हालांकि, यह वृद्धि पिछले वर्ष दिसंबर में दर्ज 5.1 प्रतिशत की तुलना में कम है, फिर भी इसे हाल के महीनों में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि दिसंबर में कोर इंडस्ट्रियल आउटपुट चार महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जिससे निवेश और उत्पादन को लेकर भरोसा बढ़ा है।
किन क्षेत्रों ने दिखाई मजबूती
कोर सेक्टर में शामिल आठ उद्योग कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और बिजली औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में करीब 40 प्रतिशत का योगदान देते हैं। दिसंबर 2025 में इनमें से पांच क्षेत्रों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।
सबसे बेहतर प्रदर्शन सीमेंट और स्टील सेक्टर का रहा। सीमेंट उत्पादन में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि स्टील उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। यह संकेत देता है कि निर्माण और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गतिविधियां फिर से रफ्तार पकड़ रही हैं। बिजली उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिली, जो औद्योगिक मांग में सुधार का संकेत है। इसके साथ ही उर्वरक और कोयला उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई।
तेल और गैस बने कमजोर कड़ी
जहां एक ओर कई सेक्टरों ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया, वहीं तेल और गैस से जुड़े क्षेत्रों की कमजोरी अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। दिसंबर में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई। रिफाइनरी उत्पादों का उत्पादन भी मामूली रूप से घटा। अप्रैल से दिसंबर 2025-26 की अवधि को देखें तो हाइड्रोकार्बन सेक्टर का समग्र प्रदर्शन कमजोर रहा, जो घरेलू उत्पादन से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियों की ओर इशारा करता है।
नौ महीने का समग्र चित्र
वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर के बीच कोर सेक्टर उत्पादन में कुल मिलाकर सीमित वृद्धि दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण तेल और गैस क्षेत्रों का दबाव में रहना है। हालांकि, स्टील, सीमेंट और बिजली जैसे सेक्टरों की मजबूती ने औद्योगिक गतिविधियों को संतुलन में बनाए रखा है। सरकार द्वारा नवंबर 2025 के आंकड़ों में संशोधन के बाद यह साफ हुआ है कि दिसंबर में कोर सेक्टर की रफ्तार में क्रमिक सुधार आया है। इससे यह संकेत मिलता है कि आर्थिक गतिविधियां धीरे-धीरे स्थिरता की ओर बढ़ रही हैं।
ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत का औद्योगिक क्षेत्र पुनरुद्धार की राह पर है। बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में बढ़ती मांग, सरकारी खर्च और निजी निवेश से आने वाले महीनों में औद्योगिक ग्रोथ को और सहारा मिल सकता है। हालांकि, तेल और गैस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सुधार के बिना विकास की रफ्तार पूरी तरह संतुलित नहीं हो पाएगी।

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