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यूपी वालों सावधान! 25+ जिलों में झमाझम बारिश!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है। पिछले कई दिनों से उमस भरी भीषण गर्मी झेल रहे प्रदेशवासियों को राहत तो मिलने वाली है, लेकिन यह राहत अपने साथ खतरे की आहट भी लेकर आ रही है। मौसम विभाग ने राज्य के 25 से अधिक जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जो रविवार यानी 31 अगस्त से असर दिखाना शुरू कर सकता है।

मौसम के तेवर बदलने को तैयार

शनिवार तक जहां तापमान में गिरावट के कोई खास संकेत नहीं थे, वहीं अब मौसम विभाग के ताज़ा अनुमान के मुताबिक, प्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेज़ होने जा रही है। रविवार से लेकर 2 सितंबर तक कई जिलों में मध्यम से लेकर बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

लखनऊ समेत कई जिलों में चेतावनी

राजधानी लखनऊ में भी मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है। इसके मद्देनज़र येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने नागरिकों को आगाह किया है कि अत्यधिक बारिश से जलभराव, यातायात में दिक्कत और निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं।

किन जिलों में सबसे अधिक असर?

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिले भारी बारिश की चपेट में आ सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज और एटा, साथ ही आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, औरैया, मैनपुरी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद और रामपुर, बरेली, पीलीभीत, हमीरपुर, महोबा, झांसी और ललितपुर में भी बारिश की तीव्रता अधिक रहने की संभावना है।

ऑरेंज अलर्ट 1 सितंबर के लिए

1 सितंबर को मानसूनी गतिविधियां अपने चरम पर हो सकती हैं। इस दिन प्रदेश के पश्चिमी और मध्यवर्ती जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में एक दो स्थान पर आसमानी बिजली भी गिर सकती हैं।

भारत-चीन का व्यापार कितना बड़ा? जानकर चौंक जाएंगे

नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच व्यापारिक रिश्ते बीते दो दशकों में तेज़ी से विकसित हुए हैं। जहां एक ओर द्विपक्षीय व्यापार का कुल आकार रिकॉर्ड ऊँचाईयों पर पहुँच रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के लिए चिंता का विषय यह है कि इस बढ़ते व्यापार का लाभ असमान रूप से चीन के पक्ष में झुका हुआ है। आयात और निर्यात के बीच का फासला लगातार बढ़ रहा है और यह असंतुलन न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी गंभीर माना जा रहा है।

तेज़ी से बढ़ता व्यापार

वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और चीन के बीच कुल व्यापार लगभग 127.75 अरब अमेरिकी डॉलर का रहा, जिसमें से भारत का निर्यात 14.25 अरब डॉलर था, जबकि आयात 113.5 अरब डॉलर तक पहुँच गया। यह दर्शाता है कि भारत को चीन से जो माल मिल रहा है, उसकी मात्रा और मूल्य, उसके चीन को भेजे जा रहे सामान की तुलना में कहीं अधिक है।

2025-26 की शुरुआत यानी अप्रैल से जुलाई तक ही भारत का निर्यात 19.97% की वृद्धि के साथ 5.75 अरब डॉलर पर पहुँच चुका है, जबकि आयात 13.06% बढ़कर 40.65 अरब डॉलर हो गया है। यह रुझान बताता है कि व्यापार की गति तेज है, लेकिन संतुलन की दिशा में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो रहा।

व्यापार घाटा: एक पुरानी लेकिन गंभीर चुनौती

2003-04 में चीन के साथ व्यापार घाटा मात्र 1.1 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर 99.2 अरब डॉलर हो गया है। यह एक कई गुना वृद्धि है जो भारत की आयात निर्भरता को उजागर करती है। चीन अब भारत के कुल व्यापार घाटे का लगभग एक तिहाई हिस्सा बन चुका है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह घाटा महज़ संख्यात्मक नहीं, बल्कि संरचनात्मक रूप से असंतुलित है। इसका अर्थ यह है कि चीन से आयात मुख्य रूप से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और अन्य उच्च-तकनीकी क्षेत्रों में केंद्रित है, जबकि भारत का चीन को निर्यात कच्चे माल या कम-मूल्य वाली वस्तुओं तक सीमित है।

भारत के लिए क्या है रणनीतिक चिंताएं?

भारत सरकार ने कई बार चीनी बाजार में गैर-व्यापारिक बाधाओं (जैसे मानक, मंजूरी प्रक्रिया और भाषा संबंधी अड़चनें) को लेकर अपनी आपत्तियाँ जताई हैं। भारतीय उत्पादों को चीन में प्रवेश दिलाना मुश्किल होता जा रहा है, जबकि चीनी सामान भारत में बिना बड़ी रुकावटों के प्रवेश कर रहे हैं।

भारत का चीन में निर्यात पिछले दो दशकों में 42.3% से घटकर मात्र 11.2% रह गया है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत न केवल व्यापार घाटे का सामना कर रहा है, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में चीन के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पिछड़ भी रहा है।

आर्थिक पावर की रेस में भारत, GDP में रचेगा नया इतिहास!

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत की आर्थिक विकास दर (GDP Growth Rate) अप्रैल-जून तिमाही में 7.80% दर्ज की गई है, जो पिछले पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है।

आर्थिक विकास की रफ्तार में बड़ा उछाल

देश की अर्थव्यवस्था हाल के वर्षों में लगातार मजबूत हो रही है। वैश्विक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के बावजूद भारत ने अपनी विकास की रफ्तार को बनाए रखा है। 7.80% की तिमाही वृद्धि दर यह दर्शाती है कि भारत अब न केवल विकासशील देशों में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी आर्थिक नेतृत्व करने की स्थिति में पहुंच चुका है।

RBI गवर्नर का भरोसा -तीसरा स्थान अब दूर नहीं

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "आज दुनिया के (सबसे) विकसित देशों में भारत की गिनती पांचवें नंबर पर हो रही है। बहुत जल्द ही भारत (इस सूची में) तीसरा (सबसे) बड़ा देश बनने वाला है।" इसका सीधा अर्थ है कि भारत जल्द ही जापान और जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर की वैश्विक अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती ताकत

भारत की यह आर्थिक छलांग केवल GDP के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह देश की वैश्विक स्थिति, निवेश क्षमता, तकनीकी प्रगति, और युवा कार्यबल की सामर्थ्य को भी दर्शाती है। टेक्नोलॉजी, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इकोसिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भारत ने विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

8वें वेतन आयोग: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नई रिपोर्ट?

नई दिल्ली। देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इन दिनों एक अहम फैसले पर टिकी हुई हैं। 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट और उसकी संभावित सिफारिशों पर। हालांकि सरकार ने आयोग के गठन की घोषणा जनवरी 2025 में कर दी थी, लेकिन अब तक न तो Terms of Reference (ToR) तय हुए हैं और न ही चेयरपर्सन व सदस्यों की नियुक्ति की गई है। इससे यह अंदेशा बढ़ गया है कि वेतन संशोधन में पिछली बार की तरह कई सालों की देरी हो सकती है।

7वें वेतन आयोग से तुलना: क्या 8वें में भी उतनी ही देर?

7वें वेतन आयोग की घोषणा सितंबर 2013 में हुई थी, जबकि इसकी सिफारिशें लागू होने में करीब 2 साल 9 महीने लग गए थे। नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2016 से लागू किया गया। इस बार भी यदि जनवरी 2025 में 8वें आयोग का गठन होता है, तो सिफारिशों को अंतिम रूप देने और लागू करने में 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत तक का समय लग सकता है।

हालांकि इस बार सरकारी कामकाज में डिजिटलीकरण और डेटा एनालिटिक्स के कारण कुछ प्रक्रियाएँ तेज हो सकती हैं, फिर भी प्रारंभिक देरी (ToR और टीम की घोषणा में) पूरे शेड्यूल को पीछे धकेल रही है। जिससे कर्मचारियों में चिंता हैं।

कर्मचारियों की उम्मीदें और चिंताएँ

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की एक बड़ी आबादी का जीवनस्तर इस आयोग की सिफारिशों पर निर्भर करता है। महंगाई की तेज़ रफ्तार के मुकाबले वेतन और पेंशन में अबतक कोई बड़ा सुधार नहीं हुआ है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग से बेसिक पे, HRA और अन्य अलाउंस में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई थी, जिससे लाखों कर्मचारियों को राहत मिली थी। अब भी यही उम्मीद की जा रही है कि 8वां वेतन आयोग मूल वेतन में वृद्धि, नई पे-मैट्रिक्स, और बेहतर ग्रेच्युटी नियमों की सिफारिश करेगा। लेकिन देरी को लेकर कर्मचारियों में निराशा और नाराजगी बढ़ रही है।

सरकार की स्थिति: घोषणा के बाद भी ठहराव क्यों?

