मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत अमेरिका से होने वाले निर्यात घाटे की भरपाई के लिए नए बाजारों की तलाश जारी रखेगा। भारत का मानना है कि रूस से तेल आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर अमेरिका नई शर्तें थोप सकता है। इसलिए भारत ने न तो जल्दबाजी दिखाई है और न ही चीन की तरह किसी जवाबी कार्रवाई में भाग लिया है।
रूस से तेल आयात में कमी
अमेरिका द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ और कुछ रूसी कंपनियों पर प्रतिबंध के चलते भारत ने रूस से तेल का आयात कम कर दिया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में रूस से कच्चे तेल का आयात 35.2% था, जो 2024-25 में घटकर 32.3% हो गया। इस वित्तीय वर्ष में और तेज गिरावट देखी गई, और नवंबर में भारत ने केवल 17.7 लाख बैरल जबकि दिसंबर में 12 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा।
भारत ने अमेरिका के समक्ष रूस से तेल आयात पर 25% अतिरिक्त टैरिफ हटाने और शेष 25% को 15% करने का प्रस्ताव रखा था। बदले में अमेरिका को तेल आयात बढ़ाने और अन्य क्षेत्रों में समझौते का विकल्प दिया गया। इसके बावजूद भारत ने रूस से आयात पूरी तरह बंद नहीं किया।
द्विपक्षीय समझौते (BTA) में भारत की स्थिति
भारत ने BTA के तहत अमेरिका को दी गई पेशकशों पर अड़े रहने का निर्णय किया है। देश यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी प्रकार का समझौता भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए संतुलित हो। इसके लिए भारत समय लेकर विश्वसनीयता और संतुलन के पहलुओं पर ध्यान दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत का यह कदम न केवल ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह दिखाता है कि देश अपने हितों के प्रति स्पष्ट और मजबूत नीति अपनाता है।
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