भारत के समुद्री निर्यात में वृद्धि, अमेरिकी टैरिफ बेअसर

नई दिल्ली। भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। अमेरिकी बाजार में भारी टैरिफ के बावजूद निर्यात में तेज वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने वैश्विक बाजारों में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत के समुद्री उत्पादों का निर्यात 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 6.56 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। अकेले दिसंबर 2025 में निर्यात 0.8 बिलियन डॉलर था, जो पिछले साल इसी महीने की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है।

विशेष रूप से वियतनाम और बेल्जियम जैसे नए बाजारों में निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई। वियतनाम को निर्यात 99.9 प्रतिशत और बेल्जियम को 90.3 प्रतिशत बढ़ा। रूस, कनाडा, थाईलैंड, जर्मनी, ब्रिटेन और जापान में भी निर्यात में सकारात्मक रुझान देखा गया।

अमेरिका में टैरिफ का असर, अन्य बाजारों ने कमाया

हालांकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यातक बाजार बना हुआ है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ के चलते चालू वित्त वर्ष में अमेरिका को निर्यात में 7 प्रतिशत की गिरावट का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद चीन, वियतनाम, बेल्जियम और अन्य नए बाजारों में निर्यात वृद्धि ने अमेरिका से हुए नुकसान की भरपाई कर दी। इस तरह, गैर-अमेरिकी बाजार भारत के निर्यात के नए इंजन के रूप में उभरे हैं।

यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय समुद्री उत्पादों पर 59.71 प्रतिशत का शुल्क लगाया है, जिससे प्रतिस्पर्धी देशों जैसे इक्वाडोर, वियतनाम और थाईलैंड के मुकाबले भारत को नुकसान होने का डर था। इसके अलावा, यूरोपीय संघ ने हाल ही में भारत की 102 अतिरिक्त मत्स्य इकाइयों को शिपमेंट के लिए मंजूरी दी, जिससे निर्यात की संभावनाएं और बढ़ीं।

इस वित्त वर्ष में भारत के समुद्री उत्पादों में वृद्धि

वियतनाम – निर्यात में 99.9% की अभूतपूर्व वृद्धि हुई।

बेल्जियम – निर्यात में 90.3% की वृद्धि दर्ज की गई।

रूस – निर्यात में 45% वृद्धि।

कनाडा – निर्यात में 20% वृद्धि।

थाईलैंड – निर्यात में 16.8% वृद्धि।

जर्मनी – निर्यात में 52% वृद्धि।

ब्रिटेन – निर्यात में 23% वृद्धि।

जापान – निर्यात में 9% वृद्धि।

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