जमाबंदी की गलतियां सुधारने के लिए विशेष अभियान
जमीन के रिकॉर्ड में गलत जानकारी दर्ज होने से लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए मौजा स्तर पर अभियान चलाकर जमाबंदी में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को मामलों का सही तरीके से निपटारा करने को कहा गया है।
5 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन की होगी पड़ताल
सरकारी जमीन की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए 5 एकड़ से ज्यादा क्षेत्रफल वाले भूखंडों का भौतिक सत्यापन प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। सरकारी जमीन से जुड़ी जमाबंदियों की भी जांच होगी। नियमों के दायरे में आने वाली लॉक जमाबंदियों को अनलॉक करने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
मृत रैयतों की जमीन का मामला भी होगा जल्द साफ
मृत रैयतों के नाम पर लंबित जमाबंदियों को लेकर भी विभाग ने सख्ती दिखाई है। ऐसे मामलों में उत्तराधिकार और बंटवारा नामांतरण की कार्रवाई आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य है कि परिवारों को जमीन के रिकॉर्ड दुरुस्त कराने के लिए वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।
फर्जी दस्तावेज और गलत आवेदन पर कार्रवाई
दाखिल-खारिज में गलत जानकारी देने या गलत प्रश्नावली भरने वालों को नोटिस जारी किया जाएगा। वहीं, जाली या कूटरचित दस्तावेज सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जमीन की मापी में पारदर्शिता बनाए रखने और शिकायतों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
ऑनलाइन रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच
भू-अभिलेख पोर्टल पर आने वाले आवेदनों और अपलोड किए गए दस्तावेजों की भी निगरानी की जाएगी। जमीन की रजिस्ट्री से पहले रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। राजस्व महाअभियान में आवेदनों का सिर्फ निपटारा दिखाने के बजाय सही समाधान करने को कहा गया है।

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