शहरी भूमि सर्वे की सबसे खास बात बहुमंजिली इमारतों और फ्लैटों से जुड़ी है। सर्वे के दौरान फ्लैट मालिक के नाम सिर्फ फ्लैट का रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि जमीन में उसके समानुपातिक और वैधानिक हिस्से का विवरण भी दर्ज किया जाएगा। इससे भविष्य में जमीन या फ्लैट के स्वामित्व को लेकर होने वाले विवादों में कमी आने की उम्मीद है।
ड्रोन और जीपीएस से होगी मैपिंग
शहरी क्षेत्रों में जमीन की पैमाइश के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ड्रोन और जीपीएस के जरिए जमीन की सीमाओं की मैपिंग होगी और सर्वे के बाद संबंधित रैयतों को लैंड पार्सल मैप उपलब्ध कराया जाएगा। रिकॉर्ड में किसी तरह की गलती या आपत्ति होने पर लोगों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे दर्ज कराने का मौका भी मिलेगा।
पटना समेत शहरों में होगा बड़ा फायदा
पटना जैसे शहरों में पुराने भूमि रिकॉर्ड की वजह से लंबे समय से कई तरह की दिक्कतें सामने आती रही हैं। नए सर्वे से जमीन की सीमा और स्वामित्व का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने की उम्मीद है। इससे पुराने दस्तावेजों पर निर्भरता कम होगी और भूमि रिकॉर्ड को अधिक व्यवस्थित किया जा सकेगा।
इस सर्वे में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ नगर निकायों के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल होंगे। सर्वे से जुड़ी जरूरी सूचनाएं वार्ड कार्यालयों और संबंधित नगर निकायों की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
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