैं।

7. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

टेंगरा मछली में अच्छे पाचन के लिए आवश्यक आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। इसके अलावा, यह मछली आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की वृद्धि को प्रोत्साहित करती है, जिससे पाचन प्रणाली स्वस्थ रहती है। इसके नियमित सेवन से पेट संबंधी समस्याओं जैसे गैस, कब्ज और सूजन से राहत मिल सकती है।

बिहार के इस जिले में गैस का भंडार! खुदाई शुरू

आरा: बिहार के शाहपुर क्षेत्र में एक बड़ी और महत्वपूर्ण खोज हो सकती है, जो न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। गंगानदी के तटवर्ती इलाके में, जो पहले गंगा नदी का बहाव क्षेत्र हुआ करता था, अब प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की खपत के लिए खुदाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उपग्रहीय डेटा के विश्लेषण और शुरुआती जांच में इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों का महत्वपूर्ण भंडार मिलने की संभावना जताई जा रही है।

खुदाई की शुरुआत: 

भारत सरकार ने शाहपुर के इस क्षेत्र में खुदाई की प्रक्रिया को शुरू किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्या यहां वास्तव में प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम के बड़े भंडार हैं। यह खुदाई गंगानदी के तटवर्ती इलाके में हो रही है, जो अब गंगा नदी से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उपग्रहीय डेटा के आधार पर, यह क्षेत्र प्राकृतिक गैस और तेल के भंडार से भरपूर हो सकता है।

पार्श्वभूमि और प्रक्रिया: 

तीन साल पहले, इस क्षेत्र में सतही खुदाई की गई थी, और मिट्टी के नमूनों को एकत्र किया गया था। इन नमूनों को तेल और गैस के कुएं की खुदाई करने वाली कंपनी अल्फा जियो के प्रयोगशाला में भेजा गया। प्रयोगशाला की जांच में यह पुष्टि हुई कि इस क्षेत्र में प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों के भंडार होने की संभावना बहुत ज्यादा है। इसके बाद, भारत सरकार ने इस क्षेत्र में खुदाई की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया।

उपग्रहीय डेटा और विश्लेषण: 

उपग्रहीय डेटा विश्लेषण ने इस क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों के संकेत दिए थे, जिससे पता चला कि शाहपुर का यह इलाका भूगर्भीय दृष्टि से समृद्ध हो सकता है। उपग्रहीय तकनीकों के माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह भी माना जा रहा है कि यहां तेल और गैस के बड़े भंडार हो सकते हैं। इस डेटा को ध्यान में रखते हुए, सरकार और विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र में खुदाई की योजना बनाई है।

सम्भावनाएँ और भविष्य: 

यदि इस खुदाई से पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के भंडार का पता चलता है, तो इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन आ सकता है। भारत में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है, और ऐसे समय में बिहार जैसे राज्य में प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा में भी योगदान मिलेगा। यह राज्य के लिए एक सुनहरा अवसर हो सकता है, जहां नई ऊर्जा कंपनियों की स्थापना, तकनीकी नवाचार, और नवाचार के द्वारा रोजगार के अवसर उत्पन्न हो सकते हैं।

बिहार में ऑनलाइन दर्ज करें जमीन की शिकायतें: सरकार की नई पहल!

पटना: बिहार में जमीन से संबंधित समस्याओं और विवादों को हल करने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब नागरिकों को भूमि संबंधी मामलों के लिए राजस्व न्यायालयों में जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बिहार सरकार ने इन न्यायालयों को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए RCMS पोर्टल (राजस्व न्यायालय प्रबंधन प्रणाली) विकसित किया गया है, जो लोगों को उनके जमीन संबंधी मामलों को ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा देता है।

इस पोर्टल के माध्यम से लोग अपने भूमि विवादों और शिकायतों को घर बैठे दर्ज कर सकते हैं, और उन्हें बिना किसी परेशानी के समाधान प्राप्त हो सकता है। इस लेख में हम यह जानेंगे कि RCMS पोर्टल पर विभिन्न प्रकार के मामलों की शिकायतें कहां दर्ज की जा सकती हैं, और इस प्रक्रिया के दौरान किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

1. सीओ कोर्ट (CO Court)

सीओ कोर्ट, यानी सर्किल ऑफिसर कोर्ट, का मुख्य कार्य सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण से संबंधित मामलों को निपटाना है। यदि किसी ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर लिया है, तो उसकी सूचना सीओ कोर्ट में दी जा सकती है। अतिक्रमण की सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाता है, ताकि शिकायत करने वालों को किसी प्रकार का डर न हो।

2. डीसीएलआर कोर्ट (DCLR Court)

डीसीएलआर कोर्ट, यानी डिप्टी कलेक्टर लैंड रेफरल कोर्ट, का कार्य विभिन्न भूमि विवादों को हल करना है। इस कोर्ट में निम्नलिखित प्रकार के मामलों की शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं: दखल खारिज-खारिज अपील (जिसमें जमीन के स्वामित्व का विवाद होता है), भूमि विवाद समाधान अधिनियम (BLDR), भूदान अधिनियम (जिसमें भूदान भूमि का बटवारा होता है), निश्चित राजस्व, बकास्त भूमि का रैयतीकरण और बटाईदारी (जिसमें खेतों के मालिकाना हक का निर्धारण होता है)

3. एडीएम कोर्ट (ADM Court)

एडीएम कोर्ट, यानी असिस्टेंट डिवीजनल मजिस्ट्रेट कोर्ट, का कार्य भूमि विवादों और प्रशासनिक मामलों को हल करना है। इस कोर्ट में निम्नलिखित मामले दर्ज किए जा सकते हैं: दखल खारिज संशोधन (जो पहले से दर्ज मामलों में संशोधन से संबंधित होते हैं), जमाबंदी खारिज, भूदान अधिनियम, सीलिंग अधिनियम (भूमि सीमा तय करने के लिए), बंदोबस्ती अपील (भूमि के पुनः बंटवारे से संबंधित अपील), निश्चित राजस्व अपील। 

