इसका उद्देश्य कर्मचारियों को अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश चुनने की ज्यादा स्वतंत्रता देना है। यह बदलाव पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) की ओर से किया गया है। रेलवे बोर्ड ने भी इसे 24 सितंबर से अपने जोनल कार्यालयों और उत्पादन इकाइयों में लागू कर दिया है।
अब ये 6 विकल्प उपलब्ध
नई व्यवस्था में कर्मचारियों के पास डिफॉल्ट स्कीम, 100% सरकारी प्रतिभूतियां (G-Sec), लाइफ साइकिल 25-लो, लाइफ साइकिल 50-मॉडरेट, लाइफ साइकिल 75-हाई और लाइफ साइकिल-अग्रेसिव का विकल्प रहेगा।
नए जोड़े गए विकल्पों में लाइफ साइकिल 75-हाई में 35 वर्ष की उम्र तक इक्विटी में अधिकतम 75% निवेश की गुंजाइश होगी। उम्र बढ़ने के साथ यह हिस्सा घटता जाएगा और 55 वर्ष की उम्र तक 15% रह जाएगा। वहीं लाइफ साइकिल-अग्रेसिव में 45 वर्ष तक इक्विटी निवेश 50% और 55 वर्ष तक 35% तक रह सकता है।
10 पेंशन फंड मैनेजर में से चुन सकेंगे
डिफॉल्ट व्यवस्था से बाहर निकलने वाले कर्मचारी अब PFRDA में पंजीकृत 10 पेंशन फंड मैनेजरों में से अपनी पसंद का मैनेजर चुन सकते हैं। हालांकि, इक्विटी में ज्यादा निवेश से बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ सकती है, लेकिन इसके साथ बाजार जोखिम भी रहता है।
कर्मचारियों को सलाह दी गई है कि फंड मैनेजर चुनने से पहले उनके पुराने प्रदर्शन की जानकारी जरूर देखें। विकल्प चुनने की सुविधा CRA पोर्टल पर शुरू हो चुकी है, जहां कर्मचारी अपने PRAN खाते से लॉगिन करके निवेश विकल्प बदल सकते हैं।

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