इन सेंटरों के माध्यम से किसान जुताई, बुआई, रोपनी, कटाई, हार्वेस्टिंग और थ्रेसिंग जैसे कामों के लिए यंत्र मामूली किराए पर इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी, समय पर काम पूरा होगा और फसल की उत्पादकता में भी वृद्धि होगी।
हर सेंटर की स्थापना पर अधिकतम 10 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे और स्थानीय फसलों के अनुसार यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। योजना का लाभ सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीविका समूह, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ/एफपीसी), स्वयं सहायता समूह और बैंक से जुड़े किसान क्लब भी इसका हिस्सा बनेंगे।
अब तक राज्य में 950 सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं और चालू वित्तीय वर्ष 2025–26 में 267 नए सेंटर खोलने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों के लिए इस योजना के फायदे:
महंगे यंत्र बिना खरीदें भी खेती संभव
खेती की लागत में कमी
समय पर काम पूरा होना
फसल और आय में वृद्धि
हर पंचायत में आधुनिक यंत्रों की उपलब्धता
यह पहल बिहार के छोटे किसानों के लिए खेती को आसान और अधिक लाभकारी बनाने में मददगार साबित होगी।

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