4. डीएम कोर्ट (DM Court)

डीएम कोर्ट, यानी डिवीजनल मजिस्ट्रेट कोर्ट, में आमतौर पर बड़े भूमि विवादों और भूमि कानूनों से संबंधित मामलों की सुनवाई होती है। इस कोर्ट में निम्नलिखित प्रकार के मामले दर्ज किए जा सकते हैं: जमाबंदी खारिज अपील, भूमि सीलिंग अपील, भूदान अपील, सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण अपील, बासगीत पर्चा अपील (जमीन के मालिकाना हक से संबंधित मामले)

5. कमिश्नर कोर्ट (Commissioner Court)

कमिश्नर कोर्ट, यानी जिला आयुक्त कोर्ट, में राज्य स्तर के भूमि विवादों की सुनवाई की जाती है। इसमें जमाबंदी निरस्तीकरण संशोधन और भूमि विवाद समाधान अधिनियम (BLDR) अपील जैसे मामले दर्ज किए जाते हैं।

6. एलए प्राधिकरण (LA Authority)

एलए प्राधिकरण, यानी भूमि अधिग्रहण प्राधिकरण, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन से संबंधित मामलों को निपटाता है। यदि किसी व्यक्ति की भूमि का अधिग्रहण किया गया है और वह उचित मुआवजा या पुनर्वास की मांग करता है, तो वह भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 के तहत अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है। इस प्राधिकरण के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि मुआवजा और पारदर्शिता के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया:

वेबसाइट पर जाएं: सबसे पहले आपको बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट https://biharbhumi.bihar.gov.in/Biharbhumi/UserLogin पर जाना होगा।

बिहार में पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द, आदेश जारी

पटना: बिहार में होली का त्योहार एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव है, जिसे पूरे राज्य में धूमधाम से मनाया जाता है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक होली का पर्व शांति और सुरक्षा के माहौल में मनाया जा सके। इसी उद्देश्य से बिहार पुलिस मुख्यालय ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्य के सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं।

छुट्टियों का रद्द होना: क्या है कारण?

बिहार पुलिस मुख्यालय ने 10 से 18 मार्च तक राज्य के सभी पुलिसकर्मियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया है। यह कदम होली के दौरान राज्य में विधि व्यवस्था बनाए रखने और शांति की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। 14 और 15 मार्च को होली का पर्व है, और पुलिस मुख्यालय के आदेशानुसार, इस दौरान किसी भी प्रकार की छुट्टी नहीं दी जाएगी, सिवाय उन विशेष परिस्थितियों के जिनमें छुट्टी देने की आवश्यकता महसूस की जाती है।

अपर पुलिस मुख्यालय लॉ एंड ऑर्डर, संजय कुमार सिंह ने इस आदेश को लागू किया है, और यह आदेश सभी पुलिस विभागों के उच्चाधिकारियों, जैसे कि बी-सैप के महानिदेशक, सीआईडी, विशेष शाखा, आर्थिक अपराध इकाई, रेलवे पुलिस और प्रक्षेत्रों के पुलिस महानिरीक्षकों तक पहुंचाया गया है।

असामाजिक तत्वों से निपटने की तैयारी

पिछले कुछ वर्षों में होली के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने शांति भंग करने की कोशिश की है, जिससे पुलिस प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी है। इन असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए पुलिस विभाग ने विशेष रणनीति बनाई है। पुलिसकर्मियों को पूरी तरह से तैयार रहने की हिदायत दी गई है ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

बिहार में होली के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर भीड़-भाड़ होती है, और इस अवसर पर शराब पीने, बुरा व्यवहार करने और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की घटनाएँ सामने आती हैं। इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त निगरानी रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बिहार पुलिस का रुख: शांति बनाए रखना

पुलिस विभाग का मुख्य उद्देश्य है कि होली का पर्व न केवल आनंदमय हो, बल्कि राज्य में शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखा जाए। पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से निपटने के लिए सभी पुलिसकर्मियों को पूरी तरह से सक्रिय और तत्पर रहना होगा।

इसके अलावा, इस बार विशेष पैट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है, और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस अधिकारियों को चौकस रहने की सलाह दी गई है, ताकि किसी भी असामाजिक गतिविधि का त्वरित जवाब दिया जा सके।

यूपी के 20 जिलों में बारिश और तेज हवा का अलर्ट

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। प्रदेश में एक बार फिर से बारिश और तेज हवा का अलर्ट जारी किया गया है, जिससे लोग आश्चर्यचकित हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में आज भी बादल गरजने और बिजली चमकने की संभावना बनी हुई है। इसके साथ ही, तेज हवा चलने के कारण लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

तेज हवा और बारिश का अलर्ट:

मौसम विभाग के मुताबिक, यूपी के आगरा, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद सहित लगभग 20 जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अलर्ट जारी किया गया है। इसके साथ ही इन जिलों में बादल गरजने और बारिश की संभावना बनी हुई है।

इन जिलों में ओलावृष्टि का भी खतरा:

मौसम विभाग ने सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड, बिजनौर, अमरोहा, रामपुर, मुरादाबाद और इसके आसपास के इलाकों में ओलावृष्टि होने की संभावना जताई है। ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है, जो किसानों के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। इसके अलावा, इन इलाकों में बारिश की संभावना भी बनी हुई है।

बिजली चमकने और बादल गरजने का भी अनुमान:

प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बादल गरजने और बिजली चमकने के भी आसार हैं। खासतौर पर महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई, फर्रुखाबाद और आसपास के इलाकों में बादल गरजने और बिजली गिरने की संभावना है। वहीं, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड, गौतमबुद्ध नगर, बुलन्दशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा और फिरोजाबाद जिलों में भी बादल गरजने और बिजली चमकने का अनुमान है।

मौसम की वजह से सतर्कता बरतने की आवश्यकता:

इस बदले हुए मौसम के कारण लोग अलर्ट रहें और उचित सावधानियां बरतें। विशेष रूप से तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को अपने खलिहान और खेतों की रक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। वहीं, तेज बारिश और बिजली के कारण लोग सुरक्षित स्थानों पर रहने की कोशिश करें। सड़क पर यात्रा करते समय भी सावधानी बरतें।

यूपी में जमीन की चकबंदी को लेकर 5 बड़े ऐलान!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में जमीन की चकबंदी के अभियान को लेकर सरकार ने हाल ही में कुछ बड़े ऐलान किए हैं। इन ऐलानों का उद्देश्य चकबंदी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाना है, ताकि किसानों को भूमि विवादों से राहत मिल सके और उनके खेतों का समुचित उपयोग हो सके। आइए जानते हैं यूपी में इस अभियान के 5 प्रमुख ऐलान:

1 .सहमति प्राप्त गांवों का चयन

चकबंदी अभियान में उन्हीं गांवों को शामिल किया गया है, जहां 50 फीसदी से ज्यादा किसानों ने चकबंदी के लिए सहमति दी है। इस निर्णय से यह सुनिश्चित किया गया है कि जहां किसान इस प्रक्रिया के लिए तैयार हैं, वहीं प्राथमिकता दी जाए। इससे चकबंदी प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी अधिक बढ़ेगी और उनका विश्वास भी मजबूत होगा।

2 .हर महीने होगी समीक्षा

प्रशासन ने चकबंदी अभियान की पूरी तैयारी करने का निर्णय लिया है। जिलों को हर महीने की 10 तारीख तक अपनी प्रगति रिपोर्ट चकबंदी आयुक्त को भेजनी होगी, जिससे मंडल और निदेशालय स्तर पर काम की समीक्षा की जा सके। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि चकबंदी अभियान में किसी भी तरह की रुकावट न आए और हर चरण समय पर पूरा हो।

3 .पारदर्शिता के लिए विशेष समीक्षा प्रारूप

किसानों के खेतों से जुड़ी समस्याओं को पारदर्शी तरीके से हल करने के लिए एक विशेष समीक्षा प्रारूप तैयार किया गया है। इसमें भूमि की जांच, भूचित्र का पुनरीक्षण, विवादों का निस्तारण और चकबंदी योजना की पुष्टि जैसे अहम बिंदु शामिल हैं। इससे किसानों को न्याय मिलता है और चकबंदी प्रक्रिया में कोई भेदभाव नहीं होता।

4 .चकबंदी अधिकारियों को मिल रही ट्रेनिंग

अभियान को सफलतापूर्वक चलाने के लिए चकबंदी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में अधिकारियों को चकबंदी प्रक्रिया के सभी पहलुओं पर जानकारी दी जाती है, ताकि वे अपने कार्य को प्रभावी और सही तरीके से संपन्न कर सकें। इससे अभियान के संचालन में कोई त्रुटि नहीं होगी और यह जल्दी पूरा होगा।

5 .बाराबंकी जिले में चकबंदी की प्रक्रिया 

बाराबंकी जिले में चकबंदी कार्य तेजी से चल रहा है। वर्तमान में 6 गांवों में चकबंदी की प्रक्रिया जारी है, जबकि 38 गांवों में इसे आगामी चरणों में शुरू किया जाएगा। डीएम शशांक त्रिपाठी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यह प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके।

यूपी के इन 5 शहरों में आवासीय योजना, मिलेगा घर!

न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश की आवासीय योजनाओं में एक नया कदम उठाया जा रहा है, जो प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए खुशखबरी है। केंद्र और प्रदेश सरकारों के बाद अब उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) ने भी आगामी वित्तीय वर्ष में कई नई योजनाओं की घोषणा करने की तैयारी की है। इनमें से प्रमुख योजना यूपी के 5 प्रमुख शहरों—प्रयागराज, मेरठ, गाजीपुर, प्रतापगढ़ और मऊ में आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत करना है।

7 मार्च को निदेशक मंडल की बैठक:

आवास एवं विकास परिषद द्वारा 7 मार्च को होने वाली निदेशक मंडल की बैठक में इन योजनाओं पर निर्णय लिया जाएगा। इस बैठक में परिषद के आय-व्यय का ब्योरा प्रस्तुत किया जाएगा और नए वित्तीय वर्ष में परिषद द्वारा किए जाने वाले खर्चों का भी आकलन किया जाएगा। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न शहरों में आवासीय योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जा सकती हैं।

सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों तक पहुंचे

सरकार ने जीरो पावर्टी अभियान के तहत उन परिवारों को प्राथमिकता देने की योजना बनाई है, जो आर्थिक रूप से सबसे कमजोर हैं। इस अभियान के तहत प्रदेश के लगभग 13.5 लाख परिवारों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से लगभग 11 लाख परिवारों के पास खुद का घर नहीं है। इन परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके, इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष दिशा-निर्देश दिए हैं।

भविष्य की योजनाएं: एक समृद्ध उत्तर प्रदेश की दिशा में

उत्तर प्रदेश में हो रही इस तरह की योजनाओं के कई सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। इन योजनाओं से प्रदेश में न केवल किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ेगी, बल्कि करोड़ों गरीब परिवारों को एक स्थिर और सुरक्षित जीवन जीने का अवसर मिलेगा। इसके अलावा, यह कदम रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेगा, क्योंकि निर्माण और विकास कार्यों में बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता होगी।