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा में हाल ही में बताया कि सरकार को विभिन्न पक्षों से सुझाव प्राप्त हुए हैं और जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग को अपनी सिफारिशें उस टाइमलाइन में ही देनी होंगी जो ToR में निर्धारित की जाएगी। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि आठ महीने बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्यवाही शुरू नहीं हुई है, जिससे कर्मचारियों को यह लग रहा है कि प्रक्रिया सही समय पर पूरी नहीं हो पाएगी।

यूपी में अब 'फ्री' लगेगा सोलर पैनल, नागरिकों को बड़ी खुशखबरी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अब प्रदेश में सोलर पैनल लगवाना पहले की तुलना में न सिर्फ आसान हो गया है, बल्कि किफायती भी हो गया है। यूपी सरकार ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत उपभोक्ताओं को कई तरह की छूट देने का ऐलान किया है, जिससे अब लोग अपनी छत पर सोलर पैनल बिना किसी अतिरिक्त सरकारी शुल्क के लगवा सकेंगे।

क्या है प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 फरवरी 2024 को शुरू की गई प्रधानमंत्री सूर्यघर: मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य देश के लाखों घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है। इस योजना के अंतर्गत घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार 40% तक की सब्सिडी देती है। इससे न केवल बिजली बिल में भारी कमी आती है, बल्कि आम लोग भी स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में योगदान दे पाते हैं।

अब कौन-कौन से शुल्क हुए माफ?

उत्तर प्रदेश में इस योजना को और अधिक प्रभावी और सुलभ बनाने के लिए बिजली विभाग ने कई शुल्क पूरी तरह समाप्त कर दिए हैं। इसमें मुख्यतः ये शामिल हैं: आवेदन शुल्क (₹250), पंजीकरण शुल्क (₹1000), नेट मीटर जांच शुल्क (₹400), अब उपभोक्ताओं को इन तीनों मदों में कोई पैसा नहीं देना होगा। इस फैसले से उपभोक्ताओं को ₹1250 से लेकर ₹1650 तक की सीधी बचत होगी।

स्मार्ट मीटर और नेट मीटरिंग को लेकर राहत

अभी तक नेट मीटरिंग के लिए इंटरकनेक्शन एग्रीमेंट जरूरी होता था, जो कई बार लंबी प्रक्रिया बन जाती थी। अब इस आवश्यकता को भी समाप्त कर दिया गया है। जो उपभोक्ता खुद से स्मार्ट मीटर लगवाते हैं, उन्हें अतिरिक्त छूट मिल रही है। यदि उपभोक्ता खुद मीटर खरीदकर उसकी जांच कराते हैं, तो उन्हें ₹1650 तक का लाभ होगा।

क्यों है यह फैसला महत्वपूर्ण?

1 .पर्यावरण संरक्षण: सौर ऊर्जा प्रदूषण रहित होती है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होगा।

2 .स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा: लोग पारंपरिक बिजली की बजाय सोलर एनर्जी की ओर बढ़ेंगे।

3 .बिजली बिल में भारी कटौती: सोलर पैनल से खुद की बिजली बनाकर उपभोक्ता अपनी मासिक खर्चों में कटौती कर सकते हैं।

4 .सरल और किफायती प्रक्रिया: अब किसी भी प्रकार का सरकारी शुल्क न होने से प्रक्रिया पहले से काफी आसान हो गई है।

योगी सरकार ने दी मंजूरी: यूपी में 500+ पदों पर नई भर्ती!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दो नवगठित विश्वविद्यालयों जैसे गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद और मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर में कुल 518 शैक्षिक पदों की भर्ती को मंजूरी दे दी है। यह कदम न केवल शैक्षिक संस्थानों की मजबूती की दिशा में है, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और शोध के नए अवसरों का सृजन भी करेगा।

दो विश्वविद्यालयों में होंगे नियुक्ति के बड़े स्तर पर अवसर

राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत इस प्रस्ताव के तहत गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद में कुल 273 और मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर में 245 शैक्षिक पदों का सृजन किया गया है। इनमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद शामिल हैं। यह कदम इन विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं की श्रेणी में लाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है।

पदों का विस्तृत विवरण:

गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद, प्रोफेसर: 39, एसोसिएट प्रोफेसर: 78, असिस्टेंट प्रोफेसर: 156, कुल पद: 273

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर, प्रोफेसर: 35, एसोसिएट प्रोफेसर: 70, असिस्टेंट प्रोफेसर: 140, कुल पद: 245

स्थानीय युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ

एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि इन नियुक्तियों से स्थानीय योग्य उम्मीदवारों को अपने क्षेत्र में ही नौकरी और शोध के अवसर मिलेंगे। इससे शिक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी। सरकार ने आश्वासन दिया है कि सारी भर्तियां पारदर्शी प्रक्रिया और आरक्षण नियमों के अंतर्गत की जाएंगी, जिससे समान अवसर सुनिश्चित किया जा सके।

मंगल दोष से मुक्ति चाहिए? तो घर पर लगाएं ये 3 चमत्कारी पौधे

धर्म डेस्क। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को पराक्रम, ऊर्जा, साहस और क्रोध का प्रतीक माना जाता है। लेकिन जब यही मंगल कुंडली में अशुभ स्थान पर विराजमान हो जाता है, तो व्यक्ति को विवाह, संबंध, स्वास्थ्य और करियर से जुड़ी अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसे ही मंगल दोष कहा जाता है।

मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति को बार-बार रिश्तों में विघ्न, वैवाहिक जीवन में कलह, और कई बार विवाह में देरी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, ज्योतिषीय उपायों के माध्यम से इस दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इनमें से एक सरल और प्राकृतिक उपाय है, कुछ विशेष पौधों को घर में लगाना।

1. तुलसी

तुलसी को सनातन धर्म में मां लक्ष्मी का स्वरूप और अत्यंत पवित्र माना गया है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि तुलसी का पौधा मंगल दोष को शांत करने में भी सहायक होता है। यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है और वैवाहिक जीवन में सौहार्द बनाए रखता है। रोज़ सुबह तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।

2. श्वेत आक 

श्वेत आक का पौधा मंगल ग्रह से संबंधित माना जाता है और इसके पूजा-पाठ से मंगल के क्रोध को शांत किया जा सकता है। यह पौधा विशेष रूप से मंगलवार के दिन लगाया जाता है और शिव को अर्पित करने पर शुभ फल देता है। मंगलवार को श्वेत आक का पौधा घर के उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं और शिवलिंग पर इसके फूल चढ़ाएं।

3. केवड़ा 

केवड़ा का पौधा कम चर्चित होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यह पौधा घर में मंगल ग्रह के दोष को संतुलित करता है और क्रोध व चिड़चिड़ेपन को कम करने में सहायक होता है। इसकी सुगंध वातावरण को शांत करती है। घर के बगीचे या छत पर इसे उगाएं और प्रति मंगलवार इसके समीप दीपक जलाएं।

आज है राधा अष्टमी, इन 5 राशियों पर होगी प्रेम की बारिश!

