जरूरत पड़ने पर बाहर से आएगा चारा
बाढ़ के कारण कई इलाकों में पशुओं के लिए भोजन जुटाना मुश्किल हो गया है। ऐसे में जहां कमी होगी, वहां दूसरे क्षेत्रों से चारा मंगाकर प्रभावित गांवों तक पहुंचाया जाएगा। इससे पशुपालकों को अपने मवेशियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने में राहत मिलेगी।
मोबाइल टीमें करेंगी इलाज
लंबे समय तक पानी में रहने से पशुओं में संक्रमण, बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए पशु चिकित्सा केंद्रों के साथ मोबाइल पशु चिकित्सा टीमें भी सक्रिय की जा रही हैं। जरूरत पड़ने पर पशुओं का मौके पर ही इलाज किया जाएगा।
टीकाकरण और दवा पर भी जोर
बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है। इसलिए पशु चिकित्सकों को टीकाकरण, दवा वितरण और पशुपालकों को जरूरी सावधानियां बताने की जिम्मेदारी दी जा रही है। सरकार का उद्देश्य पशुधन को सुरक्षित रखते हुए बाढ़ से होने वाली किसानों की आर्थिक क्षति को कम करना है।
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