यूपी में जमीन की चकबंदी से होने वाले 8 बड़े फायदे

लखनऊ: भारत के कृषि प्रधान राज्य उत्तर प्रदेश में, कृषि से जुड़े मुद्दों का समाधान ढूंढना बेहद आवश्यक है। इनमें से एक अहम कदम है जमीन की चकबंदी। चकबंदी, खेतों को एकत्रित और व्यवस्थित करने की प्रक्रिया है, जिससे कृषि उत्पादन में सुधार होता है। यह प्रक्रिया किसानों के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकती है। आइए जानते हैं यूपी में जमीन की चकबंदी से होने वाले 8 बड़े फायदे।

1. खेत एक जगह पर एकत्रित होंगे

उत्तर प्रदेश में बहुत से किसान छोटे-छोटे भूखंडों में खेती करते हैं। ये छोटे भूखंड कई बार एक-दूसरे से काफी दूर होते हैं, जिससे खेती में परेशानी होती है। चकबंदी से इन बिखरे हुए खेतों को एक जगह पर एकत्रित किया जाता है, जिससे किसानों को खेतों की देखभाल और खेती करने में आसानी होती है।

2. आधुनिक खेती में मददगार

जब खेत एक जगह पर होते हैं, तो खेतों का आकार बड़ा हो जाता है। इससे कृषि तकनीकों और आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। किसान अपनी जमीन का बेहतर उपयोग कर सकते हैं और उच्चतम पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। यह प्रक्रिया कृषि में सुधार लाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर जब हम बात करते हैं हाईटेक खेती की।

3. खेत की देखभाल में सरलता

चकबंदी के बाद, खेतों का आकार और स्थान ठीक से निर्धारित हो जाता है, जिससे खेतों की देखभाल करना आसान हो जाता है। किसान खेतों की निगरानी और सिंचाई को प्रभावी रूप से कर सकते हैं। यह समग्र कृषि उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है, क्योंकि उचित देखभाल से पैदावार भी बढ़ती है।

4. सीमा विवाद और संघर्ष में कमी

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां कई बार खेतों के आकार और सीमाओं को लेकर विवाद होते हैं, चकबंदी इन समस्याओं को हल करती है। जब खेतों की सीमाएं स्पष्ट होती हैं, तो पड़ोसी किसानों के बीच सीमा विवाद कम हो जाता है और संघर्ष की स्थिति में भी कमी आती है। इससे खेती में सहकारिता बढ़ती है और कार्य में सहजता आती है।

5. कृषि दक्षता में होगी बड़ी वृद्धि

चकबंदी से खेतों के बीच की दूरी कम होती है, और छोटे-छोटे खेतों को एक साथ मिलाकर बड़े क्षेत्र में खेती की जा सकती है। इससे कृषि के संचालन में दक्षता बढ़ती है। कृषि कार्यों में समय की बचत होती है, और आधुनिक तरीकों का उपयोग करके उत्पादकता में सुधार किया जा सकता है।

6. बेहतर सिंचाई प्रबंधन की व्यवस्था 

यूपी में सिंचाई की व्यवस्था अक्सर चुनौतीपूर्ण होती है, लेकिन चकबंदी के बाद सिंचाई की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है। खेतों का सही आकार और स्थान होने से पानी का सही तरीके से वितरण किया जा सकता है, जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और फसल को पूरी तरह से पानी मिल पाता है।

7. चकबंदी से लागत प्रभावी खेती

जब खेतों का आकार बड़ा होता है और कार्य कम होते हैं, तो किसानों को उपकरण और श्रमिकों की जरूरत कम होती है। इससे उत्पादन की लागत में कमी आती है। इसके अलावा, चकबंदी के माध्यम से कृषि कार्यों की योजनाबद्धता बढ़ती है, जिससे किसानों के लिए खेती करना सस्ता और लाभकारी हो जाता है।

8. चकबंदी पर्यावरणीय के लिए फायदेमंद

चकबंदी का एक बड़ा लाभ यह है कि यह पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। जब खेतों की देखभाल सही तरीके से होती है, तो मृदा का क्षरण कम होता है, और जल की अधिकतम उपयोगिता होती है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा होती है, जो पर्यावरण के लिए अत्यंत लाभकारी है।

भारत की GDP ग्रोथ चीन और अमेरिका से अधिक!

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही में भारत की रियल जीडीपी वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो देश की आर्थिक प्रगति का एक महत्वपूर्ण संकेत है। इस बढ़ोतरी के साथ, भारत अब वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में अपनी महत्वपूर्ण स्थिति को और मजबूती से स्थापित कर रहा है। भारत की इस उल्लेखनीय सफलता के मुकाबले चीन और अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर अपेक्षाकृत कम है, जो आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है।

भारत की शानदार वृद्धि दर

भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत तक पहुंचना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। यह वृद्धि भारत की आर्थिक संरचना में हो रहे बदलावों, विशेष रूप से उत्पादन, उपभोग और निवेश के क्षेत्रों में सुधार को दर्शाती है। भारत सरकार की नीतियों, जैसे मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, और अन्य सुधारों ने देश के विकास को गति दी है। इसके अलावा, भारतीय बाजार की विशालता और युवा कार्यबल ने भी इसके आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

चीन की धीमी वृद्धि दर

इसके विपरीत, चीन की जीडीपी वृद्धि दर 2024 में करीब 5% था, और 2025 में यह 4.6% तक गिरने की संभावना है। चीन की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में धीमी पड़ी है, जिसका कारण घरेलू उपभोक्ता मांग में गिरावट, बढ़ती ऋण समस्याएं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में समस्याएं हैं। इसके अलावा, चीन में लॉकडाउन और अन्य कोविड-19 से जुड़ी समस्याओं ने आर्थिक विकास को प्रभावित किया है। हालांकि, चीन का औद्योगिक और निर्यात क्षेत्र अभी भी काफी मजबूत है, लेकिन घरेलू विकास में कमी और बढ़ती जनसंख्या संबंधी समस्याएं इसके लिए चुनौतीपूर्ण हैं।

