मंत्री ने बताया कि जीविका से जुड़ने के बाद महिलाओं को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए किसी के सामने हाथ फैलाने की मजबूरी नहीं रही। स्वरोजगार और समूह आधारित कार्यों ने उन्हें सम्मानजनक आजीविका का साधन दिया है, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
महिला रोजगार योजना से करोड़ों को सहारा
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब तक 1.56 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सहयोग राशि दी जा चुकी है। इस राशि का उपयोग महिलाओं ने छोटे-बड़े रोजगार शुरू करने में किया है। सरकार की योजना यहीं नहीं रुकती, आने वाले दिनों में इन महिलाओं को अपने कार्य को विस्तार देने के लिए दो-दो लाख रुपये तक का अतिरिक्त सहयोग देने की तैयारी है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी तथा वे स्थायी आजीविका की ओर बढ़ सकेंगी।
जीविका दीदियों का सम्मान
ग्रामीण विकास मंत्री ने यह बातें “कम्युनिटी वाइसेज कान्क्लेव” कार्यक्रम के दौरान कहीं, जहां जीविका दीदियों ने तालियों की गूंज के साथ इस पहल का स्वागत किया। पटना के ज्ञान भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को मोमेंटो देकर सम्मानित भी किया गया। राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में जीविका समूहों से जुड़ी महिलाएं इस आयोजन में शामिल हुईं।
महिला सशक्तीकरण की सामूहिक सोच
कार्यक्रम में विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि परिवार और समाज के पोषण के लिए महिलाओं का आर्थिक रूप से सशक्त होना जरूरी है। वहीं ग्रामीण विकास मंत्रालय की संयुक्त सचिव स्मृति शरण ने बिहार की जीविका दीदियों को देशभर में महिला सशक्तीकरण का प्रेरक उदाहरण बताया।
स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि जीविका के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर सामाजिक संतुलन बेहतर हुआ है और स्वास्थ्य सेवाएं भी मजबूत हुई हैं। समाज कल्याण विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी ने कहा कि देश का सबसे बड़ा जीविका नेटवर्क बिहार में है और वर्ष 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को स्वस्थ मां और बच्चे के जरिए हासिल किया जा सकता है।
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