पंचायत में ही मिलेगा राजस्व समाधान
नई व्यवस्था के अनुसार अब राजस्व कर्मचारी अंचल कार्यालय में बैठने के बजाय अपनी आवंटित पंचायतों में तय दिन और समय पर मौजूद रहेंगे। जमीन से जुड़े कार्य जैसे दाखिल-खारिज, सुधार, प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी राजस्व सेवाएं अब गांव में ही उपलब्ध होंगी। इससे ग्रामीणों को न सिर्फ सुविधा मिलेगी, बल्कि समय और पैसे की भी बचत होगी।
रोस्टर प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता
यदि किसी राजस्व कर्मचारी को एक से अधिक पंचायतों की जिम्मेदारी दी गई है, तो वह रोस्टर व्यवस्था के तहत अलग-अलग दिनों में अलग पंचायतों में बैठेगा। कर्मचारी किस दिन और किस पंचायत में उपलब्ध रहेगा, इसकी जानकारी पंचायत भवन के नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक की जाएगी। इससे भ्रम की स्थिति खत्म होगी और कामकाज में पारदर्शिता आएगी।
अफसर करेंगे सीधी निगरानी
इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अंचलाधिकारी (CO) और DCLR को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। ये अधिकारी समय-समय पर पंचायत भवनों का निरीक्षण करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राजस्व कर्मचारी निर्धारित समय पर उपस्थित हैं और लोगों के कार्य सही तरीके से निपटा रहे हैं।
भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम
गांव में ही अधिकारी और आम जनता का सीधा संपर्क होने से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी। इससे अवैध वसूली और भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी। साथ ही, वर्षों से लंबित पड़े छोटे-मोटे भूमि विवादों का समाधान भी तेजी से हो सकेगा।
ग्रामीणों के लिए बड़ा बदलाव
‘राजस्व कचहरी’ की शुरुआत से बिहार के ग्रामीण इलाकों में प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होगी। यह पहल न सिर्फ सेवाओं को सुलभ बनाएगी, बल्कि शासन व्यवस्था पर लोगों का भरोसा भी मजबूत करेगी। कुल मिलाकर यह कदम ग्रामीण विकास और सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

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