परिवार के खर्च का भी रखा जाएगा ध्यान
नई नियमावली में मानक मजदूर परिवार में कर्मचारी, पति या पत्नी और दो बच्चों को आधार माना गया है। भोजन, कपड़े और आवास के साथ बच्चों की पढ़ाई, इलाज, बिजली-ईंधन और अन्य जरूरी खर्चों को भी मजदूरी तय करने की गणना में शामिल किया गया है। इससे न्यूनतम मजदूरी को परिवार की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने की कोशिश की गई है।
साल में दो बार महंगाई भत्ते की समीक्षा
महंगाई के असर को ध्यान में रखते हुए मजदूरी में मिलने वाले महंगाई भत्ते की गणना साल में दो बार की जाएगी। इसके लिए औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया जाएगा। संशोधन की प्रक्रिया एक अप्रैल और एक अक्टूबर से पहले पूरी करने का प्रावधान है।
ओवरटाइम से लेकर वेतन पर्ची तक नियम तय
छुट्टी के दिन काम कराने पर मजदूर को ओवरटाइम के हिसाब से भुगतान और वैकल्पिक अवकाश देना होगा। लगातार 10 दिन से अधिक बिना छुट्टी काम कराने पर भी रोक रहेगी। वहीं वेतन पर्ची में मूल वेतन, भत्ते, ओवरटाइम, पीएफ-ईएसआई और हाथ में मिलने वाली रकम जैसी जानकारी दर्ज करनी होगी।
जुर्माने पर भी कसा शिकंजा
किसी कर्मचारी पर जुर्माना लगाने से पहले उसे लिखित रूप से कारण बताना होगा और जवाब के लिए सात दिन का समय देना होगा। नई व्यवस्था में मजदूरों को अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अतिकुशल श्रेणियों में बांटने का भी प्रावधान किया गया है।

0 comments:
Post a Comment