इस सर्वे के अनुसार, आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में वैश्विक कंपनियां भारत में निवेश करने की योजना बना रही हैं। अनुमान है कि वर्ष 2026 तक लगभग 13 प्रतिशत वैश्विक सीईओ भारत को निवेश के लिए प्राथमिक विकल्प मानेंगे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुना है, जो भारत के प्रति बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। वहीं, अमेरिका अभी भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
सरकारी सुधारों से मजबूत हुआ भरोसा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में निवेश का माहौल बेहतर होने के पीछे सरकार द्वारा किए गए आर्थिक सुधारों की बड़ी भूमिका है। वस्तु एवं सेवा कर जैसी नीतियों और उत्पादन को बढ़ावा देने वाली प्रोत्साहन योजनाओं से उद्योगों को स्थिरता और स्पष्टता मिली है। इससे विदेशी कंपनियों को भारत में लंबे समय तक कारोबार करने का भरोसा मिला है।
भारत पर ट्रंप टैरिफ का असर सीमित
सर्वे में यह भी सामने आया है कि भारत में कारोबार कर रहे अधिकांश वैश्विक सीईओ टैरिफ को बड़ा जोखिम नहीं मानते। बहुत कम निवेशकों को लगता है कि शुल्क बढ़ने से उनके व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि, कुछ क्षेत्रों जैसे कपड़ा, चमड़ा और समुद्री उत्पादों को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन इन कंपनियों ने नए बाजारों की तलाश और व्यापार समझौतों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है।
घरेलू बाजार को लेकर जबरदस्त उम्मीद
भारत के घरेलू बाजार को लेकर सीईओ का उत्साह बाकी दुनिया की तुलना में कहीं अधिक है। देश में काम कर रहे बड़ी संख्या में शीर्ष अधिकारी आने वाले समय में मजबूत मांग और विकास की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, वैश्विक स्तर पर यह भरोसा अपेक्षाकृत कम नजर आता है।
इसके अलावा, भारत में कई कंपनियों के प्रमुखों को भविष्य में मुनाफा बढ़ने का भी पूरा भरोसा है। यह आत्मविश्वास इस बात का संकेत है कि भारत सिर्फ निवेश का गंतव्य ही नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास का केंद्र बनता जा रहा है।

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