भारत में बनेगा 'जेट इंजन', लगेगी फैक्ट्री, तैयारी शुरू

नई दिल्ली। भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाने की तैयारी शुरू हो गई है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और फ्रांसीसी कंपनी सफ्रान मिलकर भारत में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट और राफेल के लिए जेट इंजन विकसित करेंगे। यह परियोजना दशकों से चली आ रही विदेशी इंजन निर्भरता को समाप्त करने की दिशा में अहम साबित होगी।

इस साझेदारी के तहत 110–120 kN श्रेणी का टर्बोफैन इंजन बनाया जाएगा, जो भारत के एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और अन्य फाइटर जेट प्रोग्राम के लिए शक्ति प्रदान करेगा। DRDO के पास पहले ही रूसियों के साथ फाइटर जेट उपकरण बनाने का अनुभव है, वहीं सफ्रान इंजन निर्माण में विशेषज्ञता रखती है। इस संयुक्त प्रयास से भारत का एयरोस्पेस सेक्टर तकनीकी और उत्पादन दोनों में मजबूत होगा।

स्वदेशी जेट इंजन के फायदे

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भारत को पूरी तकनीक और बौद्धिक संपदा (IP) का नियंत्रण मिलेगा। इंजन की डिजाइन, उन्नत धातु विज्ञान, सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड निर्माण, थर्मल बैरियर कोटिंग और डिजिटल कंट्रोल सिस्टम जैसी सभी संवेदनशील तकनीकें भारत के हाथ में होंगी। इसके चलते भविष्य में भारत अपनी जरूरतों के अनुसार इंजन को डिज़ाइन और उत्पादन कर सकेगा।

7 अरब डॉलर की रणनीतिक साझेदारी

यह परियोजना केवल इंजन खरीदने का सौदा नहीं है, बल्कि इसे एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है। सफ्रान और DRDO मिलकर इंजन को नई तकनीक के साथ ‘clean-sheet design’ के आधार पर विकसित करेंगे। यह अमेरिकी GE F414 इंजन डील से अलग है, क्योंकि उस डील में पहले से बने इंजन का लाइसेंस और सीमित तकनीक हस्तांतरण शामिल था, जबकि इस साझेदारी में इंजन पूरी तरह भारत की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार होगा।

एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

इस परियोजना से भारत जेट इंजन तकनीक में पूरी महारत हासिल करेगा। स्टील्थ ऑप्टिमाइजेशन, सुपरक्रूज क्षमता, थ्रस्ट-टू-वेट अनुपात और आधुनिक मटेरियल तकनीक जैसी खूबियों के साथ यह इंजन भारत के एयरोस्पेस कार्यक्रमों को नई गति देगा। इस प्रोजेक्ट के मंजूरी मिलने के बाद भारत न केवल अपनी जेट इंजन जरूरतों को पूरा कर सकेगा, बल्कि एयरोस्पेस तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के नए युग की शुरुआत भी होगी।

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