धर्म डेस्क। राधा अष्टमी का पर्व भक्ति, प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। यह दिन श्री राधारानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त और प्रेमिका मानी जाती हैं। राधा अष्टमी के दिन प्रेम का विशेष प्रभाव सभी राशियों पर पड़ता है, लेकिन ज्योतिष के अनुसार इस बार की राधा अष्टमी पर पांच राशियों पर प्रेम की वर्षा होने वाली है।

1. वृषभ राशि 

वृषभ राशि के जातकों के लिए राधा अष्टमी का दिन प्रेम से भरपूर रहेगा। अगर आप किसी से अपने दिल की बात कहने की योजना बना रहे हैं, तो यह सबसे शुभ समय है। दांपत्य जीवन में मिठास बढ़ेगी और पुराने मतभेद दूर होंगे। सिंगल लोगों को कोई खास व्यक्ति मिल सकता है।

2. कर्क राशि 

कर्क राशि के लोगों के लिए आज का दिन भावनात्मक रूप से बहुत सकारात्मक रहेगा। प्रेम संबंधों में नई ऊर्जा का संचार होगा। साथी के साथ मनमुटाव दूर होंगे और एक नई शुरुआत की संभावना बन रही है। विवाह योग्य लोगों को रिश्ते की बात आगे बढ़ सकती है।

3. सिंह राशि

सिंह राशि के जातकों को आज अपने रिश्ते में उत्साह और रोमांच महसूस होगा। पुराने रिश्ते फिर से जुड़ सकते हैं या किसी पुराने मित्र से प्रेम संबंध की शुरुआत हो सकती है। राधा-कृष्ण की कृपा से रिश्तों में स्थायित्व आएगा और आपसी समझ भी बेहतर होगी।

4. तुला राशि

तुला राशि प्रेम और संतुलन की राशि मानी जाती है और राधा अष्टमी के दिन इसका प्रभाव और बढ़ जाएगा। आपका आकर्षण बढ़ेगा और आप किसी को अपनी ओर आकर्षित करने में सफल हो सकते हैं। विवाहित जातकों के बीच गहराई और समझ बढ़ेगी।

5. मीन राशि

मीन राशि के जातक स्वभाव से बेहद भावुक होते हैं, और इस राधा अष्टमी पर उनका प्रेम जीवन खिल उठेगा। किसी से प्रेम प्रस्ताव मिलने की संभावना है या आप खुद किसी को प्रपोज कर सकते हैं। पुराने संबंधों में चल रही गलतफहमियाँ दूर होंगी।

बिहार के लिए सुनहरा दौर शुरू: एक महीने में 10 बड़ी घोषणाएं!

पटना। बिहार के लिए यह समय कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक के बाद एक 10 बड़ी घोषणाएं कर राज्यवासियों को राहत और उम्मीद दोनों दी हैं। इन घोषणाओं में गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं, शिक्षाकर्मियों से लेकर पत्रकारों तक के लिए योजनाएं और आर्थिक लाभ शामिल हैं। ये कदम राज्य के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक ढांचे को सशक्त करने की दिशा में एक बड़ा संकेत माने जा रहे हैं।

1. मिड डे मील रसोइयों का मानदेय दोगुना

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मियों की मेहनत को सराहते हुए मिड डे मील योजना में काम करने वाली रसोइयों का मानदेय ₹1650 से बढ़ाकर ₹3300 कर दिया है। इसके साथ ही फिजिकल टीचर्स को अब ₹8000 की जगह ₹16000 और नाइट गार्ड को ₹5000 की जगह ₹10000 प्रतिमाह मिलेगा।

2. 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 1 अगस्त 2025 से बिहार के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। यह फैसला गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगा। इससे आम जनता की मासिक आय पर बोझ कम होगा और ऊर्जा तक पहुंच और भी आसान होगी।

3. किसान सलाहकारों का मानदेय बढ़ा

किसानों को तकनीकी सहायता देने वाले किसान सलाहकारों का मासिक मानदेय ₹13,000 से बढ़ाकर ₹21,000 कर दिया गया है। यह कदम राज्य में कृषि सुधारों को गति देने और किसानों को सशक्त करने की दिशा में उठाया गया है।

4. आशा कार्यकर्ताओं को अब ₹3,000 मानदेय

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को अब पहले के ₹1,000 की जगह ₹3,000 प्रतिमाह मिलेगा। यह फैसला उन्हें सामाजिक सुरक्षा और सम्मान देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

5. सरकारी नौकरियों में बिहार की महिलाओं को 35% आरक्षण

अब से बिहार की मूल निवासी महिलाओं को ही सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण का लाभ मिलेगा। पहले अन्य राज्यों की महिलाएं भी इसका फायदा उठा सकती थीं, लेकिन अब यह लाभ केवल बिहार की महिलाओं के लिए सुरक्षित होगा, जिससे राज्य की महिलाओं को अधिक अवसर मिलेंगे।

6. पत्रकारों के लिए पेंशन योजना में बड़ा बदलाव

पत्रकारों के लिए पेंशन राशि ₹6000 से बढ़ाकर ₹15000 कर दी गई है। इसके अलावा, मृत पत्रकारों के आश्रितों को अब ₹10000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह कदम राज्य में स्वतंत्र पत्रकारिता और उनके सामाजिक कल्याण के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

7. 1 लाख युवाओं को इंटर्नशिप और प्रशिक्षण

राज्य सरकार ने घोषणा की है कि 1 लाख युवाओं को हर महीने ₹4000 से ₹6000 की राशि के साथ इंटर्नशिप और व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए कुल ₹686 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। यह योजना युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में मदद करेगी।

8. मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना शुरू

महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने "मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना" की शुरुआत की है। इस योजना के तहत हर घर की एक महिला को उद्यमी बनाया जाएगा।

9. 10,000 रुपये की पहली किस्त, बाद में 2 लाख की सहायता

"मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना" के तहत शुरुआत में महिलाओं को ₹10,000 की पहली किस्त दी जाएगी। इसके 6 महीने बाद उनके कार्य के आंकलन के आधार पर उन्हें ₹2 लाख की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, जिससे वे अपना व्यवसाय आगे बढ़ा सकें।

10. समाज के हर वर्ग को राहत और विकास की गारंटी

इन सभी घोषणाओं को मिलाकर देखा जाए, तो यह स्पष्ट है कि सरकार ने समाज के हर वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, महिला, किसान, युवा, पत्रकार और श्रमिक को ध्यान में रखते हुए योजनाएं लागू की हैं। इससे बिहार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक संरचना दोनों को मजबूती मिलेगी।

बिहार में 'मैट्रिक' पास के लिए नौकरियों की आंधी!

पटना: बिहार में सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे मैट्रिक पास युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) ने ऑफिस अटेंडेंट के 3727 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। यह भर्तियाँ पूर्णकालिक (Full-time) आधार पर की जाएंगी और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति बिहार राज्य में की जाएगी।

योग्यता एवं आयु सीमा

इस पद के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का मैट्रिकुलेशन/10वीं पास या समकक्ष होना अनिवार्य है। आवेदन करने की अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षण से संबंधित आयु में छूट नियमानुसार प्रदान की जाएगी।

वेतनमान

इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों को लेवल-1 के अनुसार प्रतिमाह वेतन प्रदान किया जाएगा, जो राज्य सरकार के नियमानुसार तय होगा।

चयन प्रक्रिया

अभ्यर्थियों का चयन परीक्षा, दस्तावेज़ सत्यापन एवं चिकित्सा परीक्षण के आधार पर किया जाएगा। चयन पूरी तरह से मेरिट आधारित होगा।

आवेदन शुल्क

सामान्य / बीसी / ईबीसी (बिहार निवासी पुरुष) के लिए ₹540/-, एससी / एसटी / दिव्यांग (केवल बिहार निवासी) के लिए ₹135/-, सभी महिला उम्मीदवार (केवल बिहार निवासी) के लिए ₹135/-, बिहार राज्य के बाहर के सभी उम्मीदवार के लिए ₹540/-

आवेदन प्रक्रिया

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। इच्छुक अभ्यर्थी bssc.bihar.gov.in वेबसाइट पर जाकर आवेदन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 26 सितंबर 2025 है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि: 26 सितंबर 2025

स्नातक वालों की बल्ले-बल्ले: यूपी में नौकरियों की आई धूम!

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका सामने आया है। उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने सब-इंस्पेक्टर (Sub Inspector) के 4543 पदों पर बंपर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह भर्ती स्नातक उत्तीर्ण (Any Graduate) उम्मीदवारों के लिए है और इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

योग्यता और आयु सीमा

आवेदन के लिए शैक्षणिक योग्यता किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक डिग्री होना चाहिए। वहीं, आयु सीमा न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 28 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों के लिए आयु में छूट सरकारी नियमों के अनुसार दी जाएगी।

आवेदन शुल्क

सामान्य / ईडब्ल्यूएस / ईबीसी के लिए आवेदन शुल्क ₹500/-, अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लिए ₹400/- निर्धारित किया गया हैं। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा।

चयन प्रक्रिया

चयन लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET), शारीरिक माप परीक्षण (PMT), दस्तावेज़ सत्यापन, और चिकित्सा परीक्षण के माध्यम से किया जाएगा। चयन प्रक्रिया पारदर्शी और मेरिट आधारित होगी।

कैसे करें आवेदन?

उम्मीदवारों को आवेदन ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। आवेदन भरने के लिए आधिकारिक वेबसाइट uppbpb.gov.in पर जाएं और दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए आवेदन फॉर्म भरें।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

आवेदन की अंतिम तिथि: 11 सितंबर 2025

दुनिया के टॉप-5 एयर-टू-एयर मिसाइलें, जानकर चौंक जाएंगे!

