भारत पर मेहरबान हुआ रूस, खोल दिया बड़ा पिटारा! चीन-पाक की उड़ गई नींद

नई दिल्ली। भारत और रूस की दोस्ती अब रक्षा सहयोग के एक नए दौर की ओर बढ़ती नजर आ रही है। दिल्ली में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात से पहले क्रेमलिन ने भारत को अपना रणनीतिक साझेदार बताया है। इस बैठक में रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक मुद्दों पर अहम बातचीत होने की उम्मीद है।

अत्याधुनिक हथियारों पर बढ़ेगा सहयोग

रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि रूस अपने आधुनिक सैन्य उपकरणों को भारतीय साझेदारों के साथ साझा करने के लिए तैयार है। खास बात यह है कि दोनों देशों का सहयोग अब केवल हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त उत्पादन तक पहुंच चुका है। एसयू-57 लड़ाकू विमान और एस-500 वायु रक्षा प्रणाली जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं।

ब्रह्मोस को और ताकत देने की तैयारी

भारत-रूस की सफल साझेदारी का उदाहरण ब्रह्मोस मिसाइल है। पेस्कोव ने संकेत दिया कि इस मिसाइल में नई क्षमताएं जोड़कर इसे और प्रभावी बनाया जा सकता है। हालांकि सैन्य सहयोग से जुड़े संवेदनशील विषयों पर दोनों देश सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं करते।

डॉलर पर निर्भरता भी घट रही

भारत-रूस के रिश्तों का एक और अहम पहलू आर्थिक सहयोग है। पेस्कोव के मुताबिक रूस और ब्रिक्स देशों के बीच करीब 90 प्रतिशत भुगतान स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। इससे दोनों देशों के बीच कारोबार में वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है।

यूक्रेन युद्ध पर भी होगी चर्चा

मोदी-पुतिन बातचीत में रूस-यूक्रेन युद्ध और शांति के प्रयास भी अहम मुद्दा रह सकते हैं। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान की वकालत करता रहा है। पेस्कोव ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इन प्रयासों का स्वागत किया है। वहीं, रूस ने भारतीय ऊर्जा आयात पर प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंधों का विरोध करते हुए इसे अवैध बताया है।

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