इस योजना के तहत राज्य में नेटवर्क का विस्तार करने के साथ घरों तक फाइबर कनेक्शन पहुंचाने की तैयारी है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच पहले हुए समझौते में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। सूचना एवं प्रावैधिकी विभाग ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है और साल के अंत तक नेटवर्क विस्तार की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
नेटवर्क खराब हुआ तो भी चलेगा इंटरनेट
भारतनेट के नए मॉडल में इंटरनेट सेवा को ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बनाने पर फोकस रहेगा। नेटवर्क का करीब 99 प्रतिशत अपटाइम बनाए रखने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए रिंग टोपोलॉजी जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि नेटवर्क के किसी एक हिस्से में खराबी आने पर दूसरे रास्ते से कनेक्टिविटी जारी रखी जा सकेगी।
स्कूल से स्वास्थ्य केंद्र तक जुड़ेंगे
ग्राम पंचायत स्तर पर स्कूल, पुलिस थाना, आंगनबाड़ी, डाकघर, स्वास्थ्य केंद्र, सहकारी संस्थाओं और कृषि विज्ञान केंद्रों को फाइबर नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इससे सरकारी संस्थानों में ऑनलाइन सेवाओं का संचालन भी बेहतर हो सकेगा।
घर-घर पहुंचेगा फाइबर इंटरनेट
योजना का एक अहम हिस्सा फाइबर टू द होम (FTTH) है। इसके जरिए व्यक्तिगत घरों तक तेज इंटरनेट पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। ग्रामीण लोगों को ऑनलाइन पढ़ाई, सरकारी सेवाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं, डिजिटल भुगतान और दूसरे जरूरी ऑनलाइन कामों में इसका सीधा फायदा मिल सकता है। कुल मिलाकर भारतनेट के नए स्वरूप से बिहार के गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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