बिहार में जमीन मालिकों की मौज! सरकार ने दी बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के हित में एक सराहनीय और जनकल्याणकारी निर्णय लिया है। खासतौर पर 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग जमीन मालिकों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने जमीन और प्लॉट की रजिस्ट्री प्रक्रिया को आसान, तेज और सुविधाजनक बनाने की घोषणा की है। यह कदम बुजुर्गों के सम्मान और उनके जीवन को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

बुजुर्गों की परेशानियों को समझते हुए फैसला

सरकार के संज्ञान में कई ऐसे मामले आए थे, जहाँ अधिक उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण बुजुर्गों को रजिस्ट्री कार्यालय तक जाने में काफी दिक्कत होती थी। लंबी कतारें, जटिल प्रक्रियाएँ और बार-बार कार्यालयों के चक्कर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान करते थे। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया।

मोबाइल रजिस्ट्री इकाई की व्यवस्था

नई पहल के तहत ऐसे बुजुर्ग नागरिक, जो रजिस्ट्री कार्यालय आने में असमर्थ हैं, उनके लिए मोबाइल रजिस्ट्री यूनिट की सुविधा शुरू की जाएगी। यह विशेष इकाई सीधे बुजुर्गों के घर जाकर जमीन या प्लॉट की रजिस्ट्री से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को पूरा करेगी। इससे बुजुर्गों को न तो यात्रा करनी पड़ेगी और न ही दफ्तरों में भटकना होगा।

समयबद्ध और पारदर्शी प्रक्रिया

सरकार ने संबंधित विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि 80 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के रजिस्ट्री मामलों का निपटारा अधिकतम सात कार्य दिवसों के भीतर किया जाए। इससे अनावश्यक देरी रुकेगी और प्रक्रिया में तेजी आएगी। इसके साथ ही रजिस्ट्री से जुड़ी हर जानकारी बुजुर्गों को स्पष्ट रूप से देने पर जोर दिया गया है, ताकि किसी प्रकार का भ्रम या गलतफहमी न रहे।

शोषण रोकने के लिए निगरानी

अक्सर यह देखा गया है कि जानकारी के अभाव में बुजुर्गों के साथ रजिस्ट्री के दौरान गड़बड़ी या शोषण की आशंका रहती है। इसे रोकने के लिए सरकार ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का निर्णय लिया है। पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा, ताकि बुजुर्ग निश्चिंत होकर अपने काम पूरे कर सकें।

1 अप्रैल 2026 से लागू होगी व्यवस्था

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से पूरे बिहार में लागू होगी। सरकार को विश्वास है कि इस पहल से राज्य के हजारों बुजुर्ग नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और जमीन से जुड़े मामलों में उन्हें सम्मानजनक व सहज अनुभव प्राप्त होगा।

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