तीनों प्रस्तावित गंगा पथों के लिए कंसल्टेंट स्तर पर काम शुरू किया जा चुका है। अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी। इसके लिए करीब तीन महीने का समय निर्धारित किया गया है। DPR तैयार होने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण एजेंसी के चयन के लिए टेंडर जारी किया जाएगा।
तीन बड़े गंगा पथों की योजना
बक्सर-कोइलवर गंगा पथ: बक्सर से कोइलवर के बीच करीब 90 किलोमीटर लंबा गंगा पथ प्रस्तावित है। इस परियोजना को विश्वामित्र पथ नाम दिया गया है और इसकी स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है।
बिदुपुर-दिघवारा गंगा पथ: गंगा के किनारे बिदुपुर से दिघवारा तक लगभग 56 किलोमीटर लंबी सड़क विकसित की जाएगी। इस मार्ग के बनने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के साथ-साथ पटना और पश्चिमी बिहार के बीच आवागमन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
कोन्हुआ-डुमरिया घाट गंगा पथ: तीसरा मार्ग कोन्हुआ से डुमरिया घाट के बीच करीब 73 किलोमीटर लंबा होगा। इसे नारायणी पथ के नाम से विकसित करने की योजना है। यह मार्ग बिहार से उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले आवागमन को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
DPR के बाद टेंडर की प्रक्रिया
परियोजनाओं के निर्माण से पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसमें सड़क की अंतिम रूपरेखा यानी एलाइनमेंट, निर्माण की अनुमानित लागत और यातायात से जुड़ी जरूरतों का अध्ययन शामिल होगा। इसके अलावा आने वाले वर्षों में इन सड़कों पर वाहनों की संभावित संख्या का भी आकलन किया जाएगा।
यदि परियोजनाओं पर टोल व्यवस्था लागू की जाती है, तो उससे संभावित राजस्व का अनुमान भी DPR में शामिल किया जाएगा। DPR तैयार होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया शुरू होगी। टेंडर के जरिए निर्माण एजेंसी का चयन किया जाएगा और इसके बाद जमीन पर काम शुरू करने की दिशा में आगे की कार्रवाई होगी।

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