अमेरिका की ठहरी हुई वृद्धि दर

अमेरिका की जीडीपी वृद्धि दर भी पिछली तिमाही के मुकाबले 2.2% रही, जो बताता है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत ठहरी हुई है। 2024 की चौथी तिमाही में अमेरिका की जीडीपी पिछली तिमाही के मुकाबले केवल 2.30% बढ़ी थी। यह वृद्धि दर उस गति से कम है जो आमतौर पर अमेरिका की अर्थव्यवस्था में देखी जाती थी। अमेरिका में उच्च मुद्रास्फीति, बढ़ते ब्याज दर, और वैश्विक व्यापार तनावों के कारण विकास में रुकावट आई है। इसके अलावा, अमेरिका में श्रम बाजार की समस्याएं और उत्पादकता की कमी भी इसके विकास में बाधक बनी हैं।

अमेरिका-1, चीन-3, भारत-4... ताकत की नई रैकिंग!

नई दिल्ली: ग्लोबल फायरपावर (GFP) द्वारा 2025 की सैन्य शक्ति रैंकिंग जारी की गई है, जिसमें भारत ने अपनी स्थिति को बनाए रखते हुए चौथे स्थान पर अपनी जगह बनाई है। इस सूची में अमेरिका पहले, रूस दूसरे, और चीन तीसरे स्थान पर बना हुआ है। 

बता दें की यह रैंकिंग देशों की सैन्य ताकत का एक व्यापक आकलन करती है, जिसमें सशस्त्र बलों की संख्या, सैन्य उपकरणों की गुणवत्ता, और रणनीतिक क्षमताओं जैसी कई महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखा जाता है। आइए, इस रैंकिंग और भारत की सैन्य शक्ति पर विस्तार से नजर डालते हैं।

अमेरिका: वैश्विक सैन्य प्रभुत्व का प्रतीक

अमेरिका लगातार सैन्य शक्ति के मामले में सबसे मजबूत देश रहा है, और 2025 की रैंकिंग में भी पहले स्थान पर है। इसका प्रमुख कारण है इसका अत्याधुनिक हथियार प्रणाली, विशाल रक्षा बजट और वैश्विक प्रभाव। अमेरिका का रक्षा बजट विश्व में सबसे बड़ा है, जो उसे न केवल अपने सैन्य संसाधनों को बेहतर करने की क्षमता देता है, बल्कि उसे किसी भी संकट के समय त्वरित प्रतिक्रिया देने की भी क्षमता प्रदान करता है। इसके अलावा, अमेरिका का मजबूत परमाणु निवारक बल, अत्याधुनिक युद्धक विमान और समुद्री ताकत भी इसे वैश्विक सैन्य मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाते हैं।

चीन: तकनीकी निवेश से सशक्त सैन्य क्षमता

चीन रक्षा क्षेत्र में भारी निवेश कर रहा है, और इसका परिणाम 2025 की रैंकिंग में उसे तीसरे स्थान पर बनाए रखने में देखा जा सकता है। चीनी सेना की ताकत की नींव उसकी बढ़ती तकनीकी क्षमताओं और रक्षा उत्पादन में है। चीन ने अपने सैन्य उपकरणों और हथियार प्रणालियों को निरंतर आधुनिक बनाने के साथ-साथ ड्रोन और साइबर युद्ध के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति की है। इसका विशाल जनसंख्या संसाधन भी चीनी सैन्य शक्ति को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा देता है। साथ ही, चीन की रणनीति न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी उसका प्रभाव बढ़ता जा रहा है।

भारत: उन्नत तकनीकी और सैन्य सशक्तिकरण में वृद्धि

भारत की सैन्य शक्ति में लगातार सुधार हो रहा है, और 2025 की रैंकिंग में चौथे स्थान पर रहते हुए भारत ने एक मजबूत सैन्य ताकत के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। भारत का सामरिक महत्व, उसकी रणनीतिक रूप से स्थित सीमाएँ और उसका बढ़ता रक्षा बजट उसकी सैन्य शक्ति को और अधिक सशक्त बना रहे हैं।

भारत ने हाल के वर्षों में अपने रक्षा उत्पादन और आधुनिक सैन्य उपकरणों में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। भारत के पास विश्वस्तरीय लड़ाकू विमान जैसे राफेल, सामरिक मिसाइल प्रणाली, और स्वदेशी सैन्य उपकरणों का एक मजबूत सेट है। भारतीय सेना ने विशेष रूप से उन्नत हथियार प्रणालियों और सैन्य तकनीकों में निवेश किया है, जैसे कि मिसाइल रक्षा प्रणाली, असमर्थ परमाणु क्षमता और आधुनिक युद्धक विमान। साथ ही, भारतीय नौसेना और वायुसेना को भी आधुनिकरण की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं, जो भारत को एक क्षेत्रीय शक्ति से वैश्विक ताकत की ओर अग्रसर कर रहे हैं।

अहमदाबाद : Executive के 51 पदों पर भर्ती

अहमदाबाद: Executive के 51 पदों पर भर्ती निकली हैं। ये भर्ती India Post Payments Bank (IPPB) के द्वारा निकाली गई हैं। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नोटिश जारी किया गया हैं। इच्छुक उम्मीदवार प्रकाशित नोटिफिकेशन को पढ़ें और आवेदन करें।

पद का नाम : Executive

पदों की संख्या : कुल 51 पद। 

योग्यता : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की योग्यता किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक पास होनी चाहिए। 

आयु सीमा : इन पदों पर आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम आयु सीमा 21 वर्ष, जबकि अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष निर्धारित किया गया हैं। 

चयन प्रक्रिया : इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन टेस्ट के द्वारा होगा। इसके बारे में और अधिक जानकारी के लिए नोटिश को पढ़ें। 

आवेदन प्रक्रिया : इच्छुक और योग्य उम्मीदवार India Post Payments Bank (IPPB) की आधिकारिक वेबसाइट पर जा कर नोटिश को पढ़ें और आवेदन करें। 

आवेदन शुल्क : SC/ST/PWD (Only Intimation charges) के लिए आवेदन शुल्क INR 150.00, जबकि For all others के लिए INR 750.00.

