पहले चरण का निर्माण
परियोजना का पहला चरण (भाग-ए) में 4.70 किलोमीटर लंबे हिस्से का निर्माण लगभग 23.21 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा। विभाग ने इसे 12 महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है। अधिकारियों ने बताया कि चरणबद्ध निर्माण से समय और लागत का बेहतर प्रबंधन संभव होगा और गुणवत्ता की निगरानी भी सुनिश्चित होगी।
ट्रैफिक जाम से राहत
इस बाईपास के पूरा होने के बाद लखीसराय और पटना के सीमावर्ती क्षेत्रों में यातायात की भीड़ कम होने की उम्मीद है। यह मार्ग विशेष रूप से भारी वाहनों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता प्रदान करेगा, जिससे निवासियों को राहत मिलेगी और यात्रा का समय घटेगा। साथ ही कृषि उत्पादों, औद्योगिक सामग्रियों और अन्य वाणिज्यिक वस्तुओं की आवाजाही भी तेज होगी।
मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट
इस परियोजना की घोषणा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फरवरी 2025 में अपनी प्रगति यात्रा के दौरान की थी। परियोजना स्थानीय आबादी की लंबे समय से प्रमुख मांग रही है, और इसका निर्माण कार्य इस मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
क्षेत्रीय विकास में योगदान
पटना शहर सड़क प्रभाग के कार्यकारी अभियंता आलोक कुमार ठाकुर ने बताया कि बाईपास परियोजना तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण के लिए निविदा जारी हो चुकी है, और निविदा प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि परियोजना के दौरान निर्धारित गुणवत्ता मानकों का सख्ती से पालन किया जाएगा।
नया बाईपास न केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करेगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और वाणिज्यिक विकास को भी बढ़ावा देगा। इसके साथ ही भविष्य में कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक और आवासीय विकास के अवसर भी खुलेंगे, जिससे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।
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