एआई से जांच और इलाज में क्रांतिकारी बदलाव
प्रजेंटेशन के जरिए यह स्पष्ट किया गया कि एआई आधारित सिस्टम बीमारियों की समय रहते पहचान करने में बेहद कारगर साबित हो सकता है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं में जोखिम के संकेतों को पहले ही पहचानकर उन्हें समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता है। इससे न केवल मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि नवजात शिशुओं की जान भी सुरक्षित रखी जा सकेगी।
फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स होंगे और सशक्त
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव डॉ. पिंकी जोवल ने कहा कि एआई तकनीक का असली लाभ तभी मिलेगा, जब इसका उपयोग जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को मजबूत बनाने के लिए किया जाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। यदि इन कर्मियों को एआई आधारित टूल्स का सहयोग मिले, तो इलाज की गुणवत्ता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ेंगी।
काम आसान बनाए, बोझ नहीं
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि एआई आधारित उपकरण ऐसे होने चाहिए, जो स्वास्थ्य कर्मियों के काम को सरल बनाएं, न कि उन पर अतिरिक्त बोझ डालें। आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एआई का प्रभावी उपयोग कर दूरस्थ इलाकों में भी बेहतर जांच और उपचार संभव है।
डेटा सुरक्षा और मरीज की सहमति
सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि मरीज की जानकारी का उपयोग उसकी सहमति के बिना नहीं होना चाहिए। डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि जब तक लोगों को सिस्टम पर भरोसा नहीं होगा, तब तक नई तकनीक को व्यापक रूप से अपनाना संभव नहीं है।
मातृ मृत्यु दर घटाने में अहम भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई की मदद से मातृ मृत्यु दर को उल्लेखनीय रूप से कम किया जा सकता है। समय पर पहचान, त्वरित निर्णय और बेहतर रेफरल सिस्टम ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाएंगे। एआई के जरिए दूर-दराज के क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह आसानी से पहुंचाई जा सकती है। राज्य में लगभग 1.80 लाख स्वास्थ्य कर्मी इस व्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं, जिनकी भूमिका को तकनीक के माध्यम से और सशक्त बनाया जा सकता है।

0 comments:
Post a Comment