आधिकारिक वेबसाइट : https://ippbonline.com/web/ippb/current-openings

आवेदन की अंतिम तिथि : 21 मार्च 2025

यूपी में इन 8 जिलों के CMO बदले, देखें पूरी लिस्ट?

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम उठाते हुए प्रदेश के आठ जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ) का स्थानांतरण किया। यह निर्णय प्रदेश में चिकित्सा सेवा प्रणाली को सुधारने और स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक कार्यकुशल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। 

बता दें की इस नए बदलावों के तहत, प्रदेश के विभिन्न जिलों के अपर मुख्य चिकित्साधिकारियों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के पद पर नियुक्त किया गया है, जबकि इटावा, बस्ती और बांदा में तैनात सीएमओ को हटाकर उन्हें नए पदों पर तैनात किया गया है।

इसके अलावा, इटावा के सीएमओ डॉ. गीताराम को लखनऊ स्थित स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात किया गया है। इसी तरह, बस्ती के सीएमओ डॉ. रमाशंकर दुबे को प्रयागराज स्थित मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय में वरिष्ठ परामर्शदाता के रूप में तैनात किया गया है। बांदा के सीएमओ डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव को जिला अस्पताल बदायूं में वरिष्ठ परामर्शदाता की जिम्मेदारी दी गई है।

नए सीएमओ की नियुक्ति:

1 .बरेली के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश कुमार को सीतापुर का सीएमओ बनाया गया है।

2 .मैनपुरी के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजेन्द्र सिंह को बांदा का सीएमओ नियुक्त किया गया है।

3 .मुजफ्फरनगर के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. ब्रजेन्द्र कुमार सिंह को सीएमओ इटावा बनाया गया हैं।

4 .मुरादाबाद के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार दोहरे को बुलंदशहर का सीएमओ नियुक्त किया गया है।

5 .फिरोजाबाद के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार को गौतमबुद्ध नगर का सीएमओ नियुक्त किया गया है।

6 .प्रतापगढ़ के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विवेक कुमार मिश्र को शाहजहांपुर का सीएमओ नियुक्त किया गया है।

7 .बिजनौर के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील कुमार बनियान को अयोध्या का सीएमओ नियुक्त किया गया है।

पुरुषों के लिए खास है 4 जूस, बनी रहेगी यौन ताकत!

हेल्थ डेस्क: आज के समय में पुरुषों की सेहत और यौन ताकत को बनाए रखने के लिए सही आहार और जीवनशैली का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। बढ़ते तनाव, गलत खानपान, और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कई पुरुष अपनी यौन शक्ति में गिरावट का अनुभव करते हैं। लेकिन कुछ प्राकृतिक जूस ऐसे हैं, जो यौन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और ताकत को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

1. अनार जूस

अनार को 'विटामिन का राजा' माना जाता है और यह यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है। अनार जूस में एंटीऑक्सिडेंट्स, विटामिन C, और फ्लेवोनोइड्स होते हैं, जो रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाते हैं। यह पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ा सकता है, जो यौन इच्छा और प्रदर्शन को प्रभावित करता है। अनार जूस का नियमित सेवन पुरुषों की यौन क्षमता को सुधार सकता है और इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद कर सकता है।

2. खजूर जूस

खजूर का जूस भी पुरुषों के यौन स्वास्थ्य के लिए अत्यधिक लाभकारी है। खजूर में उच्च मात्रा में मिनरल्स, जैसे मैग्नीशियम, सेलेनियम, और जिंक पाए जाते हैं, जो पुरुषों के सेक्सुअल हेल्थ को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। खजूर जूस रक्त संचार को बेहतर बनाता है और शरीर की ऊर्जा को बढ़ाता है। इसके अलावा, खजूर में उपस्थित प्रोटीन और शर्करा शरीर को ताकत और सहनशक्ति प्रदान करते हैं, जो यौन स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं।

3. केला शेक

केला शेक न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि यह पुरुषों के यौन स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। केला में पोटेशियम, मैग्नीशियम, और विटामिन B6 जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर में ऊर्जा और सहनशक्ति बढ़ाते हैं। यह रक्त संचार में सुधार करने में भी मदद करता है, जिससे यौन प्रदर्शन में वृद्धि हो सकती है। केला शेक से शरीर को ताजगी मिलती है और यह आपको लंबे समय तक ऊर्जावान बनाए रखता है, जिससे यौन शक्ति को बनाए रखने में मदद मिलती है।

4. संतरे का जूस

संतरे का जूस विटामिन C का बेहतरीन स्रोत होता है, जो पुरुषों के यौन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। यह जूस शरीर में रक्त संचार को बढ़ाता है और शरीर को डिटॉक्स करता है। संतरे में फ्लेवोनोइड्स भी होते हैं, जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बनाए रखने में मदद करते हैं। संतरे के जूस का सेवन करने से पुरुषों को ज्यादा ऊर्जा और मानसिक शांति मिलती है, जो यौन प्रदर्शन में सुधार लाती है।

कभी यूक्रेन के पास था परमाणु हथियार का भंडार!