न्यूज डेस्क। आज के समय में कई देशों के बीच तनाव और टकराव की स्थिति गहराती जा रही है। इस बदलते परिदृश्य में आधुनिक युद्धक तकनीकों और हथियारों की होड़ मच चुकी है। खासकर एयर-टू-एयर मिसाइलें  जो हवा में उड़ते दुश्मन विमानों को सेकंडों में ढेर कर सकती हैं। आज की युद्धनीति में बेहद अहम भूमिका निभा रही हैं। यहां हम बात कर रहे हैं उन टॉप-5 एयर-टू-एयर मिसाइलों की, जो आज के दौर की सबसे खतरनाक और एडवांस टेक्नोलॉजी से लैस हथियार मानी जाती हैं।

1. AIM-54 फीनिक्स (AIM-54 Phoenix)

अमेरिका द्वारा विकसित यह मिसाइल दुनिया की पहली लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक है। AIM-54 फीनिक्स को विशेष रूप से अमेरिकी नौसेना के लिए तैयार किया गया था। इसकी खास बात यह है कि यह अपनी खुद की रडार प्रणाली से टारगेट को खोज सकती है और उस पर हमला कर सकती है।

रेंज: लगभग 190–200 किलोमीटर

2. MBDA मिटियोर (Meteor)

यूरोप की रक्षा कंपनी MBDA द्वारा विकसित ‘मिटियोर’ एक आधुनिक ‘बियॉन्ड विजुअल रेंज’ मिसाइल है, जो हवा में दुश्मन को बिना दिखाई दिए भी निशाना बना सकती है। भारत ने इसे अपने राफेल फाइटर जेट्स में शामिल किया है, जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत में जबरदस्त इज़ाफा हुआ है।

रेंज: 200–250 किलोमीटर

गति: मैक 4 (ध्वनि से 4 गुना तेज़)

3. PL-15 (चीन)

चीन की यह मिसाइल तकनीकी रूप से बेहद एडवांस मानी जाती है। PL-15 को अमेरिकी AIM-120 के जवाब में विकसित किया गया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका एक्टिव रडार होमिंग सिस्टम, जो टारगेट पर लॉक करने की क्षमता को काफी बढ़ा देता है।

रेंज: 250 किलोमीटर (एक्सपोर्ट वर्ज़न की रेंज 150 किमी)

4. R-37M (रूस)

रूस की यह मिसाइल एक असली "लॉन्ग रेंज किलर" है। R-37M को विशेष रूप से बड़े टारगेट्स जैसे कि AWACS, टैंकर या क्रूज मिसाइल ले जाने वाले विमानों को खत्म करने के लिए बनाया गया है। यह दुनिया की सबसे तेज़ एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक है।

रेंज: 300+ किलोमीटर

गति: मैक 6 (ध्वनि से 6 गुना तेज़)

5. AIM-120 AMRAAM (America)

हालांकि यह मिसाइल सूची में टॉप पर नहीं है, फिर भी AIM-120 AMRAAM दुनिया की सबसे ज्यादा उपयोग की जाने वाली और भरोसेमंद मिसाइलों में गिनी जाती है। इसे अमेरिका और उसके कई सहयोगी देश अपने फाइटर जेट्स में इस्तेमाल करते हैं।

रेंज: 160–180 किलोमीटर (वर्जन के अनुसार)

यूपी में एक और एक्सप्रेस-वे, इन जिलों की बदलेगी किस्मत!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक और बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट आकार ले रहा है। राज्य सरकार प्रतापगढ़ और अयोध्या के बीच एक नए छह लेन एक्सप्रेस-वे के निर्माण की योजना पर तेजी से काम कर रही है। यह परियोजना न केवल इन दो जिलों को आपस में जोड़ेगी, बल्कि पूरे पूर्वांचल क्षेत्र के विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

10 से 12 हजार करोड़ रुपये का अनुमानित बजट

इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 10 से 12 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है। जैसे ही इसे स्वीकृति मिलेगी, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह निवेश न केवल सड़क निर्माण तक सीमित रहेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा।

व्यापार, निवेश और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेस-वे के जरिए सड़क संपर्क बेहतर होने से व्यापारियों को परिवहन में सुविधा मिलेगी, जिससे लागत घटेगी और व्यापार बढ़ेगा। वहीं पर्यटन स्थलों तक आसान पहुंच पर्यटन उद्योग को नया जीवन दे सकती है। निवेशकों के लिए भी बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर एक बड़ा आकर्षण बनेगा।

चौड़ी भूमि और सर्विस रोड की योजना

इस परियोजना के लिए 60 से 80 मीटर चौड़ी भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। मुख्य सड़क के दोनों ओर सर्विस रोड भी बनेंगी, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इससे मुख्य हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की संभावना है।

ओवरब्रिज और बड़े पुलों का निर्माण

93 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर चार रेलवे ओवरब्रिज और तीन बड़े पुल प्रस्तावित हैं। इनमें प्रतापगढ़ और सुलतानपुर में बनने वाले ओवरब्रिज शामिल हैं। इसके अलावा सई, गोमती और शारदा नहर पर बनने वाले पुल इस परियोजना को इंजीनियरिंग की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाते हैं।

67 गांव होंगे सीधे लाभान्वित

एक्सप्रेस-वे का मार्ग प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के कुल 67 गांवों से होकर गुजरेगा। इससे इन ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी सुविधाओं से जोड़ना आसान होगा। स्थानीय निवासियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और उनकी जीवनशैली में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

डीपीआर का कार्य प्रगति पर

वर्तमान में परियोजना की मैपिंग और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। दिल्ली स्थित कंसल्टेंट कंपनी टीएएसपीएल इस कार्य को अंजाम दे रही है। डीपीआर तैयार होने के बाद इसे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

बवासीर की जड़ पर वार: 4 घरेलू नुस्खे कर देंगे खत्म

हेल्थ डेस्क। बवासीर एक आम लेकिन बेहद पीड़ादायक समस्या है, जिससे लाखों लोग जूझ रहे हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है जब मलद्वार (गुदा) की नसों में सूजन आ जाती है, जिससे दर्द, जलन और कभी-कभी रक्तस्राव भी होता है। आमतौर पर यह समस्या गलत खानपान, कब्ज और लंबे समय तक बैठे रहने से बढ़ती है।

हालांकि बाजार में कई प्रकार की दवाएं और क्रीम उपलब्ध हैं, लेकिन कई बार घरेलू उपचार अधिक प्रभावशाली साबित होते हैं। आइए जानें ऐसे चार घरेलू नुस्खे जो बवासीर की जड़ पर वार करते हैं और राहत दिलाते हैं, इससे बवासीर की समस्या ठीक होती हैं।

1. त्रिफला चूर्ण 

त्रिफला एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो कब्ज को दूर करने में बेहद प्रभावी मानी जाती है। रोज रात को सोने से पहले एक चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट साफ रहता है और बवासीर की सूजन में राहत मिलती है।

2. सिट्ज बाथ

सिट्ज बाथ यानी गुनगुने पानी में बैठना बवासीर के लिए एक आसान और तुरंत राहत देने वाला उपाय है। इसमें एक टब में गर्म पानी लेकर दिन में दो बार 10–15 मिनट बैठना चाहिए। इससे दर्द और सूजन में आराम मिलता है और रक्त संचार बेहतर होता है।

3. एलोवेरा जेल

एलोवेरा अपनी एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाली) और ठंडक देने वाली प्रकृति के लिए जाना जाता है। एलोवेरा जेल को सीधे प्रभावित स्थान पर लगाने से जलन और खुजली में तुरंत राहत मिलती है। यह न केवल दर्द को कम करता है बल्कि घाव को भरने में भी सहायक है।

4. फाइबर युक्त भोजन

बवासीर की समस्या जड़ से खत्म करने के लिए खाने में बदलाव सबसे अहम है। आहार में फाइबर युक्त चीजें जैसे कि दलिया, साबुत अनाज, हरी सब्जियाँ और फल शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी उतना ही जरूरी है, ताकि मल नरम रहे और दबाव कम पड़े।

8वें वेतन आयोग: रिटायर कर्मचारियों को होंगे 7 बड़े फायदे?

नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग केंद्र सरकार के 68 लाख पेंशनभोगियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकती है। हालांकि अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है, इसलिए रिटायर कर्मचारियों के लिए मिलने वाले फायदों की पुष्टि करना जल्दबाजी होगी। लेकिन विशेषज्ञ और पेंशनभोगी आशा कर रहे हैं कि इस आयोग के लागू होने पर वेतन और पेंशन में कई बड़े सुधार होंगे, जो उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाएंगे।

1. बढ़ी हुई पेंशन और महंगाई भत्ता (DA)

8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत पेंशन की बेसिक राशि बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही महंगाई भत्ता भी नए बेसिक पेंशन के अनुपात में मिलेगा, जिससे कुल पेंशन में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। इससे रिटायर कर्मचारियों को महंगाई के प्रभाव से बचाने में मदद मिलेगी।

2. महंगाई भत्ते (DA) का वेतन में विलय

एक बड़ी मांग यह भी है कि डियरनेस अलाउंस को मूल वेतन में मर्ज किया जाए। इससे पेंशन की गणना भी ज्यादा लाभकारी होगी और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में अचानक बड़ा उछाल आएगा। यह कदम पेंशनभोगियों के लिए वित्तीय स्थिरता का कारण बन सकता है।

3. कम समय में पेंशन और रिटायरमेंट लाभ

रिटायर कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की मांग है कि पेंशन, पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य रिटायरमेंट लाभ जल्द से जल्द और कम समय में भुगतान किए जाएं। इससे आर्थिक सुरक्षा और राहत मिलेगी, खासकर उन परिवारों को जिनके मुखिया हाल ही में रिटायर हुए हों या उनका निधन हो चुका हो।

4. Commuted Pension की अवधि में कमी

वर्तमान में Commuted Pension की अवधि 15 साल है, पर नई सिफारिशों के अनुसार इसे 12 साल में कम किया जा सकता है। इसका मतलब है कि पेंशनभोगी जल्दी से अपनी पूरी पेंशन प्राप्त कर सकेंगे, जो उनकी आर्थिक जरूरतों के लिए फायदेमंद होगा।

5. हर 5 साल में पेंशन में वृद्धि की मांग

संसद की समिति ने सुझाव दिया है कि पेंशन में हर 5 साल पर बढ़ोतरी की जाए। इससे रिटायर कर्मचारियों की आमदनी नियमित रूप से बढ़ती रहेगी और महंगाई का प्रभाव कम होगा। यह व्यवस्था पेंशनभोगियों को दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगी।

6. व्यापक लाभों का विस्तार

8वें वेतन आयोग के लागू होने से केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि ग्रेच्युटी, चिकित्सा भत्ते, और अन्य रिटायरमेंट लाभों में भी सुधार की उम्मीद है। इससे रिटायर कर्मचारियों के लिए संपूर्ण लाभ पैकेज बेहतर होगा।

7. लागू होने में लगने वाला समय

हालांकि सरकार ने 8वें वेतन आयोग की घोषणा कर दी है, इसे लागू होने में लगभग 18-24 महीने का समय लग सकता है। 7वें वेतन आयोग की अवधि जनवरी 2026 में समाप्त हो रही है। नए आयोग लागू होने पर केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए वित्तीय सुधार लेकर आएगा।

भाग्य का दरवाज़ा खुलेगा: ग्रह-दोष से निकलेंगी ये 4 राशियां

धर्म डेस्क। लंबे समय से ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव का सामना कर रही कुछ राशियों के लिए अब अच्छी खबर है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की चाल में बड़ा परिवर्तन हो रहा है, जिससे चार प्रमुख राशियों पर मंडरा रहा ग्रह-दोष अब समाप्त होने की कगार पर है। इन राशियों को जहां अब तक संघर्ष, मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था, वहीं अब उनका भाग्य पूरी तरह से पलट सकता है।

कौन सी हैं वे चार राशियां जिनकी चमकेगी किस्मत?

1. कर्क राशि: 

कर्क राशि वालों के लिए यह समय नई ऊर्जा लेकर आ रहा है। शनि की दृष्टि हटने से मानसिक दबाव कम होगा और पारिवारिक जीवन में शांति लौटेगी। रुके हुए काम पूरे होंगे और नौकरी में तरक्की के योग बन रहे हैं।

2. तुला राशि: 

तुला राशि के जातक जो काफी समय से आर्थिक परेशानियों और वैवाहिक जीवन में तनाव से जूझ रहे थे, अब उन्हें ग्रहों की शुभता का लाभ मिलेगा। बृहस्पति की कृपा से धन आगमन के नए स्रोत खुलेंगे और निवेश में लाभ होगा।

3. धनु राशि:

धनु राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण अब समाप्त हो रहा है। इसका सीधा असर करियर और स्वास्थ्य पर पड़ेगा। प्रमोशन, स्थानांतरण और विदेश यात्रा के योग बन रहे हैं। विद्यार्थी वर्ग को भी विशेष सफलता मिलने की संभावना है।

4. मीन राशि:

मीन राशि वालों के लिए राहु का प्रभाव कम होने जा रहा है, जिससे मानसिक अशांति और निर्णय लेने की भ्रमित स्थिति दूर होगी। जीवन में स्थिरता आएगी और नई शुरुआत का समय है। व्यापार में लाभ, साझेदारी में सफलता और पारिवारिक सहयोग मिलेगा।

रविवार को दे सूर्य देव को अर्घ्य: जीवन में आएगी सुख-शांति

धर्म डेस्क। रविवार का दिन विशेष रूप से सूर्य पूजा और अर्घ्य अर्पित करने के लिए अत्यधिक शुभ माना जाता है। भारतीय संस्कृति में सूर्य को जीवन के मूल स्त्रोत और समस्त ऊर्जा के कारक के रूप में पूजा जाता है। सूर्य देव की उपासना से न केवल शारीरिक बल और स्वास्थ्य मिलता है, बल्कि मानसिक शांति और समृद्धि भी प्राप्त होती है।

रविवार को सूर्य देव को अर्घ्य देने का महत्व

रविवार को सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना विशेष रूप से शुभ और लाभकारी माना जाता है। यह दिन सूर्य देव को समर्पित होता है, और इस दिन अर्घ्य देने से उनके साथ साथ अन्य ग्रहों की अशुभ स्थितियों का निवारण भी होता है।अर्घ्य देने के लिए ताजे जल और लाल फूलों का उपयोग किया जाता है।

सूर्य पूजा और उसके लाभ

1 .स्वास्थ्य में सुधार: सूर्य देव की पूजा से शारीरिक बल बढ़ता है। रविवार को सूर्य को अर्घ्य देने से रक्त संचार में सुधार होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है और स्वास्थ्य बेहतर होता है।

2 .दुरभाग्य से मुक्ति: सूर्य देव की उपासना से न केवल व्यक्ति का जीवन संवरता है, बल्कि ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति मिलती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है, जिनके जीवन में विघ्न आ रहे हैं या आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

3 .सकारात्मकता का संचार: यह दिन खासकर मानसिक शांति और सकारात्मकता प्राप्त करने के लिए उपयुक्त है। सूर्य देव की उपासना से मानसिक तनाव दूर होता है और व्यक्ति जीवन में मानसिक बल प्राप्त करता है।

4 .व्यक्तिगत और पारिवारिक सुख: सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने से पारिवारिक रिश्तों में मधुरता आती है। यह उपाय जीवन में समृद्धि, सफलता और संतुलन लाने में सहायक होता है।

किस प्रकार करें अर्घ्य

रविवार को सूर्य को अर्घ्य देने के लिए सबसे पहले सूर्यास्त से पूर्व स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें। फिर, एक पात्र में पानी भरकर उसमें तिल, गुड़, चावल और लाल फूल डालें। इसके बाद सूर्य देव का ध्यान करते हुए, हाथ में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और उनके नाम का जाप करें। "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ आदित्याय नमः" का जाप करना विशेष लाभकारी माना जाता है।

केंद्रीय कर्मचारी होंगे खुशहाल, 8वें वेतन आयोग से मिलेंगे 10 बड़े लाभ!

नई दिल्ली। केंद्रीय सरकार द्वारा गठित होने वाली 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें, जनवरी 2026 से लागू हो सकती हैं। यह आयोग कर्मचारियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य लाभों में सुधार हो सकता हैं, जिससे कर्मचारियों के आर्थिक हालात बेहतर होगा। 

1. वेतन में वृद्धि:

8वें वेतन आयोग के अंतर्गत केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में महत्वपूर्ण वृद्धि की संभावना है। यह वृद्धि कर्मचारियों के मौजूदा वेतन में एक अच्छी खासी बढ़ोतरी कर सकती है, जिससे उनकी जीवनस्तर में सुधार होगा।

2. कर्मचारियों की मांगें:

कर्मचारी संगठन महंगाई और बढ़ती लागत को देखते हुए 2.86 जैसे उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार के सामने राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की चुनौती है. 

