तोप के गोले में लगा ‘रामजेट’ इंजन
अब तक आम तौर पर तोप से दागा गया गोला केवल शुरुआती रफ्तार के सहारे आगे बढ़ता था और धीरे-धीरे उसकी गति कम हो जाती थी। लेकिन IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने इस सोच को बदल दिया है। उन्होंने गोले के पिछले हिस्से में एक छोटा लेकिन शक्तिशाली रामजेट इंजन फिट किया है।
तोप से निकलते ही यह इंजन सक्रिय हो जाता है और हवा से ऑक्सीजन लेकर ईंधन को जलाता है। इससे गोले को हवा में लगातार अतिरिक्त ताकत मिलती रहती है, जिससे उसकी गति और दूरी दोनों बढ़ जाती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस तकनीक के लिए नई तोपें खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मौजूदा तोपों में सिर्फ नए किस्म के गोले इस्तेमाल करने होंगे।
पुरानी तोपों को मिली नई ताकत
इस तकनीक का असर भारतीय सेना की प्रमुख तोपों पर साफ दिखा है। पोखरण और देवलाली जैसे परीक्षण क्षेत्रों में हुए ट्रायल में नतीजे उम्मीद से कहीं बेहतर रहे। ATAGS की मारक क्षमता लगभग 40 किमी से बढ़कर 70 किमी तक पहुंच गई। K9 Vajra की रेंज 36 किमी से बढ़कर करीब 62 किमी हो गई। Dhanush तोप अब लगभग 55 किमी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम हो गई। यह बढ़त दुश्मन को दूर से ही निशाना बनाने में भारत को रणनीतिक बढ़त देती है।
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मेहनत
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी। IIT मद्रास के प्रोफेसर पी. ए. रामकृष्ण के नेतृत्व में वैज्ञानिकों और सैन्य विशेषज्ञों की टीम ने इसे सफल बनाया। इस प्रयास में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल पी. आर. शंकर सहित कई अनुभवी प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों का योगदान रहा।
भारतीय सेना के लिए रणनीतिक बढ़त
इस तकनीक के आने से भारत की तोपखाना क्षमता पूरी तरह बदल सकती है। सीमाओं पर तैनात सेना अब दुश्मन की पहुंच से बाहर रहते हुए सटीक वार कर सकेगी। यह न केवल लागत-प्रभावी समाधान है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।

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