न्यूज डेस्क: आज के समय में यूक्रेन युद्ध से तबाही के कगार पर पहुंच गया हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन का परमाणु निरस्त्रीकरण और उसके बाद रूस द्वारा किए गए आक्रमण पर विचार करते हुए यह सवाल उठता है कि क्या 1991 में यूक्रेन ने परमाणु हथियारों को छोड़कर सही कदम उठाया था, या फिर यह एक रणनीतिक भूल साबित हुई। विशेष रूप से 2014 में क्रीमिया पर रूस के कब्जे और 2022 में शुरू हुए युद्ध ने इस मुद्दे को फिर से गंभीर बना दिया है।

यूक्रेन के पास था परमाणु भंडार

सोवियत संघ के विघटन के बाद, यूक्रेन ने स्वतंत्रता प्राप्त की और उसके पास उस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा परमाणु शस्त्रागार था। 1991 तक, यूक्रेन के पास 5,000 परमाणु हथियार थे, जिनमें 3,000 सामरिक और 2,000 रणनीतिक हथियार शामिल थे। इन हथियारों में अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), परमाणु बमवर्षक विमान और मिसाइलें शामिल थीं। यूक्रेन के पास इतनी विशाल परमाणु क्षमता थी कि यदि वह इसे बनाए रखता तो वह सुरक्षा के मामले में एक ताकतवर देश बन सकता था।

परमाणु निरस्त्रीकरण का निर्णय

1991 में, जब यूक्रेन ने स्वतंत्रता प्राप्त की, तो देश के नेताओं ने शांति और सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए परमाणु हथियारों को छोड़ने का फैसला किया। हालांकि, यह निर्णय यूक्रेन के लिए एक समझौते के तहत लिया गया था। 1994 में बुडापेस्ट मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें यूक्रेन ने अपने परमाणु हथियारों को नष्ट करने का वचन दिया और बदले में रूस, अमेरिका और ब्रिटेन से सुरक्षा गारंटी प्राप्त की। इन देशों ने आश्वासन दिया कि वे यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और अगर कोई देश यूक्रेन पर हमला करता है तो वे उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के माध्यम से समर्थन देंगे।

रूस के आक्रमण के बाद की स्थिति

क्रीमिया पर रूस के कब्जे और 2022 में यूक्रेन में शुरू हुए युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सुरक्षा गारंटी वास्तव में खोखली थीं। रूस ने बुडापेस्ट मेमोरेंडम की धज्जियां उड़ाते हुए 2014 में क्रीमिया पर हमला किया और फिर 2022 में एक पूर्ण पैमाने पर युद्ध शुरू किया। इसने यह साबित कर दिया कि परमाणु निरस्त्रीकरण के बाद सुरक्षा गारंटी का कोई वास्तविक मूल्य नहीं था।

परमाणु हथियार निरस्त्रीकरण क्या एक भूल थी?

यूक्रेन के परमाणु निरस्त्रीकरण पर उस समय कई विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे, और उनमें से कई ने इसे एक बड़ी रणनीतिक भूल माना था। 1993 में राजनीतिक वैज्ञानिक जॉन मियरशाइमर ने चेतावनी दी थी कि परमाणु हथियारों को छोड़ना यूक्रेन के लिए एक खतरनाक कदम हो सकता है। उनके अनुसार, परमाणु शक्ति यूक्रेन को सुरक्षा प्रदान कर सकती थी, और बिना परमाणु हथियारों के, यूक्रेन किसी बड़े देश के आक्रमण का शिकार बन सकता था।

यूक्रेन ने यह निर्णय शांति बनाए रखने के उद्देश्य से लिया था, लेकिन यह समझौता तभी कारगर हो सकता था जब उन देशों द्वारा दी गई सुरक्षा गारंटी पर ईमानदारी से अमल किया जाता। लेकिन, रूस ने न केवल इन गारंटियों को तोड़ा, बल्कि यूक्रेन को एक नाजुक स्थिति में डाल दिया।

परमाणु हथियारों का छोड़ना और रूस का फायदा

1994 में परमाणु निरस्त्रीकरण के बाद, यूक्रेन के परमाणु हथियारों को नष्ट नहीं किया गया बल्कि रूस को स्थानांतरित कर दिया गया। इससे रूस का परमाणु शस्त्रागार मजबूत हुआ, और यूक्रेन का हाथ खाली हो गया। यह स्थिति रूस के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण से फायदेमंद साबित हुई क्योंकि उसने अपने परमाणु हथियारों को और मजबूत किया और यूक्रेन को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय से वंचित कर दिया।

ये हैं बिहार के सबसे अमीर और सबसे गरीब जिले!

पटना: बिहार, जिसे आमतौर पर एक उपभोक्ता प्रदेश के रूप में जाना जाता है, एक ऐसी राज्य है जहां अर्थव्यवस्था की गति और विकास की दिशा एक समान नहीं हैं। यहाँ के जिले, अपने भौतिक संसाधनों, शैक्षिक और औद्योगिक बुनियादी ढांचे के हिसाब से पूरी तरह से अलग-अलग हैं। राज्य के कुछ जिले तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि कुछ अन्य विकास के मामले में काफी पीछे हैं।

पटना – बिहार का सबसे अमीर जिला

पटना, बिहार का राजधानी होने के साथ-साथ राज्य का सबसे अमीर जिला भी है। पटना की प्रति व्यक्ति आय 1,21,396 रुपये है, जो इसे न केवल बिहार, बल्कि पूरे बिहार के मुकाबले देश के कुछ हिस्सों में भी प्रमुख बना देती है। पटना में उभरती हुई औद्योगिक, शैक्षिक और सेवा क्षेत्र की गतिविधियाँ, इस जिले की आर्थिक शक्ति को बढ़ाती हैं। यहाँ की भौतिक और बुनियादी ढांचे की स्थिति भी बहुत बेहतर है, जिससे उद्योगों को आकर्षित करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिल रही है।

