छह साल बाद फिर जुड़ेंगे गुआंगझू और दिल्ली
नई सेवा शुरू होने के बाद यात्रियों को भारत और चीन के बीच सीधे सफर का विकल्प मिलेगा। एयरलाइन की योजना अलग-अलग रूटों पर हर सप्ताह बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित करने की है। इससे कारोबार, शिक्षा, पर्यटन और निजी कामों से दोनों देशों के बीच यात्रा करने वाले लोगों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
BRICS सम्मेलन के बीच हुआ बड़ा ऐलान
सीधी उड़ानों की बहाली का ऐलान ऐसे समय में हुआ है, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर उनका यह दौरा दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत की भी उम्मीद है। ऐसे में विमान सेवाओं की बहाली को रिश्तों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सीमा तनाव के बाद बदली तस्वीर
2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ गया था। इसका असर दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों की आवाजाही पर भी पड़ा। भारत लगातार सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए जरूरी बताता रहा है। ऐसे माहौल में सीधी उड़ानों की वापसी संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
व्यापार और पर्यटन को फायदा
सीधी उड़ानों का सबसे बड़ा लाभ यात्रियों के साथ-साथ कारोबारियों को मिलने की उम्मीद है। यात्रा का समय कम होने से व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और पर्यटन व पारिवारिक यात्राओं में भी आसानी होगी। लंबे अंतराल के बाद दोनों देशों के बीच हवाई संपर्क का विस्तार आपसी संवाद को मजबूत करने और संबंधों में सामान्य स्थिति की ओर बढ़ने का संकेत माना जा रहा है।

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