हर शुक्रवार देना होगा स्टॉक का हिसाब
नई व्यवस्था में डीलरों के लिए चीनी के स्टॉक की जानकारी नियमित रूप से देना जरूरी होगा। सभी संबंधित डीलरों को पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा और हर शुक्रवार उपलब्ध स्टॉक का विवरण अपडेट करना होगा। इससे सरकार को बाजार में चीनी की वास्तविक उपलब्धता पर लगातार नजर रखने में मदद मिलेगी।
ज्यादा स्टॉक मिलने पर कार्रवाई
जांच के दौरान यदि किसी डीलर के पास तय सीमा से अधिक चीनी पाई जाती है या जानबूझकर माल रोककर बाजार में कमी पैदा करने की कोशिश सामने आती है, तो कार्रवाई की जा सकती है। जमाखोरी और कृत्रिम कमी जैसे मामलों में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
बड़े खरीदार भी निगरानी के दायरे में
सरकार की निगरानी केवल डीलरों तक सीमित नहीं रहेगी। मिठाई की दुकानें, शीतल पेय कंपनियां, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां और अन्य बड़े संस्थागत खरीदार भी इसके दायरे में होंगे। जिनकी औसत मासिक खपत 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक है, वे उत्पादन या इस्तेमाल के लिए 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे।
चीनी मिलों को भी रखनी होगी जानकारी
बड़े उपभोक्ताओं को चीनी की बिक्री पर भी नजर रखी जाएगी। चीनी मिलों को ऐसे खरीदारों को दी गई मात्रा का सत्यापन करना होगा। सरकार का यह कदम बाजार में अनावश्यक स्टॉक रोकने और चीनी की उपलब्धता को सामान्य बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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