3. फि‍गमेंट फैक्टर:

8वें वेतन आयोग के लिए फि‍गमेंट फैक्टर 1.83 से 2.86 के बीच होने का अनुमान है, जिसमें विभिन्न रिपोर्टें अलग-अलग आंकड़े सुझा रही हैं।

4.  पेंशन में वृद्धि:

आपको बता दें की यह आयोग लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों के लिए पेंशन लाभों की भी समीक्षा करेगा और उनमें वृद्धि करेगा। 

5. स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार:

स्वास्थ्य योजनाओं के तहत केंद्रीय कर्मचारियों को बेहतर चिकित्सा लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।

6. घर भत्ता और आवास सुविधा:

कर्मचारियों को आवास भत्ता और अन्य घर संबंधी सुविधाओं में वृद्धि होने की संभावना है। इससे कर्मचारियों को अपने घर के खर्चों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

7. कर्मचारी कल्याण योजनाओं में वृद्धि:

8वें वेतन आयोग के तहत कर्मचारियों के लिए कल्याण योजनाओं में वृद्धि की सिफारिश की जा सकती है, जो उनके कामकाजी जीवन को और भी आरामदायक बनाएगी। इसमें शिक्षा, सुरक्षा, और अन्य कल्याणकारी सेवाओं का विस्तार किया जा सकता है।

8. वर्क-लाइफ बैलेंस में सुधार:

कर्मचारियों के कामकाजी समय में सुधार और वर्क-लाइफ बैलेंस को ध्यान में रखते हुए नई नीतियां लागू हो सकती हैं। इससे कर्मचारियों को अपने निजी जीवन को बेहतर तरीके से प्रबंधित करने का अवसर मिलेगा।

9. बेहतर प्रमोशन और पदोन्नति की नीतियां:

प्रमोशन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मचारियों को जल्दी पदोन्नति मिलने की संभावना है। 8वें वेतन आयोग में कर्मचारी प्रमोशन और कैरियर ग्रोथ से संबंधित नए दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।

10. श्रमिक अधिकारों का संरक्षण:

कर्मचारियों के श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत किया जा सकता है। इससे कर्मचारियों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के बारे में स्पष्टता मिलेगी और कार्यस्थल पर उनके हितों की रक्षा होगी।

यूपी में 'खतौनी' के अंश निर्धारण में त्रुटि करें दूर!

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों को अपनी खतौनी में त्रुटियों का सामना अक्सर करना पड़ता है, खासकर जब नाम, भूमि क्षेत्रफल या अन्य जानकारी गलत दर्ज हो जाती है। यह न केवल प्रशासनिक परेशानियाँ उत्पन्न करता है, बल्कि किसानों को अपनी जमीन से संबंधित कानूनी मामलों में भी दिक्कतें आ सकती हैं। अब, यूपी सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत खतौनी के अंश निर्धारण में त्रुटियाँ ऑनलाइन ठीक की जा सकेंगी।

नई व्यवस्था का उद्देश्य और कार्यप्रणाली

राजस्व परिषद ने इस नई व्यवस्था के तहत किसानों को यह सुविधा दी है कि वे सीधे जन सेवा केंद्रों से राजस्व परिषद की वेबसाइट पर जाकर अपनी खतौनी की त्रुटियों को सुधार सकते हैं। वे ऑनलाइन आवेदन करके अपनी समस्याओं का हल पा सकते हैं। यह व्यवस्था भूमि विवादों को हल करने और किसानों को डिजिटल भारत से जोड़ने के दृष्टिकोण से बेहद अहम है।

कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम?

इस प्रणाली में लेखपाल पहले अपने स्तर पर मामले की जांच करेंगे। अगर कोई त्रुटि पाई जाती है, तो वे उस मामले को पोर्टल पर दर्ज करेंगे। इसके बाद लेखपाल, सह-खातेदारों से सहमति प्राप्त करेंगे, और फिर राजस्व निरीक्षक तथा तहसीलदार की जांच के बाद खतौनी में सुधार किया जाएगा। इस प्रक्रिया के दौरान सभी संबंधित दस्तावेज़ों की जांच भी की जाएगी, जिससे भूमि से जुड़ी सभी जानकारी सही हो सके और किसानों को उनके अधिकार मिल सकें।

ऑनलाइन आवेदन के लिए वेबसाइट

खतौनी के अंश निर्धारण की त्रुटियों को ऑनलाइन ठीक करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक वेबसाइट upbhulekh.gov.in पर जाएं और "राजस्व भूमि से संबंधित जानकारी" सेक्शन में जाकर ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया का पालन करें। 

4 नट्स, आपके शरीर को देंगे ताकत और स्टैमिना!

हेल्थ डेस्क। हमारे शरीर को दिन-प्रतिदिन की ऊर्जा और स्टैमिना की आवश्यकता होती है, ताकि हम अपनी व्यस्त जीवनशैली को सुचारू रूप से चला सकें। इसके लिए हमें संतुलित आहार की जरूरत होती है, जो न केवल हमारे शरीर को पोषण प्रदान करता है, बल्कि हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को भी सशक्त बनाता है। इसी संदर्भ में नट्स एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

1. अखरोट

अखरोट में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, एंटीऑक्सिडेंट्स, और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है, जो मांसपेशियों की मजबूती और हृदय स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। अखरोट शरीर को अंदर से ताकत देता है और लम्बे समय तक ऊर्जा बनाए रखता है। नियमित रूप से अखरोट खाने से शरीर को बेहतर स्टैमिना मिलता है, जो शारीरिक गतिविधियों में सहायक हो सकता है।

2. बादाम

बादाम एक ऐसा नट है, जिसे हर आयु वर्ग के लोग खा सकते हैं। इसमें विटामिन E, मैग्नीशियम, और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा प्रदान करते हैं। बादाम का सेवन मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों की सेहत, और मानसिक ताकत के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

3. काजू

काजू, जिसमें मैग्नीशियम, आयरन, और जिंक की प्रचुर मात्रा होती है, शरीर को ऊर्जा देने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक है। काजू में मौजूद विटामिन B, शरीर की मांसपेशियों को ऊर्जावान बनाए रखते हैं और स्टैमिना बढ़ाने में मदद करते हैं। काजू का नियमित सेवन रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है और शारीरिक श्रम के दौरान थकान को कम करता है। 

4. पिस्ता

पिस्ता में प्रोटीन, फाइबर और विटामिन B6 की भरपूर मात्रा होती है, जो शरीर को मजबूत और सक्रिय बनाए रखता है। यह नट विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है, जो नियमित व्यायाम करते हैं या शारीरिक मेहनत करते हैं। पिस्ते का सेवन शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है और थकान को दूर करता है। इसके अलावा, पिस्ता में उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट्स शरीर की मांसपेशियों की रिकवरी को तेज करते हैं और मेटाबोलिज्म को बढ़ावा देते हैं।

रोज़ अंजीर खाएं, शरीर को 8 बीमारियों से बचाएं!

हेल्थ डेस्क। अंजीर एक ऐसा फल है जो स्वाद और सेहत दोनों के मामले में खास है। यह छोटा सा फल हमारे शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है और इसके नियमित सेवन से हम कई बीमारियों से बच सकते हैं। आइए जानते हैं कि रोज़ अंजीर खाने से कौन-कौन सी 8 बीमारियाँ दूर हो सकती हैं।

1. हृदय रोग

अंजीर में पोटेशियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो दिल की सेहत के लिए अत्यधिक फायदेमंद हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करता है, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और हृदय की धमनियों को स्वस्थ रखता है, जिससे हृदय रोगों का जोखिम कम होता है।

2. पाचन समस्या

अंजीर में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को सही बनाए रखता है। यह कब्ज, गैस, अपच और पेट की अन्य समस्याओं से राहत दिलाता है। रोज़ अंजीर खाने से आंतों की सफाई होती है और भोजन को पचाने में आसानी होती है।

3. अस्थि रोग

अंजीर कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। इससे अस्थि रोगों, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस, से बचाव होता है और हड्डियों की सेहत बनी रहती है।

4. वजन घटाने में मदद

अंजीर में फाइबर और पानी की भरपूर मात्रा होती है, जो लंबे समय तक तृप्ति का एहसास दिलाती है। यह ओवरईटिंग को रोकता है और मेटाबॉलिज़्म को तेज करता है, जिससे वजन घटाने में मदद मिलती है।

