अमेरिका और चीन: नया वर्ल्ड ऑर्डर, भारत है कहां?

नई दिल्ली। दुनिया एक बड़े भू-राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। जिस वैश्विक व्यवस्था पर दशकों तक अमेरिका का वर्चस्व रहा, वह अब तेज़ी से दरकती दिख रही है। अमेरिका के मौजूदा रवैये ने न सिर्फ उसके विरोधियों को बल्कि उसके पारंपरिक सहयोगियों को भी असहज कर दिया है। इसी खाली होती जगह में चीन खुद को एक नए वैश्विक नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस उभरते नए वर्ल्ड ऑर्डर में भारत की भूमिका क्या है?

अमेरिका: दोस्त हों या दुश्मन, सब पर भारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने वैश्विक राजनीति में अस्थिरता बढ़ा दी है। टैरिफ युद्ध के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था को झटका दिया, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। अब ग्रीनलैंड पर कब्जे की खुली धमकियों ने यूरोप के उन देशों को भी चौंका दिया है, जो अब तक अमेरिका को अपना सबसे भरोसेमंद साझेदार मानते थे।

ट्रंप का यह रुख यह संदेश दे रहा है कि अमेरिका अब साझेदारी से ज्यादा दबाव और धमकी की भाषा में विश्वास करता है। यही कारण है कि यूरोपीय देश खुलकर विरोध की मुद्रा में हैं और अमेरिका के विकल्प तलाशने लगे हैं, जिसका फायदा चीन जैसे देशों को हो सकता हैं।

चीन का मौका: खुद को बताया नया वैश्विक नेता

अमेरिका की आक्रामक और एकतरफा नीति ने चीन के लिए एक सुनहरा अवसर पैदा कर दिया है। चीन ने खुद को शांति, सहयोग और बहुपक्षवाद के समर्थक के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है। चीनी नेतृत्व यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह टकराव नहीं, बल्कि सहमति और साझा विकास की बात करता है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन यह संदेश दे रहा है कि वह मुक्त व्यापार, वैश्विक सहयोग और विकासशील देशों की आवाज़ बनने के लिए तैयार है। यह रणनीति खास तौर पर उन देशों को आकर्षित कर रही है जो अमेरिका की अनिश्चित नीतियों से परेशान हैं।

बिना ज़्यादा प्रयास के चीन को फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ रही। अमेरिका की नीतियां ही चीन के लिए रास्ता साफ कर रही हैं। जहां अमेरिका सहयोगियों पर दबाव बना रहा है, वहीं चीन धैर्य के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा है। हालांकि चीन पर आक्रामकता, मानवाधिकार उल्लंघन और पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद जैसे आरोप हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर फिलहाल ये मुद्दे अमेरिका की तुलना में कम नुकसान पहुंचा रहे हैं।

नया वर्ल्ड ऑर्डर: भारत कहां खड़ा है?

इस पूरे घटनाक्रम में भारत की स्थिति बेहद अहम लेकिन जटिल है। भारत न तो पूरी तरह अमेरिका के साथ जाना चाहता है और न ही चीन के नेतृत्व वाली व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

भारत के सामने एक ओर चीन की चुनौती है—सीमा विवाद, क्षेत्रीय प्रभाव और आर्थिक दबाव। दूसरी ओर अमेरिका है, जो साझेदारी तो चाहता है लेकिन अक्सर अपनी शर्तों पर। ऐसे में भारत एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर सकता है, जो किसी एक ध्रुव का हिस्सा बनने के बजाय बहुध्रुवीय दुनिया में अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए।

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