1 .आतंकवाद और टेरर फंडिंग पर सख्त रुख
BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। घोषणा-पत्र में पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए आतंकवाद और उसे मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाने की जरूरत पर जोर दिया गया। सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भी साझा चिंता सामने आई।
2 .समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर रहा जोर
दुनिया के कई हिस्सों में जारी तनाव के बीच समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर भी सहमति बनी। व्यापारिक जहाजों और समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने तथा विवादों का समाधान बातचीत के जरिए करने पर जोर दिया गया।
3 .व्यापार को आसान बनाने की पहल
बैठक में मनमाने ढंग से लगाए जाने वाले भारी टैरिफ को लेकर भी चिंता जताई गई। BRICS देशों ने 2026 से 2030 के बीच आपसी व्यापार और बाजारों तक पहुंच को बेहतर बनाने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।
4 .सैटेलाइट नेटवर्क से मौसम पर नजर
जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए BRICS देशों के बीच सैटेलाइट सहयोग को बढ़ावा देने का फैसला अहम रहा। साझा सैटेलाइट नेटवर्क से मौसम और पर्यावरण से जुड़ी सूचनाओं को बेहतर तरीके से साझा करने में मदद मिल सकती है।
5 .UNSC में भारत की दावेदारी को समर्थन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग भी सम्मेलन के प्रमुख मुद्दों में रही। भारत जैसे विकासशील देशों को सुरक्षा परिषद में उचित प्रतिनिधित्व देने की जरूरत पर जोर दिया गया। इसे भारत की लंबे समय से चली आ रही स्थायी सदस्यता की दावेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत के लिए क्या बदला?
सम्मेलन में भारत को कूटनीतिक स्तर पर कई अहम फायदे मिले। आतंकवाद के मुद्दे पर चीन समेत BRICS देशों की सहमति भारत के लिए महत्वपूर्ण रही। वहीं, भारत और चीन के बीच शीर्ष स्तर पर बातचीत से द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की उम्मीद भी मजबूत हुई।
आर्थिक मोर्चे पर रूस की ओर से अपनी इवोल्गा ट्रेन की पेशकश और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने जैसे प्रस्ताव भी चर्चा में रहे। दिल्ली का BRICS मंच भारत के लिए केवल वैश्विक सम्मेलन नहीं, बल्कि कूटनीति, सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के मोर्चे पर अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर साबित हुआ।

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