5. त्वचा की देखभाल

अंजीर में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो त्वचा को हाइड्रेट करने के साथ-साथ झुर्रियों और अन्य उम्र से जुड़ी समस्याओं से बचाते हैं। यह त्वचा को नमी देता है और उसे मुलायम व चमकदार बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से मुंहासे और त्वचा के दाग-धब्बे भी कम हो सकते हैं।

6. कैंसर से बचाव

अंजीर में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स होते हैं, जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं। यह शरीर की कोशिकाओं को क्षति से बचाता है और कैंसर सेल्स के विकास को रोकता है।

7. मूड और मानसिक स्वास्थ्य

अंजीर में सेरोटोनिन और अन्य तंत्रिका तंतुओं के लिए आवश्यक तत्व होते हैं, जो मानसिक शांति और खुशहाली को बढ़ावा देते हैं। यह तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक होता है और मानसिक स्थिति को बेहतर बनाए रखता है।

8. इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाना

अंजीर में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ाते हैं। यह सर्दी-खांसी, बुखार और अन्य संक्रमणों से बचाव करने में मदद करता है।

भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) में 25 पदों पर भर्ती

मुंबई: भारतीय पैकेजिंग संस्थान (Indian Institute of Packaging, IIP) ने विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 25 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इच्छुक उम्मीदवार ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 24 सितंबर 2025 है।

रिक्त पदों की संख्या और कार्यक्षेत्र:

इन पदों में क्लर्क, जूनियर असिस्टेंट, असिस्टेंट डायरेक्टर, तकनीकी सहायक, और अन्य प्रशासनिक पद शामिल हैं। उम्मीदवारों का चयन मैरिट एवं साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को महाराष्ट्र में नियुक्ति दी जाएगी।

शैक्षणिक योग्यता:

पदों के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता अलग-अलग है। इसी तरह अन्य पदों के लिए भी संबंधित तकनीकी या प्रशासनिक क्षेत्रों में उच्च शैक्षणिक योग्यता और अनुभव की आवश्यकता है। पूरी जानकारी नोटिश से प्राप्त करें।

सैलरी:

चयनित उम्मीदवारों को INR 34,800 से लेकर INR 1,77,500 तक प्रति माह सैलरी मिलेगी, जो पद के अनुसार भिन्न होगी।

आवेदन शुल्क:

सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 1000 रुपये, OBC उम्मीदवारों के लिए 500 रुपये, SC/ST उम्मीदवारों के लिए 250 रुपये रखा गया है।

आवेदन की प्रक्रिया:

उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट www.iip-in.com  पर जाकर आवेदन करना होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 24 सितंबर 2025, अपराह्न 05:00 बजे तक है।

महत्वपूर्ण तिथियाँ:

आवेदन की अंतिम तिथि: 24 सितंबर 2025

सिर्फ 6 देश बना सकते हैं रॉकेट इंजन, भारत अब इनमें एक!

नई दिल्ली। अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रॉकेट इंजन बनाना एक अत्यधिक चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण कार्य है। रॉकेट इंजन वह मुख्य शक्ति है जो रॉकेट को अंतरिक्ष में उड़ाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है। दुनिया में केवल 6 देश हैं, जो इस उच्च-तकनीकी क्षमता को हासिल करने में सक्षम हैं। इनमें भारत भी  शामिल हैं।

1. संयुक्त राज्य अमेरिका

संयुक्त राज्य अमेरिका का नाम रॉकेट इंजन निर्माण में सबसे पहले आता है। नासा (NASA) और अन्य निजी कंपनियां जैसे स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन ने विश्व में सबसे शक्तिशाली और उन्नत रॉकेट इंजन विकसित किए हैं। अमेरिका के रॉकेट इंजन तकनीक में आरएस-25 (RS-25) इंजन सबसे प्रसिद्ध है, जिसे स्पेस शटल कार्यक्रम में इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा, फाल्कन 9 और फाल्कन हेवी रॉकेट इंजन भी स्पेसएक्स द्वारा विकसित किए गए हैं।

2. रूस

रूस का अंतरिक्ष कार्यक्रम भी बहुत पुराना और प्रतिष्ठित है, और रूस ने लंबे समय से रॉकेट इंजन निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाई है। रूस का RD-180 इंजन एक प्रमुख उदाहरण है, जिसे अर्बिटल एटीके द्वारा अमेरिकी रॉकेट कार्यक्रमों में इस्तेमाल किया गया था। सोवियत संघ के दिनों से लेकर आज तक, रूस ने कई रॉकेट इंजन विकसित किए हैं जिनकी विश्व भर में मांग रही है।

3. चीन

चीन ने हाल के दशकों में अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारी निवेश किया है और अब वह रॉकेट इंजन निर्माण के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है। चीन का YF-77 इंजन, जिसे लांग मार्च 3बी रॉकेट में उपयोग किया गया, दुनिया के सबसे प्रभावी रॉकेट इंजन में से एक है। इसके अलावा, YF-100 और YF-115 जैसे इंजन भी चीन के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।

4. जापान

जापान भी रॉकेट इंजन बनाने वाले देशों की सूची में शामिल है, हालांकि वह इसके निर्माण में अन्य प्रमुख देशों से कुछ पीछे है। जापान का LE-7 इंजन जो ह-II रॉकेट में इस्तेमाल होता है, एक बेहतरीन उदाहरण है। जापान का अंतरिक्ष संगठन जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) अपनी तकनीकी श्रेष्ठता के लिए प्रसिद्ध है और उसने रॉकेट इंजन में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं।

5. फ्रांस

फ्रांस का अंतरिक्ष कार्यक्रम बहुत पुराना है और यह रॉकेट इंजन निर्माण में एक प्रमुख देश है। फ्रांस ने Ariane 5 रॉकेट के लिए Vulcain इंजन विकसित किया है, जो यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) द्वारा संचालित किया जाता है। Vulcain 2 इंजन की क्षमता उच्च है और यह कई अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण रहा है।

6. भारत

अब भारत ने भी अपनी तकनीकी क्षमता को साबित कर दिया है और रॉकेट इंजन निर्माण करने वाले देशों में शामिल हो गया है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने एलवीएम-3 (LVM-3) जैसे रॉकेट इंजन विकसित किए हैं, जो चंद्रयान-2 और मार्स ऑर्बिटर मिशन (MOM) जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में इस्तेमाल हुए। ISRO ने स्वदेशी रॉकेट इंजन तकनीक को विकसित करने के लिए कई वर्षों तक मेहनत की है और अब भारत अंतरिक्ष में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम बढ़ा चुका है।

भारत को रूस देगा बमवर्षक, अमेरिका को टेंशन!

नई दिल्ली। रूस ने भारतीय वायुसेना को अपने अत्याधुनिक बॉम्बर विमान TU-160M देने की पेशकश की हैं। यह विमान भारतीय सेना के लिए सिर्फ एक नए विमान की तरह नहीं है, बल्कि इसके आने से भारत की हवाई ताकत में एक गंभीर बदलाव हो सकता है। इसे लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह विमान भारत को एक नई सामरिक क्षमता देगा, जो न केवल चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से मुकाबला करने में सहायक होगी, बल्कि इसे परमाणु और पारंपरिक हमलों की नितांत जरूरतों को भी पूरा करने का अवसर मिलेगा।

TU-160M का परिचय:

रूस के इस सुपरसोनिक बमवर्षक विमान को "व्हाइट स्वान" के नाम से जाना जाता है, जबकि नाटो इसे "ब्लैकजैक" के नाम से संबोधित करता है। इस विमान की तकनीकी विशेषताएँ और उड़ान क्षमता इसे पूरी दुनिया में अनूठा बनाती हैं।

TU-160M बिना रिफ्यूलिंग के लगभग 12,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है। वहीं इस विमान की टॉप स्पीड 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो आवाज की गति से लगभग दो गुना अधिक है। TU-160M में 40 टन तक का पेलोड ले जाने की क्षमता है। इसमें पारंपरिक बमों के अलावा परमाणु हथियार भी शामिल हो सकते हैं।

भारत के लिए क्यों है यह महत्वपूर्ण?