बेगूसराय और मुंगेर: विकास की राह पर

पटना के बाद, बेगूसराय और मुंगेर क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर आते हैं। इन जिलों की प्रति व्यक्ति आय क्रमशः 49,064 रुपये और 46,795 रुपये है। बेगूसराय, जिसे बिहार का औद्योगिक केंद्र भी कहा जाता है, यहाँ के लोगों की जीवनशैली में तेजी से बदलाव हो रहा है। यहाँ की कंपनियों और उद्योगों की मौजूदगी इस जिले की अर्थव्यवस्था को सहारा देती है। मुंगेर, जो ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समृद्ध है, यहाँ के आर्थिक विकास में शिक्षा और स्वरोजगार का बड़ा योगदान है।

शिवहर – बिहार का सबसे गरीब जिला

अब बात करते हैं बिहार के सबसे गरीब जिले शिवहर की। शिवहर, जिसकी प्रति व्यक्ति आय केवल 19,561 रुपये है, आर्थिक दृष्टि से सबसे पिछड़ा जिला है। यहाँ के लोग कृषि पर निर्भर हैं, लेकिन यहाँ की कृषि उत्पादन और उपज के स्तर में बहुत सुधार की जरूरत है। इसके अलावा, रोजगार के अवसरों का अभाव और शिक्षा की कमी इस जिले की गरीबी का मुख्य कारण हैं। शिवहर के लोग गरीब होने के बावजूद बहुत मेहनती हैं, लेकिन यहाँ के विकास के लिए सरकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे में सुधार की अत्यंत आवश्यकता है।

सीतामढ़ी और अररिया: सुधार की आवश्यकता

सीतामढ़ी और अररिया क्रमशः दूसरे और तीसरे सबसे गरीब जिलों में आते हैं, जिनकी प्रति व्यक्ति आय 21,931 रुपये और 22,204 रुपये है। इन जिलों में भी शिवहर जैसी समस्याएँ हैं। कृषि आधारित जीवनशैली के कारण इन जिलों की अर्थव्यवस्था भी बहुत ज्यादा बदल नहीं पाई है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचे की स्थिति में सुधार की आवश्यकता है।

बिहार में दाखिल-खारिज के लिए नई गाइडलाइन जारी

पटना: बिहार में दाखिल-खारिज (Dakhil-Kharij) प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने बिना ठोस कारणों के अस्वीकृत किए गए दाखिल-खारिज मामलों के निष्पादन के लिए एक नई गाइडलाइन जारी की है। इस कदम से न केवल मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी, बल्कि दस्तावेजों और प्रक्रियाओं में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

नई गाइडलाइन का उद्देश्य और दिशा

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी की गई नई गाइडलाइन का मुख्य उद्देश्य बिना ठोस कारणों के अस्वीकृत किए गए दाखिल-खारिज मामलों को शीघ्र और प्रभावी रूप से निष्पादित करना है। विभाग ने भूमि सुधार उप समाहर्ताओं (DCLR) को यह आदेश दिया है कि वे ऐसे मामलों को मेरिट के आधार पर निष्पादित करें और यदि अंचल अधिकारियों द्वारा किसी मामले को अस्वीकार किया गया हो, तो अपील में सुनवाई के दौरान पहली तारीख को ही पुनः सुनवाई का आदेश दें।

आवेदन अस्वीकृति के प्रमुख कारण

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बड़ी संख्या में दाखिल-खारिज आवेदन दस्तावेजों की कमी, त्रुटियों या अन्य कारणों से अस्वीकृत हो जाते हैं। जैसे कि आवेदन पत्र के साथ सुसंगत दस्तावेजों का न होना, संलग्न दस्तावेजों का अपठनीय होना, गणितीय या लिपिकीय भूल, ऑनलाइन जमाबंदी में त्रुटियाँ, या रकबा घटाने के लिए गलत जानकारी शामिल होना। ये सभी कारण दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को धीमा करने के प्रमुख कारक हैं। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, विभाग ने निर्णय लिया है कि इन मामलों की सुनवाई के लिए 30 दिनों के भीतर डीसीएलआर के न्यायालय में अपील का प्रावधान रखा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अस्वीकृत मामलों का त्वरित समाधान हो और आम नागरिकों को समय पर न्याय मिल सके।

जिलाधिकारियों की निगरानी का महत्व

इस नई गाइडलाइन में जिलाधिकारियों को विशेष रूप से इस प्रक्रिया की निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारी का यह कार्य सुनिश्चित करेगा कि दाखिल-खारिज मामलों की सुनवाई और निष्पादन में कोई बाधा न आए। जिलाधिकारियों की निगरानी से प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी, और किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार की संभावना को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा, इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि राज्य के सभी जिलों में दाखिल-खारिज मामलों का निष्पादन समान और उचित तरीके से हो, जिससे किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

भूमि सुधार उप समाहर्ताओं के लिए निर्देश

नई गाइडलाइन में भूमि सुधार उप समाहर्ताओं को यह निर्देश भी दिया गया है कि वे सभी मामलों का मेरिट पर विचार करें और बिना किसी वजह के किसी आवेदन को अस्वीकार न करें। इसके साथ ही, सभी कर्मचारियों को इस प्रक्रिया में होने वाली समस्याओं और त्रुटियों के प्रति जागरूक करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण देने की बात भी की गई है। इससे संबंधित अधिकारी मामले के समाधान में दक्ष और प्रोफेशनल बन सकेंगे, और सरकारी प्रक्रिया में होने वाली देरी को रोका जा सकेगा।