स्टील्थ फाइटर जेट्स पर लगेगी नजर
बता दें की येनिसेई रडार की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टील्थ विमानों को पहचानने की क्षमता है। यह रडार उन लड़ाकू विमानों को ट्रैक करने में सक्षम बताया जा रहा है, जिन्हें रडार से बचने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। इसमें अमेरिकी F-35, चीन के J-20 जैसे स्टील्थ फाइटर जेट शामिल हैं। चीन पहले ही अपने स्टील्थ विमानों को भारत की सीमाओं के पास तैनात करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। ऐसे में यह रडार भारत को पहले से चेतावनी और लंबी दूरी पर लक्ष्य भेदने की क्षमता दे सकता है।
98L6E येनिसेई रडार की तकनीकी ताकत
येनिसेई एक AESA (Active Electronically Scanned Array) आधारित रडार है, जो एक साथ कई बैंड और फ्रीक्वेंसी पर काम कर सकता है। आमतौर पर स्टील्थ विमान X-बैंड रडार से बचने के लिए डिजाइन किए जाते हैं, लेकिन येनिसेई का मल्टी-स्पेक्ट्रम ऑपरेशन उनकी इस कमजोरी को उजागर कर देता है।
इस रडार की रेंज करीब 400 किलोमीटर तक बताई जाती है और इसमें उन्नत ECCM (Electronic Counter-Countermeasures) क्षमता मौजूद है। इसका मतलब है कि भारी जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के दौरान भी यह रडार सटीक जानकारी देता रहेगा।
S-400 के साथ मिलकर बनेगा मजबूत कवच
यदि येनिसेई को भारत के मौजूदा S-400 सेंसर नेटवर्क से जोड़ा जाता है, तो टारगेट की पहचान पहले और ज्यादा दूरी से संभव हो सकेगी। इससे इंटरसेप्टर मिसाइलों को जल्दी लॉन्च किया जा सकेगा और दुश्मन के हवाई खतरों को सीमा के भीतर घुसने से पहले ही निष्क्रिय किया जा सकेगा।

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