1 .लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता: भारत के पास फिलहाल कोई समर्पित रणनीतिक बमवर्षक विमान नहीं है। अधिकांश लड़ाकू विमानों पर ही लंबी दूरी के हमले की जिम्मेदारी रहती है। TU-160M का जुड़ना भारतीय वायुसेना को एक नई ताकत देगा, जिससे भारत की हवाई हमलावर क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होगी।

2 .मनौवैज्ञानिक दबाव: यह विमान भारत के परमाणु आक्रामक क्षमता को और भी प्रभावी बना सकता है, खासकर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों के खिलाफ। यह उन देशों के लिए मानसिक दबाव का कारण बनेगा, जो भारतीय सीमाओं के पास अपनी सैन्य ताकत को लगातार बढ़ा रहे हैं।

3 .मिशन की विविधता: TU-160M को 'ब्रह्मोस' जैसी शक्तिशाली मिसाइलों से जोड़ने का विचार भी महत्वपूर्ण है। यह न केवल पारंपरिक हमले करने में सक्षम होगा, बल्कि भारतीय सेना को परमाणु हमलों की ताकत भी देगा। यह विमान भारत को एक मजबूत, स्थिर और लचीला सामरिक साधन प्रदान करेगा।

4 .संरचनात्मक बदलाव: भारतीय वायुसेना की संरचना में इस बॉम्बर के जुड़ने से भारतीय सामरिक ताकत में भी बदलाव आएगा। यह बमवर्षक विमान हवाई युद्ध की आधुनिक परिभाषा को एक नया मोड़ देगा, जिसमें लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता और रडार से बचने की तकनीकी विशेषताएँ शामिल होंगी।

रूस और भारत के रिश्तों में और मजबूती

रूस का भारत को TU-160M की पेशकश एक महत्वपूर्ण कदम है, जो दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और प्रगाढ़ करेगा। भारत और रूस के बीच लंबे समय से सामरिक और रक्षा सहयोग का इतिहास रहा है, और यह सौदा इस साझेदारी को और भी मजबूत करेगा।

बिहार में B.Sc और 12वीं के लिए भर्ती की घोषणा

पटना: बिहार राज्य में विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी की चाहत रखने वालों के लिए एक सुनहरा अवसर आया है। All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) पटना और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने नई भर्ती प्रक्रिया की घोषणा की है, जिसमें B.Sc और 12वीं पास उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं।

AIIMS पटना में लैब तकनीशियन पद पर भर्ती

AIIMS पटना ने लैब तकनीशियन III के पद के लिए भर्ती निकाली है। इस पद के लिए एक मात्र रिक्ति है, जिसमें उम्मीदवारों से B.Sc, 12वीं, और DMLT की डिग्री मांगी गई है। उम्मीदवारों को यह अवसर ऑफलाइन आवेदन के माध्यम से प्राप्त होगा। आवेदन की प्रक्रिया 29 अगस्त 2025 से शुरू होकर 12 सितंबर 2025 तक चलेगी। आवेदन के लिए इच्छुक उम्मीदवारों को AIIMS पटना की आधिकारिक वेबसाइट aiimspatna.edu.in पर जाना होगा और आवेदन पत्र डाउनलोड कर भरना होगा।

इस पद के लिए चयनित उम्मीदवारों को प्रति माह 20,000 रुपये का वेतन मिलेगा। उम्मीदवारों को लैब में काम करने और स्वास्थ्य संबंधित परीक्षणों के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता प्रदान करनी होगी। AIIMS पटना में यह भर्ती स्थानीय और राज्य स्तर पर चिकित्सा क्षेत्र में कार्य करने के इच्छुक युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है।

BPSC में सहायक पर्यावरण वैज्ञानिक पद पर भर्ती

वहीं दूसरी ओर, बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने 17 सहायक पर्यावरण वैज्ञानिक (Assistant Environmental Scientist) पदों के लिए भर्ती निकाली है। इस पद के लिए B.Sc डिग्री वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं। BPSC ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो 27 अगस्त 2025 से शुरू होकर 19 सितंबर 2025 तक चलेगी। इच्छुक उम्मीदवारों को BPSC की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।

इस पद के तहत, उम्मीदवारों को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और जल स्रोतों की निगरानी से संबंधित विभिन्न कार्यों का निर्वहन करना होगा। चयनित उम्मीदवारों को सरकारी विभागों में कार्य करने का मौका मिलेगा, और उनके कार्यों का पर्यावरणीय प्रभाव महत्वपूर्ण होगा।

महंगाई भत्ता अपडेट: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर

नई दिल्ली। कोविड-19 महामारी ने दुनिया भर में आर्थिक गतिविधियों को झटका दिया, और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। वित्तीय संकट के चलते केंद्र सरकार ने मार्च 2020 में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया, जिसमे केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में प्रस्तावित बढ़ोतरी को रोक दिया गया। यह रोक जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की तीन किश्तों पर लागू रही, जिससे कुल 18 महीने तक डीए में कोई इज़ाफा नहीं हुआ।

सरकार का रुख -बकाया डीए नहीं मिलेगा

हाल ही में लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि रोकी गई डीए की किश्तें अब कर्मचारियों को नहीं दी जाएंगी। उन्होंने बताया कि यह निर्णय महामारी के दौरान उत्पन्न वित्तीय दबाव को देखते हुए लिया गया था। उस समय देश का राजकोषीय घाटा 9.2% तक पहुंच गया था। हालांकि वर्तमान में सरकार ने इसे घटाकर बजट अनुमान 4.4% पर लाने में सफलता पाई है, लेकिन फिर भी डीए बकाया भुगतान की कोई योजना नहीं है।

यह बयान उन लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए निराशाजनक रहा जो लगातार यह मांग कर रहे थे कि रोका गया डीए भुगतान किया जाए। कर्मचारी संगठनों ने भी कई बार इस विषय को उठाया, लेकिन सरकार का रुख शुरू से ही साफ रहा है।

वर्तमान डीए दर -55%, जल्द हो सकती है बढ़ोतरी

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को 55% महंगाई भत्ता मिल रहा है। जुलाई-दिसंबर 2025 की संशोधन अवधि में इसमें 3% की संभावित बढ़ोतरी की चर्चा है, जिससे डीए दर बढ़कर 58% हो सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नई दर की घोषणा दिवाली के आसपास हो सकती है, जिससे कर्मचारियों को त्योहार के समय थोड़ी राहत मिल सकती है। यह संशोधन महंगाई दर के आंकड़ों और अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आधार पर किया जाएगा।

महिलाओं को इस उम्र में बंद हो जाते हैं 'पीरियड्स'

हेल्थ डेस्क। महिलाएं जब जीवन के एक विशेष दौर से गुजरती हैं, तो उनके शरीर में कई प्रकार के बदलाव होते हैं। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील बदलाव होता है पीरियड्स का रुक जाना, जिसे हम रजोनिवृत्ति कहते हैं। रजोनिवृत्ति की उम्र आमतौर पर 45 से 55 वर्ष के बीच होती है, लेकिन यह हर महिला के शरीर पर निर्भर करता है। इस उम्र के बाद, महिलाओं के मासिक धर्म चक्र रुक जाते हैं और यह जीवन के एक नए चरण की शुरुआत को दर्शाता है।

रजोनिवृत्ति का कारण क्या है?

पीरियड्स के बंद होने के पीछे मुख्य कारण महिलाओं के अंडाशय द्वारा एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन कम होना है। ये हार्मोन शरीर के प्रजनन तंत्र को नियंत्रित करते हैं। जब अंडाशय इन हार्मोनों का उत्पादन करना बंद कर देते हैं, तो मासिक धर्म चक्र भी रुक जाता है। इस समय को प्रारंभिक रजोनिवृत्ति या अंतिम रजोनिवृत्ति कहा जाता है। हालांकि, कुछ महिलाएं इस बदलाव का अनुभव जल्दी, यानी 40 वर्ष की आयु से पहले भी कर सकती हैं, जिसे 'प्रारंभिक रजोनिवृत्ति' कहते हैं।

रजोनिवृत्ति के लक्षण

रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इनमें से कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

1 .मासिक धर्म में असामान्यता: पहले की तुलना में पीरियड्स असमान या कम समय के लिए हो सकते हैं, और अंत में पूरी तरह से रुक सकते हैं।

2 .गर्मी की लहरें: यह एक सामान्य लक्षण है, जिसमें शरीर में अचानक गर्मी महसूस होती है।

3 .मूड स्विंग्स: रजोनिवृत्ति के दौरान महिलाओं को मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन भी हो सकता है।

4 .नींद में समस्या: इस उम्र में महिलाओं को नींद में दिक्कत हो सकती है, जिससे थकान और अन्य शारीरिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

5 .हड्डियों का कमजोर होना: एस्ट्रोजेन हार्मोन की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है।